Classification of Animal Kingdom NEET प्रश्न हिंदी में — जंतु विज्ञान (Zoology) MCQ उत्तर सहित

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तिलचट्टे के शरीर के टर्गा, स्टर्ना तथा प्लूरा किसके द्वारा जुड़े होते हैं

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NCERT, पृष्ठ संख्या 111

जंतुओं में संरचनात्मक संगठन

7.4.1 आकारिकी

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निम्नलिखित में से कौन-सा सामान्य तिलचट्टे में होने वाली घटना को सही ढंग से बताता है?

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तिलचट्टे में मैंडिबल कठोर, मजबूत, बड़ी, गहरे रंग की त्रिकोणीय संरचनाओं का एक जोड़ा हैं, जो क्षैतिज गति करते हैं तथा अपने बीच भोजन को कुचलते हैं। पेषणी अथवा प्रोवेंट्रिकुलस में मोटी वर्तुल पेशियों की बाह्य परत तथा मोटी आंतरिक उपत्वचा होती है, जो छह अत्यधिक काइटिनी पट्टिकाएँ बनाती है, जिन्हें दंत कहते हैं। पेषणी पीसने वाले कक्ष की भाँति कार्य करती है तथा भोजन कणों को पीसने में सहायक होती है। 

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केंचुओं में कंकाल नहीं होता, परंतु बिल बनाते समय अग्र सिरा स्फीत हो जाता है तथा द्रवचालित कंकाल की भाँति कार्य करता है। ऐसा किसके कारण होता है 

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केंचुए की देहगुहा (प्रगुहा) क्षारीय, रंगहीन अथवा दूधिया प्रगुहीय द्रव से भरी होती है, जिसमें जल, लवण, कुछ प्रोटीन तथा चार प्रकार की प्रगुहीय कणिकाएँ — भक्षकाणु, म्यूकोसाइट, वर्तुल केंद्रकयुक्त कोशिकाएँ एवं क्लोरैगोजन कोशिकाएँ — होती हैं। बिल बनाते समय प्रगुहीय द्रव स्फीत हो जाता है तथा द्रवचालित कंकाल की भाँति कार्य करता है।

केंचुआ (Pheretima posthuma) नम मिट्टी में बने बिलों में रहता है। यह अपना बिल आंशिक रूप से अपने नुकीले अग्र सिरे से छेदकर तथा आंशिक रूप से मिट्टी को चूसकर एवं निगलकर बनाता है। शरीर में देहखंडीय खंडीभवन दिखाई देता है। प्रत्येक खंड के लगभग बीच में छोटे मुड़े हुए शूकों का एक वलय होता है, जिन्हें सीटी अथवा कीटी कहते हैं; ये काइटिन नामक शृंगी नाइट्रोजनी कार्बनिक पदार्थ से बने होते हैं। शूक तथा पेशीतंत्र संचलन में तथा शरीर को बिल में दृढ़ता से टिकाए रखने में सहायक होते हैं।

केंचुए का रुधिर तरल प्लाज्मा तथा रंगहीन कणिकाओं से बना होता है, जो शरीरक्रियात्मक दृष्टि से कशेरुकियों की श्वेताणुओं के तुल्य हैं।

 

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निम्नलिखित में से कौन-सा संबंधित जंतु के विषय में सही विवरण है?

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तिलचट्टे के श्वसन तंत्र में श्वासनलिकाएँ, श्वासनलिकाएँ (ट्रैकिओल) तथा श्वास रंध्र होते हैं। मुख्य श्वासनली स्तंभ शरीर की सतह पर खंडवार व्यवस्थित श्वास रंध्रों के 10 जोड़ों द्वारा बाहर खुलते हैं। श्वास रंध्रों के दो जोड़े वक्षीय होते हैं (एक अग्रवक्ष एवं मध्यवक्ष के बीच तथा दूसरा मध्यवक्ष एवं पश्चवक्ष के बीच)। श्वास रंध्रों के आठ जोड़े उदरीय होते हैं (प्रथम आठ उदरीय खंडों में से प्रत्येक में एक जोड़ा)।

केंचुए की आहारनाल पूर्ण होती है तथा कार्यात्मक रूप से मुखगुहा, ग्रसनी, ग्रसिका, पेषणी, आमाशय एवं आंत्र में विभाजित होती है।

मेंढक के शरीर के दो मुख्य भाग होते हैं, अर्थात् सिर तथा धड़। गर्दन तथा पूँछ का अभाव फुदकने एवं तैरने दोनों में सुविधा प्रदान करता है।

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तिलचट्टे के बाह्यकंकाल में स्क्लेराइट एक-दूसरे से किसके द्वारा जुड़े होते हैं :

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तिलचट्टे में बाह्यकंकाल में स्क्लेराइट कहलाने वाली कठोर पट्टिकाएँ होती हैं, जो एक-दूसरे से आर्थ्रोडायल झिल्ली कहलाने वाली पतली एवं लचीली संधि झिल्ली द्वारा जुड़ी रहती हैं।

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तिलचट्टे का त्रिकोणीय सिर कितने खंडों के संलयन से बनता है :

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तिलचट्टे का सिर आकार में त्रिकोणीय होता है। यह छह खंडों के संलयन से बनता है तथा लचीली गर्दन के कारण सभी दिशाओं में अत्यधिक गतिशीलता दर्शाता है।

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तिलचट्टे के किस मुखांग में पीसने तथा काटने वाला भाग होता है?

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तिलचट्टे की मैल्पीघी नलिकाएँ निम्नलिखित में से किन कोशिकाओं से आस्तरित होती हैं?

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तिलचट्टे में उत्सर्जन मैल्पीघी नलिकाओं द्वारा होता है। प्रत्येक नलिका ग्रंथिल तथा पक्ष्माभी कोशिकाओं से आस्तरित होती है। ये नाइट्रोजनी अपशिष्ट उत्पादों का अवशोषण करके उन्हें यूरिक अम्ल में बदल देती हैं, जो पश्चांत्र द्वारा बाहर उत्सर्जित होता है।

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उपयुक्त विकल्प चुनकर निम्नलिखित वाक्य पूरा कीजिए:

तिलचट्टे में पाचक रस अंधनलिकाओं के एक वलय द्वारा स्रावित होता है, जिनकी संख्या ______ होती है।

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अग्रांत्र तथा मध्यांत्र की संधि पर 6-8 अंधनलिकाओं का एक वलय उपस्थित होता है, जिन्हें यकृतीय अथवा जठर अंधनाल कहते हैं तथा जो पाचक रस स्रावित करती हैं।

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मध्यांत्र तथा पश्चांत्र की संधि पर उपस्थित पीले रंग के पतले तंतुमय वलय, जो उत्सर्जन में सहायक होते हैं, संख्या में कितने होते हैं?

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मध्यांत्र तथा पश्चांत्र की संधि पर 100-150 पीले रंग की पतली तंतुमय मैल्पीघी नलिकाओं का एक वलय उपस्थित होता है। ये हीमोलिंफ से उत्सर्जी उत्पादों को हटाने में सहायक होती हैं।

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Frequently Asked Questions

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