Excretory Products and Their Elimination NEET प्रश्न हिंदी में — जंतु विज्ञान (Zoology) MCQ उत्तर सहित

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हेनले लूप की अवरोही भुजा में नीचे जाते समय निस्यंद की परासरणता क्रमशः बढ़ती है और फिर आरोही भुजा में ऊपर जाते समय घटती है। इसका मुख्य कारण है:

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यद्यपि एक वाक्य में स्पष्ट नहीं कहा गया, पाठ इसका संकेत देता है: 'निस्यंद अवरोही भुजा में नीचे जाते समय सांद्रित होता है परंतु आरोही भुजा द्वारा तनु हो जाता है।' और यह प्रतिधारा द्वारा अंतरालीय ऊतक में बनाए रखे गए 'विद्युत-अपघट्यों' की भूमिका पर ज़ोर देता है। नेफ्रॉन कार्य का सामान्य ज्ञान (और संदर्भ से निहित) यह है कि अवरोही भुजा जल के लिए पारगम्य है, और आरोही भुजा जल के लिए अपारगम्य है परंतु विलेयों का सक्रिय परिवहन करती है।

संग्राहक नलिका किसकी थोड़ी मात्रा को पारित होने देकर उच्च मज्जा परासरणता बनाए रखने में योगदान देती है?

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पाठ में कहा गया है: 'यह खंड (संग्राहक नलिका) परासरणता बनाए रखने के लिए यूरिया की थोड़ी मात्रा को मज्जा अंतरालीय ऊतक में जाने देता है।'

प्रतिधारा क्रियाविधि के माध्यम से दूरस्थ संवलित नलिका (DCT) और संग्राहक नलिका निस्यंद को लगभग कितने गुना सांद्रित करती हैं?

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NCERT पाठ स्पष्ट रूप से कहता है: 'DCT और संग्राहक नलिका निस्यंद को लगभग चार गुना सांद्रित करती हैं, अर्थात 300 mOsmolL-1 से 1200 mOsmolL-1 तक, जो जल संरक्षण की एक उत्कृष्ट क्रियाविधि है।'

यदि वृक्क में प्रतिधारा क्रियाविधि अक्रिय हो जाए, तो मूत्र निर्माण के संबंध में सबसे तात्कालिक परिणाम क्या होगा?

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प्रतिधारा क्रियाविधि मज्जा परासरणी प्रवणता (300-1200 mOsmolL-1) स्थापित करने और बनाए रखने के लिए आवश्यक है। यह प्रवणता संग्राहक नलिकाओं से जल के पुनरवशोषण के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे सांद्रित मूत्र बनता है। इसके बिना मूत्र को सांद्रित करने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होगी, जिससे बड़ी मात्रा में तनु मूत्र का उत्सर्जन और अत्यधिक जल हानि होगी।

वासा रेक्टा हेनले लूप के साथ प्रतिधारा विनिमय करता है। वासा रेक्टा के लिए इस व्यवस्था का प्राथमिक कार्य क्या है?

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वासा रेक्टा, हेनले लूप के प्रतिधारा प्रवाह का अनुकरण करके, मज्जा अंतरालीय ऊतक से विलेयों (विद्युत-अपघट्य और यूरिया) के बह जाने को न्यूनतम करता है। यह 'प्रतिधारा विनिमय' गुण वासा रेक्टा के रक्त को इस प्रकार जल ग्रहण करने और विलेय छोड़ने देता है कि मज्जा की उच्च परासरणता सुरक्षित रहे, जो मूत्र को सांद्रित करने के लिए अनिवार्य है।

एक स्वस्थ मानव वृक्क 1200 mOsmolL-1 तक की परासरणता वाला मूत्र बना सकता है। यह उल्लेखनीय क्षमता मुख्यतः किसके कार्यों के कारण है?

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पाठ स्पष्ट रूप से कहता है: 'HL मुख्यतः वृक्क अंतरालीय ऊतक में परासरणी प्रवणता (300 mOsmolL-1 से 1200 mOsmolL-1) बनाए रखने में सहायक है।' और 'DCT और संग्राहक नलिका निस्यंद को लगभग चार गुना सांद्रित करती हैं, अर्थात 300 mOsmolL-1 से 1200 mOsmolL-1 तक, जो जल संरक्षण की एक उत्कृष्ट क्रियाविधि है।' यह सांद्रण क्षमता पूर्णतः प्रतिधारा क्रियाविधि पर निर्भर है।

प्रतिधारा क्रियाविधि के संदर्भ में हेनले लूप की अवरोही भुजा के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

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पाठ में कहा गया है: 'निस्यंद अवरोही भुजा में नीचे जाते समय सांद्रित होता है'। यह सांद्रण अवरोही भुजा से जल के निष्क्रिय विसरण के कारण होता है, जो जल के लिए इसकी पारगम्यता दर्शाता है। इसके विपरीत, आरोही भुजा को निस्यंद को तनु करने वाली बताया गया है, जो जल के बिना विलेयों के सक्रिय परिवहन का संकेत है, अतः अवरोही भुजा विद्युत-अपघट्यों के लिए काफी हद तक अपारगम्य है।

हेनले लूप की आरोही भुजा में ऊपर जाते समय निस्यंद के तनु होने का प्राथमिक कारण है:

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पाठ में उल्लेख है: 'निस्यंद अवरोही भुजा में नीचे जाते समय सांद्रित होता है परंतु आरोही भुजा द्वारा तनु हो जाता है।' तनुकरण इसलिए होता है क्योंकि आरोही भुजा जल के लिए अपारगम्य है, परंतु विद्युत-अपघट्यों को बाहर जाने देती है (पतले भाग में निष्क्रिय रूप से, मोटे भाग में सक्रिय रूप से), जिससे जल के बिना निस्यंद की विलेय सांद्रता घट जाती है।

स्तनधारी सांद्रित मूत्र बनाने की क्षमता मुख्यतः इन विशिष्ट संरचनाओं के कारण रखते हैं:

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NCERT पाठ स्पष्ट रूप से कहता है: 'स्तनधारियों में सांद्रित मूत्र बनाने की क्षमता होती है। हेनले लूप और वासा रेक्टा इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।'

प्रतिधारा क्रियाविधि में यूरिया मज्जा अंतरालीय ऊतक की परासरणता बनाए रखने में भूमिका निभाता है। नेफ्रॉन या संबद्ध संरचना के किस भाग में यूरिया को 'परासरणता बनाए रखने' के लिए मज्जा अंतरालीय ऊतक में जाने दिया जाता है?

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पाठ स्पष्ट रूप से कहता है: 'संग्राहक नलिका: यह खंड परासरणता बनाए रखने के लिए यूरिया की थोड़ी मात्रा को मज्जा अंतरालीय ऊतक में जाने देता है।'

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Frequently Asked Questions

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