DNA के अतिपरिवर्ती क्षेत्रों में छोटे न्यूक्लिओटाइड अनुक्रमों की
अनुक्रमिक पुनरावृत्तियों की परिवर्ती संख्या (VNTRs) होती है, जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए विशिष्ट होती है (एकयुग्मनजी जुड़वाँ को छोड़कर)। विविधताएँ
उत्परिवर्तनों, छोटे विलोपनों अथवा अंतर्वेशनों के कारण भी उत्पन्न होती हैं। अतः किसी विशेष
एंडोन्यूक्लिएज द्वारा काटे गए DNA की लंबाई भिन्न-भिन्न व्यक्तियों में भिन्न होती है। इस परिघटना को प्रतिबंधन
खंड लंबाई बहुरूपता कहते हैं। यह आनुवंशिक (अथवा DNA) अंगुलिछापी का आधार है तथा व्यक्तियों की
पहचान उनके वीर्य, रुधिर, ऊतकों अथवा किसी अन्य DNA प्रतिदर्श से करने तथा
पितृत्व विवादों के निपटारे में उपयोगी है। पॉलिमरेज श्रृंखला अभिक्रिया (PCR) भी आनुवंशिक अंगुलिछापी में उपयोगी है, क्योंकि यह
DNA प्रतिदर्श को अत्यंत अल्प मात्रा में उपलब्ध होने पर भी प्रवर्धित कर सकती है।