जब दो असम्बंधित व्यष्टियों अथवा वंशक्रमों का संकरण कराया जाता है, तो F1 संकर का निष्पादन प्रायः अपने दोनों जनकों से श्रेष्ठ होता है। यह परिघटना कहलाती है
(d) संकरों की अपने किसी भी जनक (प्रभावी अथवा अप्रभावी) पर श्रेष्ठता संकर ओज कहलाती है (जी. शल)। हेटरोसिस संकर ओज का ही पर्याय है।