सीरियम (Z=58) लैंथेनॉइडों का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। सीरियम के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है
Ce(IV) विलयन में एक स्थायी स्पीशीज़ है।
D & F Block Elements (Chemistry) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।
सीरियम (Z=58) लैंथेनॉइडों का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। सीरियम के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है
Ce(IV) विलयन में एक स्थायी स्पीशीज़ है।
जब निकल आयन में d8 व्यवस्था के दुर्बल अष्टफलकीय क्षेत्र से के प्रबल क्षेत्र में बदलती है, तो किन कक्षकों की ऊर्जा घट जाती है? Z-अक्ष के अनुदिश चतुष्कोणीय विरूपण मानिए।
चतुष्कोणीय विरूपण में z-अक्ष के अनुदिश लिगेंड दूर चले जाते हैं। z-दिशा से संबंधित कक्षकों के लिए उनका प्रतिकर्षण उल्लेखनीय रूप से घट जाता है। इनकी ऊर्जा घट जाती है।
अभिकथन: संक्रमण धातुओं के क्वथनांक उच्च होते हैं तथा परमाणवीकरण एन्थैल्पी उच्च होती है।
कारण: संक्रमण धातुएँ धातुओं की अभिलक्षणिक bcc, hcp या ccp संरचनाओं में पाई जाती हैं।
संक्रमण धातुओं में प्रबल धात्विक आबंधन उनके उच्च क्वथनांक तथा उच्च परमाणवीकरण एन्थैल्पी के लिए उत्तरदायी है।
अभिकथन: Zn, Cd तथा Hg को सामान्यतः संक्रमण धातु नहीं माना जाता।
कारण: उपर्युक्त तत्वों में d-कक्षक पूर्णतः भरे होते हैं, अतः ये धातुएँ संक्रमण तत्वों के सामान्य अभिलक्षणिक गुण नहीं दर्शातीं।
Zn, Cd तथा Hg को सामान्यतः संक्रमण धातु नहीं माना जाता क्योंकि इनके d-कक्षक पूर्णतः भरे होते हैं, अतः ये संक्रमण तत्वों के सामान्य अभिलक्षणिक गुण नहीं दर्शातीं। इसलिए Zn, Cd तथा Hg को सामान्यतः संक्रमण धातु नहीं माना जाता।
अभिकथन : एक संक्रमण धातु दूसरी संक्रमण धातु के साथ सरलता से मिश्रातु बनाती है।
कारण: संक्रमण धातुओं का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है, त्रिज्याएँ लगभग बराबर होती हैं तथा इनकी जालकों में संकुलन भी समान होता है।
संक्रमण धातुओं का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है, त्रिज्याएँ लगभग बराबर होती हैं तथा इनकी जालकों में संकुलन समान होता है, अतः ये धातुएँ ठोस अवस्था में भी एक-दूसरे में सरलता से घुल जाती हैं, अर्थात् एक धातु को दूसरी द्वारा सरलता से प्रतिस्थापित किया जा सकता है। इसी कारण संक्रमण धातुएँ परस्पर सरलता से मिश्रातु बनाती हैं।
अभिकथन : निर्जल कॉपर(II) क्लोराइड सहसंयोजक है जबकि निर्जल कॉपर(II) फ्लुओराइड प्रकृति में आयनिक है।
कारण: संक्रमण धातुओं के हैलाइडों में हैलोजन का परमाणु द्रव्यमान बढ़ने पर आयनिक गुण घटता है।
निर्जल कॉपर(II) क्लोराइड सहसंयोजक है जबकि निर्जल कॉपर(II) फ्लुओराइड आयनिक है, क्योंकि संक्रमण धातुओं के हैलाइडों में हैलोजन का परमाणु द्रव्यमान बढ़ने पर आयनिक गुण घटता है। फ्लुओरीन सर्वाधिक विद्युतऋणात्मक होने के कारण कॉपर के साथ आयनिक लवण बनाता है।
अभिकथन: संक्रमण धातुएँ उच्च परमाणवीकरण एन्थैल्पी दर्शाती हैं।
कारण : संक्रमण धातुओं के परमाणु प्रबल धात्विक बंधों द्वारा परस्पर बँधे रहते हैं।
संक्रमण धातुएँ उच्च परमाणवीकरण एन्थैल्पी दर्शाती हैं क्योंकि संक्रमण धातुओं के परमाणु प्रबल धात्विक बंधों द्वारा परस्पर बँधे रहते हैं।
अभिकथन : संक्रमण तत्व अंतराकाशी यौगिक बनाते हैं।
कारण: इस्पात तथा ढलवाँ लोहा कार्बन के साथ अंतराकाशी यौगिक बनने के कारण कठोर होते हैं।
संक्रमण तत्व अंतराकाशी यौगिक बनाते हैं जिनमें H, C तथा N जैसे हल्के तत्वों के छोटे परमाणु उनकी जालकों के रिक्त स्थानों में समा जाते हैं।
Ready to ace NEET?
Free access · No credit card required
हाँ। इस पेज के हर D & F Block Elements प्रश्न को बिना लॉगिन किए मुफ़्त हल किया जा सकता है, और सही उत्तर व विस्तृत व्याख्या तुरंत देखी जा सकती है।
नहीं। प्रश्न हल करने और उत्तर देखने के लिए किसी खाते की आवश्यकता नहीं है। मुफ़्त खाता बुकमार्क, निजी नोट्स और प्रगति ट्रैकिंग जोड़ देता है।
इस प्रश्न बैंक में NEET के पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) और अभ्यास प्रश्न दोनों शामिल हैं — जहाँ लागू हो, हर प्रश्न पर उसका परीक्षा वर्ष अंकित है।