आधारशिला जातियाँ संरक्षण की पात्र हैं क्योंकि ये
(d): आधारशिला जातियाँ वे जातियाँ हैं जिनका समुदाय पर उल्लेखनीय तथा असमान रूप से बड़ा प्रभाव होता है। उनका हटना अथवा उनकी संख्या में कमी समुदाय की संरचना तथा कार्य में व्यवधान उत्पन्न करती है। उदाहरणस्वरूप अंतरज्वारीय क्षेत्रों में तारामीन शंबुकों को खाती है। तारामीन के हटने से शंबुकों की प्रभाविता हो जाती है, जो शैवालों तथा चरने वाली जातियों को बाहर कर देती है। उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में गूलर के वृक्ष आधारशिला जाति के रूप में कार्य करते हैं, क्योंकि वे भोजन की कमी की अवधि में अनेक जंतुओं को फल प्रदान करते हैं।