पेशी संकुचन आरंभ करने के लिए तंत्रिका-पेशी संधि पर क्या होता है, इसका वर्णन करने के लिए निम्नलिखित वाक्यांशों को उचित क्रम में रखिए:
I. सार्कोलेमा पर ग्राही स्थल।
II. तंत्रिका आवेग।
III. सार्कोप्लाज़्मिक जालिका से Ca+2 का मुक्त होना
IV. तंत्रिकासंचारी ऐसीटिलकोलीन मुक्त होता है
V. सार्कोमियर छोटा होता है
VI. सिनैप्टिक दरार
VII. T-नलिकाओं पर सार्कोलेमा में आवेगों का फैलना
II. तंत्रिका आवेग : पेशी संकुचन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) द्वारा प्रेरक न्यूरॉन के माध्यम से भेजे गए संकेत से आरंभ होता है।
IV. इस संधि तक पहुँचने वाला तंत्रिका संकेत एक तंत्रिकासंचारी (ऐसीटिलकोलीन) मुक्त करता है, जो सार्कोलेमा में क्रिया विभव उत्पन्न करता है।
VI. विद्युत संकेत सिनैप्टिक दरार तक पहुँचता है, जहाँ इसे पश्च-सिनैप्टिक कोशिका तक विसरित करने के लिए रासायनिक संकेत में बदला जाता है।
I. सार्कोलेमा पर ग्राही स्थल संकेत ग्रहण करते हैं।
VII. यह पेशी तंतु में फैलता है।
III. इससे सार्कोप्लाज़्म में कैल्शियम आयन मुक्त होते हैं।
V. सार्कोमियर छोटा होता है।
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