Cell cycle and Cell Divisions NEET प्रश्न हिंदी में — वनस्पति विज्ञान (Botany) MCQ उत्तर सहित

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अर्धसूत्री विभाजन की कौन-सी प्रावस्था समजात गुणसूत्रों के पृथक होकर विपरीत ध्रुवों की ओर गति करने से विशेषित है, जिसमें प्रत्येक ध्रुव को जनक कोशिका की आधी गुणसूत्र संख्या प्राप्त होती है?

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पाठ वर्णन करता है: 'इसके बाद ऐनाफ़ेज़ I आता है जिसमें समजात गुणसूत्र अपने दोनों अर्धगुणसूत्रों सहित विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं। प्रत्येक ध्रुव को जनक कोशिका की आधी गुणसूत्र संख्या प्राप्त होती है।'

दो युग्मकों, जिनमें प्रत्येक में गुणसूत्रों का पूर्ण अगुणित समुच्चय होता है, के संलयन से द्विगुणित समुच्चय वाला युग्मनज बनता है। यह प्रक्रिया किसका महत्त्वपूर्ण पहलू है:

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संदर्भ अर्धसूत्री विभाजन का खंड इस कथन से आरंभ करता है: 'लैंगिक जनन द्वारा संतति के उत्पादन में दो युग्मकों का संलयन सम्मिलित है, जिनमें प्रत्येक में गुणसूत्रों का पूर्ण अगुणित समुच्चय होता है।'

अर्धसूत्री विभाजन II के अंत में प्रारूपिक रूप से कितनी अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं?

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पाठ कहता है: 'अर्धसूत्री विभाजन II के अंत में चार अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं।' और 'इसके बाद कोशिकाद्रव्य विभाजन होता है जिसके परिणामस्वरूप कोशिकाओं का चतुष्क, अर्थात चार अगुणित संतति कोशिकाएँ बनती हैं (चित्र 10.4)।'

अर्धसूत्री विभाजन की किस प्रावस्था के दौरान द्विसंयोजक (बाइवैलेंट) मध्यवर्ती पट्टिका पर पंक्तिबद्ध होते हैं?

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NCERT पाठ कहता है: 'मेटाफ़ेज़ I के दौरान द्विसंयोजक मध्यवर्ती पट्टिका पर व्यवस्थित होते हैं।'

निम्नलिखित में से कौन जंतु कायिक कोशिकाओं में समसूत्री विभाजन से उत्पन्न कोशिकाओं की गुणिता का वर्णन करता है?

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NCERT पाठ के अनुसार, 'जंतुओं में समसूत्री कोशिका विभाजन केवल द्विगुणित कायिक कोशिकाओं में देखा जाता है।' इसका अर्थ है कि परिणामी संतति कोशिकाएँ भी द्विगुणित होंगी, जिससे गुणसूत्र संख्या बनी रहती है। अतः जंतु कायिक कोशिकाओं में समसूत्री विभाजन सदैव द्विगुणित कोशिकाएँ उत्पन्न करता है।

समसूत्री विभाजन केंद्रक-कोशिकाद्रव्य अनुपात को पुनर्स्थापित करने के लिए आवश्यक है। कोशिका वृद्धि के दौरान यह अनुपात क्यों बिगड़ जाता है?

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NCERT कहता है, 'कोशिका वृद्धि के परिणामस्वरूप केंद्रक और कोशिकाद्रव्य के बीच का अनुपात बिगड़ जाता है। अतः केंद्रक-कोशिकाद्रव्य अनुपात को पुनर्स्थापित करने के लिए कोशिका का विभाजित होना आवश्यक हो जाता है।' यह गड़बड़ी इसलिए होती है क्योंकि कोशिका वृद्धि (कोशिकाद्रव्यी वृद्धि के रूप में) एक सतत प्रक्रम है, जिससे केंद्रक के सापेक्ष कोशिकाद्रव्यी आयतन बड़ा हो जाता है। फिर समसूत्री विभाजन कोशिका को विभाजित कर इष्टतम अनुपात पुनर्स्थापित करता है।

कोशिका चक्र की शांत अवस्था ($G_0$) में कोशिकाओं का निम्नलिखित में से कौन-सा प्रमुख अभिलक्षण है?

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संदर्भ उल्लेख करता है, 'ये कोशिकाएँ जो आगे विभाजित नहीं होतीं, $G_1$ प्रावस्था से निकलकर कोशिका चक्र की एक निष्क्रिय अवस्था में प्रवेश करती हैं जिसे शांत अवस्था ($G_0$) कहते हैं। इस अवस्था की कोशिकाएँ उपापचयी रूप से सक्रिय रहती हैं किंतु जीव की आवश्यकता के अनुसार बुलाए जाने तक प्रचुरोद्भवन नहीं करतीं।'

पादपों में समसूत्री विभाजन अगुणित और द्विगुणित दोनों कोशिकाओं में देखा जाता है। संदर्भ में उदाहरणित कौन-सा ऊतक प्रकार पादप के पूरे जीवनकाल में सतत वृद्धि के लिए मुख्यतः समसूत्री विभाजन का उपयोग करता है?

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NCERT कहता है, 'विभज्योतकों – शीर्षस्थ और पार्श्व कैम्बियम – में समसूत्री विभाजनों के परिणामस्वरूप पादपों की उनके पूरे जीवनकाल में सतत वृद्धि होती है।' यह समसूत्री विभाजन द्वारा सतत पादप वृद्धि में विभज्योतकों की भूमिका को रेखांकित करता है।

निम्नलिखित में से कौन-सा सामान्यतः समसूत्री विभाजन का प्रत्यक्ष महत्व नहीं है?

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समसूत्री विभाजन को 'समीकरणी विभाजन' के रूप में वर्णित किया गया है जहाँ 'जनक और संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या समान होती है।' गुणसूत्र संख्या का आधा हो जाना अर्धसूत्री विभाजन का अभिलक्षण है, समसूत्री का नहीं। वृद्धि, आनुवंशिक समरूपता और कोशिका मरम्मत, सभी पाठ में उल्लिखित समसूत्री विभाजन के स्पष्ट महत्व हैं।

अधिचर्म की ऊपरी परत, आंत्र के अस्तर और रक्त कोशिकाओं का निरंतर प्रतिस्थापन किसका प्रत्यक्ष परिणाम है:

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NCERT पाठ निर्दिष्ट करता है, 'समसूत्री विभाजन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान कोशिका मरम्मत है। अधिचर्म की ऊपरी परत की कोशिकाएँ, आंत्र के अस्तर की कोशिकाएँ और रक्त कोशिकाएँ निरंतर प्रतिस्थापित होती रहती हैं।' यह इन कोशिकाओं के प्रतिस्थापन को सीधे समसूत्री विभाजनों से जोड़ता है।

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