बेन्ज़ीन के मोनो-हैलोजन प्रतिस्थापित व्युत्पन्नों में उनके सामान्य और IUPAC नामों के बीच क्या संबंध है?
NCERT में उल्लेख है, 'बेन्ज़ीन के मोनो-हैलोजन प्रतिस्थापित व्युत्पन्नों के लिए सामान्य और IUPAC नाम समान होते हैं।'
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बेन्ज़ीन के मोनो-हैलोजन प्रतिस्थापित व्युत्पन्नों में उनके सामान्य और IUPAC नामों के बीच क्या संबंध है?
NCERT में उल्लेख है, 'बेन्ज़ीन के मोनो-हैलोजन प्रतिस्थापित व्युत्पन्नों के लिए सामान्य और IUPAC नाम समान होते हैं।'
हैलोऐल्केनों को सामान्यतः किस समजातीय श्रेणी सूत्र द्वारा दर्शाया जाता है?
ऐल्किल हैलाइडों के लिए NCERT के अनुसार: 'ये $C_nH_{2n+1}X$ द्वारा दर्शाई जाने वाली समजातीय श्रेणी बनाते हैं'।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ऐल्किल हैलाइड में कार्बन-हैलोजन (C-X) आबंध की ध्रुवता का सही वर्णन करता है?
NCERT पाठ के अनुसार, 'हैलोजन परमाणु कार्बन से अधिक विद्युतऋणात्मक होते हैं, अतः ऐल्किल हैलाइड का कार्बन-हैलोजन आबंध ध्रुवित होता है; कार्बन परमाणु पर आंशिक धनावेश होता है जबकि हैलोजन परमाणु पर आंशिक ऋणावेश होता है।'
निम्नलिखित C-X आबंधों को उनकी आबंध लंबाई के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए: C-F, C-Cl, C-Br, C-I।
NCERT पाठ कहता है, 'आवर्त सारणी में वर्ग में नीचे जाने पर हैलोजन परमाणु का आकार बढ़ता है। फ्लुओरीन परमाणु सबसे छोटा और आयोडीन परमाणु सबसे बड़ा है। परिणामस्वरूप कार्बन-हैलोजन आबंध लंबाई भी C—F से C—I तक बढ़ती है।' इसका अर्थ है कि C-F की आबंध लंबाई सबसे कम और C-I की सबसे अधिक है।
हैलोऐरीनों में C-Cl आबंध के आंशिक द्विआबंध गुण का प्राथमिक कारण क्या है?
संदर्भ में उल्लेख है, 'अनुनाद के कारण C—Cl आबंध आंशिक द्विआबंध गुण प्राप्त कर लेता है', जहाँ 'हैलोजन परमाणु पर एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉन वलय के p-इलेक्ट्रॉनों के साथ संयुग्मन में होते हैं'।
C-X आबंध की प्रकृति के आधार पर नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति हैलोऐल्केनों और हैलोऐरीनों की अभिक्रियाशीलता की तुलना कीजिए।
NCERT पाठ कहता है, 'अनुनाद के कारण C—Cl आबंध आंशिक द्विआबंध गुण प्राप्त कर लेता है। परिणामस्वरूप हैलोऐरीन में आबंध विदलन हैलोऐल्केन की तुलना में कठिन होता है और इसलिए वे नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया के प्रति कम अभिक्रियाशील होते हैं।' साथ ही उल्लेख है, 'हैलोऐल्केन में C—Cl आबंध लंबाई 177 pm है, जबकि हैलोऐरीन में 169 pm। चूँकि छोटे आबंध को लंबे आबंध की तुलना में तोड़ना कठिन है, अतः हैलोऐरीन नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया के प्रति हैलोऐल्केनों से कम अभिक्रियाशील होते हैं।'
निम्नलिखित में से कौन-सा हैलोऐल्केन में उस कार्बन परमाणु के संकरण को दर्शाता है जिससे हैलोजन परमाणु आबंधित होता है?
NCERT पाठ हैलोऐल्केनों को ऐसे यौगिकों के रूप में परिभाषित करता है जिनमें 'हैलोजन परमाणु ऐल्किल समूह के sp$^3$ संकरित कार्बन परमाणु से जुड़े होते हैं'।
वाइनिलिक हैलाइड में हैलोजन परमाणु किस संकरण वाले कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है?
वाइनिलिक हैलाइडों को ऐसे यौगिकों के रूप में परिभाषित किया गया है 'जिनमें हैलोजन परमाणु कार्बन-कार्बन द्विआबंध (C = C) के sp$^2$-संकरित कार्बन परमाणु से आबंधित होता है'।
हैलोऐल्केनों (177 pm) की तुलना में हैलोऐरीनों (169 pm) में C-Cl आबंध लंबाई कम क्यों होती है?
NCERT पाठ स्पष्ट करता है, 'अधिक s-गुण वाला sp$^2$ संकरित कार्बन अधिक विद्युतऋणात्मक होता है और C—X आबंध के इलेक्ट्रॉन युग्म को हैलोऐल्केन के कम s-गुण वाले sp$^3$-संकरित कार्बन की तुलना में अधिक दृढ़ता से थामे रख सकता है। इस प्रकार हैलोऐल्केन में C—Cl आबंध लंबाई 177 pm है, जबकि हैलोऐरीन में 169 pm।'
हैलोऐरीनों के C-X आबंध में आंशिक द्विआबंध गुण का उनकी रासायनिक अभिक्रियाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है?
संदर्भ कहता है, 'अनुनाद के कारण C—Cl आबंध आंशिक द्विआबंध गुण प्राप्त कर लेता है। परिणामस्वरूप हैलोऐरीन में आबंध विदलन हैलोऐल्केन की तुलना में कठिन होता है और इसलिए वे नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया के प्रति कम अभिक्रियाशील होते हैं।'
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