Ecosystem NEET प्रश्न हिंदी में — वनस्पति विज्ञान (Botany) MCQ उत्तर सहित

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निम्नलिखित खाद्य श्रृंखला में संभावित कड़ी A की पहचान कीजिए

हरा पादप -> कीट -> मेंढक -> A -> चील

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हरा पादप (उत्पादक) → कीट (प्राथमिक उपभोक्ता अथवा प्राथमिक शाकाहारी) → मेंढक (द्वितीयक उपभोक्ता अथवा प्राथमिक मांसाहारी) → कोबरा (तृतीयक उपभोक्ता अथवा द्वितीयक मांसाहारी) → चील (शीर्ष उपभोक्ता अथवा तृतीयक मांसाहारी)

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन द्वितीयक अनुक्रमण के लिए सही है?

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द्वितीयक अनुक्रमण अथवा उपक्रमक वह पारिस्थितिक अनुक्रमण है जो हाल ही में अनावृत हुए क्षेत्र में होता है, जिसमें पहले रह चुके जीवों के प्रचुर कार्बनिक मलबे, अवशेष तथा प्रजनक अंग विद्यमान रहते हैं। यह अधिक सामान्य है तथा वनाग्नि, वनोन्मूलन, अत्यधिक चराई, भूस्खलन, भूकंप, बार-बार आने वाली बाढ़ आदि के कारण किसी क्षेत्र के अनावृत होने से उत्पन्न होता है। हाल में अनावृत हुए क्षेत्र पर घासस्थल की स्थापना के लिए केवल 50 से 100 वर्ष आवश्यक होते हैं। वन के निर्माण में 100 से 200 वर्ष लगते हैं।

ऊर्जा के पिरामिड के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है, जबकि शेष तीन सही हैं?

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ऊर्जा का पिरामिड विभिन्न आरोही पोषी स्तरों में प्रति इकाई क्षेत्र ऊर्जा का क्रमवार आलेखीय निरूपण है, जिसमें आधार पर उत्पादक तथा शिखर पर शीर्ष मांसाहारी होते हैं। ऊर्जा का पिरामिड सभी स्थितियों में सीधा होता है। यह अन्य प्रकार के पारिस्थितिक पिरामिडों की तुलना में अधिक यथार्थ भी है।

किसी क्षेत्र में किसी पोषी स्तर पर किसी भी समय जीवित पदार्थ के भार को कहते हैं 

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किसी पारितंत्र में उसके विभिन्न पोषी स्तरों पर उपस्थित जीवित पदार्थ की मात्रा को स्थायी फसल कहते हैं। इसे प्रति इकाई क्षेत्र संख्या अथवा जैवभार के रूप में व्यक्त किया जाता है। जैवभार को ताजे भार अथवा शुष्क भार के रूप में मापा जाता है।

ताजे भार की अपेक्षा शुष्क भार को वरीयता दी जाती है, क्योंकि यह नमी की मात्रा के साथ बदलता नहीं है। स्थायी फसल उत्पादकता तथा वृद्धि की सघनता का संकेत देती है।

कुल आपतित सौर विकिरण में PAR का अनुपात है 

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PAR (प्रकाश संश्लेषी सक्रिय विकिरण) सौर विकिरण की 400 से 700 nm वाली उस स्पेक्ट्रमी परास को निर्दिष्ट करता है, जिसका उपयोग प्रकाश संश्लेषी जीव प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में कर सकते हैं। कुल आपतित सौर विकिरण में PAR का अनुपात 50% से कम होता है।

शाकाहारियों तथा अपघटकों द्वारा उपभोग के लिए उपलब्ध जैवभार को कहते हैं

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शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (NPP) प्रति इकाई समय में प्रति इकाई क्षेत्र/आयतन में उत्पादकों द्वारा संचित कार्बनिक पदार्थ का भार है। NPP प्रकाश संश्लेषण द्वारा निर्मित कार्बनिक पदार्थ की दर में से श्वसन तथा अन्य हानियों की दर घटाने के बराबर होती है। संचित जैवभार एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर को स्थानांतरित होता है।

द्वितीयक उत्पादकता उपभोक्ता स्तरों, अर्थात् शाकाहारियों, मांसाहारियों तथा अपघटकों पर ऊर्जा संचय की दर है।

सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP) प्रकाश संश्लेषण की कुल दर कहलाती है, जिसमें मापन अवधि के दौरान श्वसन में उपयोग हुआ कार्बनिक पदार्थ भी सम्मिलित होता है।

निम्नलिखित में से कौन जैविक समुदाय के लक्षणों में से एक है?

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स्तरण जैविक समुदाय का लक्षण है। स्तरण ऊर्ध्वाधर परतीकरण है, अर्थात् एक ही स्थान पर विभिन्न पादपों/जीवों द्वारा बनाई गई एक से अधिक परतों का होना। किसी वन में 5-7 परतें हो सकती हैं, जिनमें बड़े या शिखर वृक्ष, मध्यम वृक्ष, छोटे वृक्ष, झाड़ियाँ, शाक तथा भूमि-वनस्पति सम्मिलित हैं। स्तरण उपयोगी है, क्योंकि इसमें विभिन्न प्रकार के बहुत अधिक जीव समा सकते हैं तथा संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग होता है। भौगोलिक रूप से पृथक होने पर भी ऐसी समान परतों अथवा पारिस्थितिक निकेतों पर रहने वाले जंतुओं को पारिस्थितिक समतुल्य कहा जाता है।

कुल वैश्विक कार्बन का लगभग 70% कहाँ पाया जाता है

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(c) वायुमंडल कार्बन डाइऑक्साइड का स्रोत है, जिसका उपयोग पादप प्रकाश संश्लेषण में करते हैं तथा जो अपचयित होकर कार्बन यौगिक बनाती है। वर्तमान में वायुमंडल में कार्बन का कुल भार लगभग 7x1017 g, अर्थात् 700000 मिलियन टन है। महासागर वायुमंडल में CO2 की मात्रा का नियमन करते हैं तथा इस प्रकार अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समुद्री जल में वायु से 50 गुना अधिक CO2 होती है, अर्थात् कुल वैश्विक कार्बन का लगभग 70% महासागरों में पाया जाता है। यह कार्बोनेट तथा बाइकार्बोनेट के रूप में होता है।

प्रकृति में गिरे हुए लट्ठों के अपघटन की मंद दर उनकी किस विशेषता के कारण होती है

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प्रकाश संश्लेषी रूप से स्थिरीकृत कार्बन अंततः सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित होता है तथा कार्बन के दो प्रमुख रूप बनते हैं, मेथेन(CH4) तथा कार्बन डाइऑक्साइड(CO2)। सूक्ष्मजीव उत्पादकों तथा उपभोक्ताओं के मृत जीवद्रव्य के जटिल यौगिकों को तोड़ते हैं, अपघटन के कुछ उत्पादों का अवशोषण करते हैं तथा सरल पदार्थ मुक्त करते हैं। प्रकृति में गिरे हुए लट्ठों के अपघटन की मंद दर उनकी कम नमी मात्रा के कारण होती है। 

गिरे हुए लट्ठों में सेलुलोस अधिक मात्रा में होता है। गिरे हुए लट्ठों के चारों ओर का वातावरण वायवीय होता है, अर्थात् o2 उपस्थित होती है

Quercus जातियाँ किसका प्रभावी घटक हैं

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शीतोष्ण पर्णपाती वन महाद्वीपीय जलवायु में उगते हैं, जहाँ ग्रीष्म ऋतु में वर्षा तथा कठोर शीत ऋतु होती है। इनमें Quercus virginiana, मैग्नोलिया जैसे चौड़ी पत्ती वाले पर्णपाती वृक्ष तथा Ficus aurea, Lysiloma जैसी उष्णकटिबंधीय जातियाँ प्रभावी होती हैं।

उष्णकटिबंधीय वर्षा वन भूमध्य रेखा के निकट निम्न ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहाँ वर्ष भर वितरित वार्षिक वर्षा 80 से 90 इंच से अधिक होती है। वृक्ष सामान्यतः तीन स्तर बनाते हैं, बिखरे हुए अत्यंत ऊँचे उद्भेदी वृक्ष, शिखर परत तथा अधःशिखर परत।

उष्णकटिबंधीय झाड़ी वन उन क्षेत्रों में विकसित होते हैं जहाँ नमी की स्थिति एक ओर मरुस्थल तथा सवाना और दूसरी ओर वर्षा वन के बीच की होती है।

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Frequently Asked Questions

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