अभिकथन : बिस(डाइमेथिलग्लाइऑक्सिमेटो)निकैल(II) ज्यामितीय समावयवता दर्शा सकता है।
कारण : किरैल संरचना वाले चतुष्फलकीय संकुल प्रकाशिक समावयवता दर्शाते हैं।
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अभिकथन : बिस(डाइमेथिलग्लाइऑक्सिमेटो)निकैल(II) ज्यामितीय समावयवता दर्शा सकता है।
कारण : किरैल संरचना वाले चतुष्फलकीय संकुल प्रकाशिक समावयवता दर्शाते हैं।
अभिकथन : किसी दिए गए लिगेंड के लिए आवेश घनत्व का परिमाण बढ़ता है, जैसे-जैसे धातु
आयन पर आवेश बढ़ता है।
कारण : के प्रति दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है परंतु इसके प्रति प्रबल क्षेत्र लिगेंड की भाँति कार्य करता है
(B) जैसे-जैसे धातु आयन का आवेश बढ़ता है, इसके बढ़े हुए
आवेश घनत्व के कारण लिगेंड धातु आयन के अधिक निकट खिंच आते हैं। लिगेंडों के निकट आने पर वे d-कक्षक का अधिक विपाटन उत्पन्न करते हैं, जिससे
एक बड़ा मान प्राप्त होता है।
विटामिन- B12 में उपस्थित है
विटामिन-B12 का अणुसूत्र C63H84 N14O14 PCO है तथा इसका रासायनिक नाम सायनोकोबालामिन है। अतः विटामिन-B12 में कोबाल्ट उपस्थित है।
पादप प्रजनन कार्यक्रमों में किसी दी गई फसल के सभी जीनों के समस्त विविध युग्मविकल्पियों वाला (पादपों/बीजों का) सम्पूर्ण संग्रह कहलाता है
(d) इसे जननद्रव्य संग्रह अथवा विविधता का संग्रहण कहते हैं। श्रेष्ठ पुनर्योगजों का चयन अर्थात् सम्पूर्ण समूह में से दृश्य परीक्षण द्वारा सर्वोत्तम पादप का चयन करना तथा खेत में उगाने हेतु उनके बीज एकत्र करना। पर-संकरण भिन्न पादपों के लक्षणों को एक साथ संयोजित करने की विधि है। चयन तथा मूल्यांकन संकरण के मुख्य चरण हैं।
किसी फसल के सभी जीनों के विविध युग्मविकल्पियों वाला पादपों तथा बीजों का संग्रह कहलाता है
(a) जननद्रव्य किसी जीव के आनुवंशिक संसाधनों का संग्रह है। पादपों के लिए जननद्रव्य को किसी जीव के समस्त जीनों के बीज-संग्रह के रूप में संचित किया जा सकता है।
उपसहसंयोजन रसायन में अल्फ्रेड वर्नर के योगदान के विषय में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
NCERT पाठ के अनुसार, 'वर्नर उपसहसंयोजन यौगिकों में आबंधन लक्षणों का वर्णन करने वाले पहले व्यक्ति थे। परंतु उनका सिद्धांत इस तरह के मूल प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सका: (iii) उपसहसंयोजन यौगिकों में लक्षणिक चुंबकीय और प्रकाशिक गुण क्यों होते हैं?' अतः, यह कथन कि उनके सिद्धांत ने सभी चुंबकीय और प्रकाशिक गुणों को समझाया, गलत है।
वर्नर के सिद्धांत में, प्राथमिक संयोजकताओं की प्रकृति क्या है?
NCERT कहता है, 'प्राथमिक संयोजकताएँ सामान्यतः आयनीकरणीय होती हैं और ऋणायनों द्वारा संतुष्ट होती हैं।'
वर्नर के सिद्धांत के अनुसार, धातु आयन की द्वितीयक संयोजकता क्या निरूपित करती है?
NCERT पाठ कहता है, 'वर्नर ने धातु आयन से सीधे बंधे समूहों की संख्या के लिए द्वितीयक संयोजकता पद प्रस्तावित किया; इन उदाहरणों में से प्रत्येक में द्वितीयक संयोजकताएँ छह हैं।' यह भी उल्लेख करता है, 'द्वितीयक संयोजकताएँ अनायनीकरणीय होती हैं। ये उदासीन अणुओं या ऋणायनों द्वारा संतुष्ट होती हैं। द्वितीयक संयोजकता उपसहसंयोजन संख्या के बराबर होती है और किसी धातु के लिए नियत होती है।'
अमोनिया के साथ कोबाल्ट(III) क्लोराइड यौगिकों की एक शृंखला पर विचार कीजिए। यदि $CoCl_3\cdot 5NH_3$ का 1 mol आधिक्य सिल्वर नाइट्रेट विलयन मिलाने पर AgCl के 2 mol देता है, तो वर्नर के सिद्धांत के आधार पर यह यौगिक की संरचना के विषय में क्या इंगित करता है?
NCERT पाठ यह विशिष्ट उदाहरण देता है: '1 mol $CoCl_3\cdot 5NH_3$ (बैंगनी) ने 2 mol AgCl दिया'। इसका अर्थ है कि क्लोराइड आयनों के 2 मोल आयनीकरणीय हैं, जो इंगित करता है कि वे प्राथमिक संयोजकता मंडल में हैं और धातु से सीधे बंधे नहीं हैं। शेष एक क्लोराइड आयन द्वितीयक संयोजकता मंडल में होना चाहिए, सीधे बंधा और अनायनीकरणीय।
वर्नर के प्रारंभिक उदाहरणों के अनुसार, निम्नलिखित में से किस यौगिक में धातु आयन की प्राथमिक संयोजकता 2 है?
NCERT कहता है, '$CrCl_3$, $CoCl_2$ या $PdCl_2$ जैसे द्विअंगी यौगिकों की प्राथमिक संयोजकता क्रमशः 3, 2 और 2 है।' $PdCl_2$ के लिए, प्राथमिक संयोजकता 2 दी गई है।
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