भारतीय औषधीय पादपों की संकटग्रस्त जातियों में से एक है:
Podophyllum एक भारतीय संकटग्रस्त वनस्पति है। इसकी सूखी जड़ें तथा प्रकंद जीर्ण कब्ज तथा ट्यूमरी वृद्धि में उपयोग किए जाते हैं।
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भारतीय औषधीय पादपों की संकटग्रस्त जातियों में से एक है:
Podophyllum एक भारतीय संकटग्रस्त वनस्पति है। इसकी सूखी जड़ें तथा प्रकंद जीर्ण कब्ज तथा ट्यूमरी वृद्धि में उपयोग किए जाते हैं।
प्रोबायोटिक्स हैं:
प्रोबायोटिक्स जीवित सूक्ष्मजीव (जीवाणु अथवा यीस्ट) हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए, विशेष रूप से स्वस्थ आंत्र वनस्पति बनाए रखने के लिए, लाभदायक होते हैं। इन्हें प्रायः 'अच्छे' अथवा 'मित्र' जीवाणु कहा जाता है तथा ये सामान्यतः आहार अनुपूरक के रूप में लिए जाते हैं अथवा दही, केफिर और कोम्बुचा जैसे किण्वित खाद्यों में पाए जाते हैं।
निम्नलिखित में से कौन in situ संरक्षण के अंतर्गत सम्मिलित नहीं है?
(b) वानस्पतिक उद्यान (अर्थात् वे संस्थान जो बड़ी संख्या में जातियों, वंशों तथा कुलों का प्रतिनिधित्व करने वाले जीवित पादप संग्रह रखते हैं) ex situ संरक्षण, अर्थात् आवासों से बाहर संरक्षण, का साधन हैं।
In situ संरक्षण में आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण उन प्राकृतिक अथवा मानव-निर्मित पारितंत्रों के भीतर ही किया जाता है जिनमें वे पाए जाते हैं। इसमें राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, प्रकृति आरक्षित क्षेत्र, प्राकृतिक स्मारक, सांस्कृतिक भूदृश्य आदि सम्मिलित हैं।
भारत में किसकी सबसे बड़ी जाति-विविधता है?
(c)भारत में धान की सबसे बड़ी जाति विविधता अथवा किस्म-विविधता है।
भारत बारह महाविविधता वाले देशों में से एक है, जिसके पास विश्व के आनुवंशिक संसाधनों का ______ भाग है।
(d) : अनुमानित कुल जातियों की संख्या लगभग 1.74 मिलियन है। इनमें से भारत में ज्ञात जातियों की संख्या 1,42,000 अर्थात् कुल का लगभग 8.1% है, जबकि भारत का भूमि क्षेत्र केवल 2.4% है। लगभग 45000 पादप जातियों तथा उससे दोगुनी जंतु जातियों के साथ भारत विश्व के 12 महाविविधता वाले देशों में से एक है।
निम्नलिखित में से कौन आक्रामक जाति नहीं है?
(b): अदेशी अथवा विदेशी जातियाँ प्रायः उनके आर्थिक तथा अन्य उपयोगों के लिए अनजाने ही लाई जाती हैं। वे अक्सर आक्रामक बन जाती हैं तथा स्थानीय जातियों को खदेड़ देती हैं। इन जातियों को जातियों के विलोपन का दूसरा प्रमुख कारण माना जाता है (पहला आवास विनाश है)। Lantana camara ने मध्य भारत के वनों में अनेक जातियों का स्थान ले लिया है। Parthenium hysterophorus ने मैदानों के खुले स्थानों से कई शाकों तथा झाड़ियों को बाहर कर दिया है। जलकुंभी (Eichhornia crassipes) को प्रदूषण घटाने के लिए भारतीय जलों में लाया गया था; इसने अनेक स्थानों पर आर्द्रभूमियों सहित जलाशयों को अवरुद्ध कर दिया, जिससे कई जलीय पादप तथा जंतु मर गए। Nelumbo (कमल) आक्रामक जाति नहीं है।
विश्व में जैवविविधता तप्त-स्थलों की कुल संख्या है
(b) : जैवविविधता तप्त-स्थल उच्च स्थानिकता तथा उच्च जाति-समृद्धि वाले क्षेत्र हैं। प्रारंभ में 25 जैवविविधता तप्त-स्थल पहचाने गए थे, परंतु बाद में सूची में नौ और जोड़े गए, जिससे विश्व में जैवविविधता तप्त-स्थलों की कुल संख्या 34 हो गई।
निम्नलिखित में से एक जैवविविधता ह्रास के लिए उत्तरदायी नहीं है।
(c): Ex-situ संरक्षण जैवविविधता ह्रास के लिए उत्तरदायी नहीं है, बल्कि यह जैवविविधता के संरक्षण की एक विधि है। इसमें चयनित दुर्लभ पादपों/जंतुओं का संरक्षण उनके प्राकृतिक घरों से बाहर के स्थानों में किया जाता है।
विदेशी जाति आक्रमण, सह-विलोपन तथा वनोन्मूलन अनेक जातियों के विलोपन तथा जैवविविधता की हानि का कारण बनते हैं।
जैवविविधता के संदर्भ में निम्नलिखित में से एक कथन असत्य है। उसकी पहचान कीजिए।
(a) जैवविविधता तप्त-स्थल उच्च स्थानिकता तथा उच्च जाति-समृद्धि वाले क्षेत्र हैं।
ये मुख्यतः तीन कारकों द्वारा निर्धारित होते हैं:
(i) जातियों की संख्या/जाति विविधता
(ii) स्थानिकता की मात्रा
(iii) संकट की मात्रा
जैवविविधता के विषय में सही कथन का चयन कीजिए।
(c) पश्चिमी घाट भारत के पश्चिमी तट के साथ महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु तथा केरल में स्थित हैं। यहाँ पुष्पी पादपों, उभयचरों,
सरीसृपों, कुछ स्तनधारियों तथा तितलियों की जाति-समृद्धि तथा स्थानिकता की उच्च मात्रा है।
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