एकव्याससममित पुष्प किसमें नहीं पाया जाता:
कैना में पुष्प असममित होता है।
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एकव्याससममित पुष्प किसमें नहीं पाया जाता:
कैना में पुष्प असममित होता है।
कुछ पर्णीय जड़ें भी अपस्थानिक जड़ें उत्पन्न करती हैं जैसे:
इनका उपयोग ब्रायोफिलम के प्रवर्धन में किया जा सकता है।
तने के मुख्य लक्षणों में सम्मिलित नहीं है:
तने के मुख्य लक्षणों में प्रांकुर से विकसित होना, धनात्मक प्रकाशानुवर्ती प्रकृति तथा पर्वसंधियों और पर्वों की उपस्थिति सम्मिलित है। परंतु अंतर्जात रूप से विकसित बहुकोशिकीय रोम की उपस्थिति तने का लक्षण नहीं है।
अदरक में कायिक प्रवर्धन किसके द्वारा होता है
अदरक में कायिक प्रवर्धन प्रकंद द्वारा होता है। प्रकंद ऐसे तने हैं जो भूमि के नीचे क्षैतिज रूप से बढ़ते हैं। अदरक में भूमिगत तने भोजन संचय से फूले होते हैं। शीर्षस्थ कलिका ऊपर की ओर बढ़कर पुष्पीय प्ररोह बनाती है तथा पार्श्व कलिकाएँ बढ़कर नया पादप बनाती हैं।
मूल रोम किस क्षेत्र से विकसित होते हैं
जड़ का शीर्ष एक अंगुश्ताने जैसी संरचना से ढका रहता है जिसे मूल गोप कहते हैं। यह मृदा में मार्ग बनाते समय जड़ के कोमल शीर्ष की रक्षा करता है। मूल गोप से कुछ मिलीमीटर ऊपर विभज्योतकी क्रियाशीलता का क्षेत्र होता है। इस क्षेत्र की कोशिकाएँ बहुत छोटी, पतली भित्ति वाली तथा सघन जीवद्रव्य युक्त होती हैं। ये बार-बार विभाजित होती हैं। इस क्षेत्र के समीपस्थ कोशिकाएँ तीव्र दीर्घीकरण तथा वृद्धि करती हैं और जड़ की लंबाई में वृद्धि के लिए उत्तरदायी होती हैं। इस क्षेत्र को दीर्घीकरण क्षेत्र कहते हैं। दीर्घीकरण क्षेत्र की कोशिकाएँ धीरे-धीरे विभेदित होकर परिपक्व हो जाती हैं। अतः यह क्षेत्र परिपक्वन क्षेत्र कहलाता है। इसी क्षेत्र से कुछ अधिचर्मी कोशिकाएँ अत्यंत महीन तथा कोमल, धागे जैसी संरचनाएँ बनाती हैं जिन्हें मूल रोम कहते हैं। ये मूल रोम मृदा से जल तथा खनिज अवशोषित करते हैं।
Bougainvillea में कंटक किसके रूपांतरण हैं
Bougainvillea में कंटक तने के रूपांतरण हैं। ये कठोर, नुकीली संरचनाएँ हैं जिन्होंने अपना वर्धी बिंदु खो दिया है और कठोर हो गई हैं। ये वाष्पोत्सर्जन के साथ-साथ जंतुओं द्वारा चरे जाने को भी कम करती हैं।
परिजायांगी पुष्प किसमें पाए जाते हैं
परिजायांगी पुष्प गुलाब में पाए जाते हैं।
पुष्पों को अन्य पुष्पीय भागों के सापेक्ष अंडाशय की स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। जब पुष्पीय भाग अंडाशय के नीचे की स्थिति से निकलते हैं तो पुष्प अधोजायांगी (hypo=नीचे; gynous=पुष्प) कहलाता है तथा अंडाशय उत्कृष्ट होता है, जैसे गुड़हल।
जब पुष्पीय भाग अंडाशय के ऊपर की स्थिति से निकलते हैं तो पुष्प उपरिजायांगी (epi=ऊपर) होता है तथा अंडाशय अधोवर्ती होता है, जैसे खीरा तथा अमरूद।
अधोवर्ती अंडाशय का एक अन्य विशेष प्रकरण है जिसमें बाह्यदल, दल तथा पुंकेसरों के आधार अंडाशय के चारों ओर एक प्याले में जुड़ जाते हैं जिसे हाइपैंथियम (पुष्पीय प्याला) कहते हैं। ऐसा पुष्प परिजायांगी (peri = चारों ओर) कहलाता है, जैसे गुलाब।
स्तंभीय बीजांडन्यास का एक उदाहरण है
नींबू (Citrus sp.) कुल-Rutaceae का सदस्य है, इसमें स्तंभीय बीजांडन्यास होता है।
Argemone कुल-Papaveraceae का सदस्य है, इसमें भित्तीय बीजांडन्यास होता है। Dianthus कुल-Caryophyllaceae का सदस्य है, इसमें मुक्त स्तंभीय बीजांडन्यास होता है। गेंदा कुल-Asteraceae का सदस्य है, इसमें आधारीय बीजांडन्यास होता है।
हाइपैंथोडियम पुष्पक्रम से विकसित फल कहलाता है
साइकोनस फल हाइपैंथोडियम पुष्पक्रम से विकसित होता है, eg Ficus carica, F. religiosa, F. benghalensis. फ्लास्क के आकार का पुष्पासन मादा पुष्पों को घेरे रहता है जो ऐकीन जैसे लघुफल बनाते हैं। इस फल में एक छोटा छिद्र होता है जो शल्की पत्तियों द्वारा सुरक्षित रहता है। मांसल हो जाने वाला पुष्पासन खाद्य होता है।
भ्रूणपोष, परिभ्रूणपोष तथा बीजचोल युक्त बीज का एक उदाहरण है
अरंडी
अरंडी के बीज (Ricinus communis, कुल -Euphorbiaceae) भ्रूणपोषी द्विबीजपत्री बीज हैं। इनमें भ्रूणपोष होता है जो बीज के भोजन संचय ऊतक का कार्य करता है। इनमें परिभ्रूणपोष तथा बीजचोल भी होते हैं।
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