प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) जीवाणु-जनित रोगों की सभी समस्याओं को हल नहीं कर सके, इसका मुख्य कारण है
(d) : जीवाणु-जनित रोगों के उपचार की एक बड़ी समस्या यह है कि अनेक जीवाणु प्रतिजैविकों के प्रति प्रतिरोध दिखाने लगे हैं। प्रतिजैविक-प्रतिरोधी जीवाणुओं का उद्भव मनुष्यों और आहार में प्रतिजैविकों के उपयोग की मात्रा से जुड़ा है। जीवाणु इतनी बड़ी संख्या में होते हैं कि समष्टि में उत्परिवर्ती व्यक्ति के प्रकट होने की प्रबल संभावना रहती है। ऐसा होते ही उस प्रतिजैविक का उपयोग प्रतिरोधी प्रकार को चयनात्मक लाभ देता है और वह बहुगुणित होकर प्रभावी प्रकार बन जाता है।
प्रतिजैविक लक्षित कोशिकाओं के भीतर एंज़ाइमों द्वारा भी नष्ट हो सकते हैं; इसका प्रसिद्ध उदाहरण पेनिसिलिनेज़ एंज़ाइम समूह है, जो पेनिसिलिन और सेफैलोस्पोरिन का जल-अपघटन कर उन्हें नष्ट कर देता है।