Respiration NEET प्रश्न हिंदी में — वनस्पति विज्ञान (Botany) MCQ उत्तर सहित

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वसा, कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन के श्वसन-जनित विघटन में कौन-सा उपापचयज सामान्य है?

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ऐसीटिल Co-A वसा, कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन के श्वसन-जनित विघटन में सामान्य है। ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस हेक्सोकाइनेज एंजाइम की सक्रियता द्वारा फॉस्फोरिलीकृत होकर ग्लूकोस-6-फॉस्फेट बनाते हैं।

ग्लूकोस-6-फॉस्फेट फिर फ्रक्टोस 6 फॉस्फेट में तथा आगे फ्रक्टोस 1-6-बाइफॉस्फेट में बदल जाता है। पाइरुविक अम्ल ग्लाइकोलिसिस का अंत्य उत्पाद है।

वह ऊर्जा-मुक्तकारी उपापचयी प्रक्रिया जिसमें क्रियाधार का ऑक्सीकरण बाह्य इलेक्ट्रॉन ग्राही के बिना होता है, कहलाती है

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(b) किण्वन में ग्लूकोस का अपूर्ण ऑक्सीकरण अवायवीय दशाओं में अभिक्रियाओं के एक समुच्चय द्वारा होता है, जिसमें पाइरुविक अम्ल CO2 तथा एथेनॉल में बदल जाता है। पाइरुविक अम्ल डीकार्बोक्सिलेज तथा ऐल्कोहॉल डिहाइड्रोजिनेज एंजाइम इन अभिक्रियाओं का उत्प्रेरण करते हैं। जंतु कोशिकाओं में भी, जैसे व्यायाम के दौरान पेशियों में, जहाँ कोशिकीय श्वसन के लिए ऑक्सीजन अपर्याप्त होती है, पाइरुविक अम्ल लैक्टेट डिहाइड्रोजिनेज द्वारा अपचयित होकर लैक्टिक अम्ल बनाता है। अपचायक NADH + H+ है, जो दोनों प्रक्रियाओं में पुनःऑक्सीकृत होकर NAD+ बनता है

वायवीय श्वसन पथ को उपयुक्त रूप से क्या कहा जाता है 

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उभयचयी पथ वह जैवरासायनिक पथ है जो उपचयी तथा अपचयी दोनों प्रक्रियाओं में कार्य करता है। उभयचयी पथ का एक महत्वपूर्ण उदाहरण क्रेब्स चक्र है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट एवं वसा अम्ल का अपचय तथा ऐमीनो अम्ल संश्लेषण हेतु उपचयी पूर्ववर्तियों का संश्लेषण दोनों सम्मिलित हैं। जैसे, α-कीटोग्लूटारेट तथा ऑक्सैलोऐसीटेट।

ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण की रसोपरासरणी युग्मन परिकल्पना यह प्रस्तावित करती है कि ऐडिनोसीन ट्राइफॉस्फेट (ATP) इसलिए बनता है क्योंकि

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अपचयित सहएंजाइमों के ऑक्सीकरण तथा अंतिम ऑक्सीकरण के दौरान मुक्त ऊर्जा की सहायता से ATP का उत्पादन ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण कहलाता है। पीटर मिचेल (1961) ने ATP संश्लेषण हेतु रसोपरासरणी परिकल्पना नामक एक परिकल्पना प्रस्तुत की। इसके अनुसार जब इलेक्ट्रॉन द्वैत प्रोटॉन-इलेक्ट्रॉन वाहक से किसी अ-हाइड्रोजन वाहक की ओर प्रवाहित होते हैं तो H+ मुक्त होकर अंतरझिल्ली अवकाश में निष्कासित हो जाते हैं और इस प्रकार एक प्रोटॉन प्रवणता बनती है जिसमें अंतरझिल्ली अवकाश में H+ की सांद्रता आधात्री की तुलना में अधिक होती है। प्रोटॉन प्रेरक बल के कारण प्रोटॉन वापस प्रवाहित होते हैं तथा इस वापसी प्रवाह के दौरान मुक्त ऊर्जा F1 शीर्ष में उपस्थित ATPase को सक्रिय करके ATP का संश्लेषण कराती है।

निम्नलिखित में से कौन-सी स्तनधारी कोशिका ग्लूकोस का वायवीय रूप से कार्बन डाइऑक्साइड में उपापचय करने में असमर्थ है?

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(d) परिपक्व लाल रुधिर कोशिकाओं में कोशिकांग तथा केंद्रक अनुपस्थित होते हैं, अतः इनमें वायवीय श्वसन नहीं होता।

TCA चक्र के सभी एंजाइम माइटोकॉन्ड्रियल आधात्री में स्थित होते हैं, केवल एक को छोड़कर जो सुकेंद्रकियों में आंतरिक माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली में तथा प्रोकैरियोटों में कोशिकाद्रव्य में स्थित होता है। यह एंजाइम है

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(d) सक्सिनेट डिहाइड्रोजिनेज एंजाइम माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली पर उपस्थित होता है तथा सक्सिनेट के फ्यूमैरेट में ऑक्सीकरण का उत्प्रेरण करता है।

ग्लाइकोलिसिस, क्रेब्स चक्र तथा इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र का समग्र लक्ष्य किसका निर्माण है:

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(a) ग्लाइकोलिसिस, क्रेब्स चक्र तथा इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र भिन्न-भिन्न चरणों में ATP संश्लेषण के लिए होते हैं। ATP कोशिका की ऊर्जा मुद्रा है।

ग्लूकोस के एक अणु से अधिकतम कितने ATP अणु बन सकते हैं, यदि ग्लूकोस के एक मोल का CO2 तथा H2O में पूर्ण ऑक्सीकरण 686 kcal देता है तथा ATP के एक मोल के उच्च ऊर्जा फॉस्फेट बंध में उपलब्ध उपयोगी रासायनिक ऊर्जा 12 Kcal है?

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ATP का एक मोल 12 kcal ऊर्जा मुक्त करता है। अतः 686 kcal से 686/12 = 57.1 ATP अणु बनेंगे।

TCA चक्र को वायवीय पथ माना जाता है क्योंकि

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(c): TCA चक्र ईंधन अणु के ऐसीटिल CoA के माध्यम से ऑक्सीकरण हेतु चक्रीय जैवरासायनिक अपचयी पथ है, जिसमें ऐसीटिल CoA पूर्णतः ऑक्सीकृत होकर कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल बनाता है। क्रेब्स चक्र माइटोकॉन्ड्रियल आधात्री में चलता है क्योंकि उसमें घुलनशील एंजाइमों का जटिल मिश्रण होता है जो पाइरुविक अम्ल तथा अन्य छोटे अणुओं के श्वसन का उत्प्रेरण करता है। इस चक्र में 9 एंजाइमी चरण होते हैं, जिनमें से चार विहाइड्रोजनीकरण हैं

क्रेब्स चक्र में GTP किसमें बनता है

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(a) : क्रेब्स चक्र में GTP, सक्सिनिल CoA के सक्सिनिक अम्ल या सक्सिनेट में परिवर्तन के दौरान बनता है। इस अभिक्रिया के लिए आवश्यक एंजाइम सक्सिनिल थायोकाइनेज है। इस अभिक्रिया में होने वाला फॉस्फोरिलीकरण क्रियाधार स्तरीय फॉस्फोरिलीकरण है, जिसमें ATP संश्लेषण सीधे ऊर्जा मुक्ति से जुड़ा होता है।

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