निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(c) ग्लाइसीन सबसे सरल ऐमीनो अम्ल है जिसमें क्रियात्मक समूह 'R' के स्थान पर हाइड्रोजन परमाणु (H) होता है।
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निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(c) ग्लाइसीन सबसे सरल ऐमीनो अम्ल है जिसमें क्रियात्मक समूह 'R' के स्थान पर हाइड्रोजन परमाणु (H) होता है।
एक प्रारूपिक वसा अणु बना होता है
(a) एक प्रारूपिक वसा अणु ट्राइग्लिसराइड है, जो एक ग्लिसरॉल तथा तीन वसा अम्ल अणुओं के एस्टरीकरण से बनता है। वसा अणु के प्रकार के अनुसार तीनों वसा अम्ल एक ही प्रकार के या भिन्न हो सकते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(d) प्रतिस्पर्धी संदमक की उपस्थिति में Vmax अपरिवर्तित रहता है जबकि Km बढ़ जाता है।
फॉस्फोग्लिसराइड सदैव बना होता है
(c) वसा दो प्रकार के छोटे अणुओं, अर्थात ग्लिसरॉल तथा वसा अम्लों से बनती है। वसा बनने में तीन वसा अम्ल अणु प्रत्येक एस्टर बंधन द्वारा ग्लिसरॉल से जुड़ते हैं। वसा अम्ल में एक लंबा कार्बन कंकाल होता है, जो प्रायः 16 या 18 कार्बन परमाणु लंबा होता है। यदि शृंखला बनाने वाले कार्बन परमाणुओं के बीच कोई द्विबंध न हो, तो कार्बन कंकाल से यथासंभव अधिकतम हाइड्रोजन परमाणु बंधे होते हैं। इसे संतृप्त वसा अम्ल कहते हैं। असंतृप्त वसा अम्ल में एक या अधिक द्विबंध होते हैं। फॉस्फोग्लिसराइड दो वसा अम्लों, फॉस्फोरिक अम्ल तथा एक त्रिक्रियात्मक ऐल्कोहॉल ग्लिसरॉल के एस्टर हैं। वसा अम्ल ग्लिसरॉल से उसके 1 तथा 2 स्थानों पर एस्टर बंधों द्वारा जुड़े होते हैं।
जंतु जगत में सर्वाधिक प्रचुर प्रोटीन कौन-सा है?
(c) कोलेजन जंतु जगत में सर्वाधिक प्रचुर प्रोटीन (संरचनात्मक प्रोटीन) है, जबकि राइबुलोस कार्बोक्सिलेज ऑक्सीजिनेज (RUBISCO) संपूर्ण पादप जगत में सर्वाधिक प्रचुर प्रोटीन है।
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म गलत मिलाया गया है?
युग्म 'ऐल्कोहॉल - नाइट्रोजिनेज' गलत मिलाया गया है। नाइट्रोजिनेज नाइट्रोजन स्थिरीकरण में शामिल एंजाइम है, ऐल्कोहॉल उपापचय में नहीं। ऐल्कोहॉल का उपापचय ऐल्कोहॉल डिहाइड्रोजिनेज तथा ऐल्डिहाइड डिहाइड्रोजिनेज जैसे एंजाइमों द्वारा होता है।
सक्सिनिक डिहाइड्रोजिनेज का प्रतिस्पर्धी संदमक है
(a) सक्सिनिक डिहाइड्रोजिनेज सक्सिनेट को फ्यूमरेट में ऑक्सीकृत करता है। यूकैरियोटों में सक्सिनेट डिहाइड्रोजिनेज आंतरिक माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली से, प्रोकैरियोटों में प्लाज़्मा झिल्ली से दृढ़ता से बंधा होता है। इलेक्ट्रॉन सक्सिनेट से FAD तथा आयरन-सल्फर केंद्रों से होकर माइटोकॉन्ड्रियल आंतरिक झिल्ली में इलेक्ट्रॉन वाहकों की शृंखला में प्रवेश करते हैं। सक्सिनेट का सदृश मैलोनेट, सक्सिनेट डिहाइड्रोजिनेज का प्रबल प्रतिस्पर्धी संदमक है और इसलिए सिट्रिक अम्ल चक्र की सक्रियता को अवरुद्ध करता है।
क्रेब्स चक्र में फ्यूमरेट का मैलेट में उत्क्रमणीय जलयोजन फ्यूमरेज एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होता है।
क्रेब्स चक्र की अंतिम अभिक्रिया में NAD-युग्मित L-मैलेट डिहाइड्रोजिनेज L-मैलेट के ऑक्सैलोऐसीटेट में ऑक्सीकरण को उत्प्रेरित करता है।
क्रेब्स चक्र में आइसोसिट्रेट डिहाइड्रोजिनेज आइसोसिट्रेट के ऑक्सीकारी विकार्बोक्सिलीकरण को उत्प्रेरित करके -कीटोग्लूटारेट बनाता है, जो अगले चरण में ऑक्सीकारी विकार्बोक्सिलीकरण द्वारा सक्सिनिल Co-A में परिवर्तित होता है।
एंजाइम से बंधा तथा उसकी सक्रियता के लिए आवश्यक कार्बनिक पदार्थ कहलाता है:
(a) सह-एंजाइम एक कार्बनिक अप्रोटीनी अणु है जो जैव-रासायनिक अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने में एंजाइम अणु से संबद्ध होता है। यह प्रायः कुछ रासायनिक समूहों को देकर या ग्रहण करके क्रियाधार-एंजाइम अन्योन्यक्रिया में भाग लेता है। होलोएंजाइम एंजाइम अणु तथा उसके सह-कारक से बना सम्मिश्र है। इस अवस्था में एंजाइम उत्प्रेरक रूप से सक्रिय होता है। एपोएंजाइम एक निष्क्रिय एंजाइम है जिसे कार्य करने के लिए एक विशिष्ट सह-कारक अणु से संबद्ध होना पड़ता है। आइसोएंजाइम या आइसोजाइम किसी एंजाइम के उन अनेक रूपों में से एक है जो एक ही अभिक्रिया को उत्प्रेरित करते हैं, परंतु क्रियाधार बंधुता तथा एंजाइम-क्रियाधार अभिक्रिया की अधिकतम दर जैसे गुणों में एक-दूसरे से भिन्न होते हैं।
एंजाइम ऐमाइलेज किस वर्ग से संबंधित है
(a) ऐमाइलेज एंजाइमों का एक वर्ग है जो स्टार्च को तोड़ते या जल-अपघटित करते हैं। जंतुओं में पाए जाने वाले -ऐमाइलेज कहलाते हैं जबकि पादपों में पाए जाने वाले -ऐमाइलेज कहलाते हैं। -ऐमाइलेज स्टार्च को माल्टोस तथा अन्य उत्पादों में जल-अपघटित करता है और कशेरुकियों की लार तथा आँत में पाया जाता है। -ऐमाइलेज स्टार्च को माल्टोस में जल-अपघटित करता है, परंतु भिन्न प्रक्रिया द्वारा। अग्न्याशयी ऐमाइलेज ऐमाइलॉप्सिन है। लार ऐमाइलेज टायलिन है।
निम्नलिखित में से कौन एक आवश्यक ऐमीनो अम्ल है?
(c) आवश्यक ऐमीनो अम्ल वे ऐमीनो अम्ल हैं जिन्हें उच्च कशेरुकियों के आहार में शामिल करना आवश्यक है, क्योंकि ये जीव उन्हें संश्लेषित नहीं कर सकते। मानव आहार में आवश्यक ऐमीनो अम्ल आइसोल्यूसीन, ल्यूसीन, लाइसीन, मेथियोनीन, फेनिलऐलानीन, थ्रियोनीन, ट्रिप्टोफैन तथा वैलीन हैं।
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