वह स्थलीय सरीसृप जो मछली जैसे सरीसृपों में विकसित होने के लिए वापस जल में चला गया..
NCERT पृष्ठ संख्या 140, पैरा-1
7.8 विकास का संक्षिप्त विवरण
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वह स्थलीय सरीसृप जो मछली जैसे सरीसृपों में विकसित होने के लिए वापस जल में चला गया..
NCERT पृष्ठ संख्या 140, पैरा-1
7.8 विकास का संक्षिप्त विवरण
निम्नलिखित में से कौन-सा लक्षण रामापिथेकस का नहीं है?
NCERT पृष्ठ संख्या 140
7.9 मानव की उत्पत्ति और विकास, पैरा-1
मानव-सदृश प्राइमेट लगभग 3-4 मिलियन वर्ष पूर्व पूर्वी अफ्रीका में चलते थे। इस मान्यता को किसने समर्थन दिया
NCERT पृष्ठ संख्या 140
7.9 मानव की उत्पत्ति और विकास, पैरा-1
निम्नलिखित में से क्या ऑस्ट्रेलोपिथेकस के लिए सत्य नहीं है?
NCERT पृष्ठ संख्या 140
7.9 मानव की उत्पत्ति और विकास, पैरा-1
1891 में जावा में खोजा गया लगभग 1.5 मिलियन वर्ष पुराना जीवाश्म, जिसकी मस्तिष्क क्षमता 900cc थी और जो संभवतः मांस खाता था। ये लक्षण किससे संबंधित हैं
NCERT पृष्ठ संख्या 140
7.9 मानव की उत्पत्ति और विकास, पैरा-1
1400cc मस्तिष्क आकार के साथ, 100000 से 40000 वर्ष पूर्व के बीच निकट पूर्व और मध्य एशिया में रहते थे, शवों को दफनाते थे, अपने शरीर की रक्षा के लिए गुफाओं या खालों का उपयोग करते थे
NCERT पृष्ठ संख्या 141, पैरा-1
7.9 मानव की उत्पत्ति और विकास
होमो सेपियंस के विषय में निम्नलिखित में से क्या सत्य नहीं है?
NCERT पृष्ठ संख्या 141, पैरा-1
चित्र 7.11 एक तुलना...
7.9 मानव की उत्पत्ति और विकास
हम किस मानव कृमि संक्रमण की बात कर रहे हैं?
I. मानव जाति पर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव में यह केवल मलेरिया के बाद दूसरे स्थान पर है।
II. कृमि का लार्वा त्वचा को भेदकर मानव शरीर में प्रवेश करता है
III. कृमि को मध्यवर्ती परपोषी के रूप में घोंघों की आवश्यकता होती है।
IV. विकासशील देशों में यह बच्चों में रक्ताल्पता का एक सामान्य कारण है।
इसे शिस्टोसोमियासिस भी कहा जाता है [मानव रक्त पर्णकृमि द्वारा संक्रमण]
MALT मानव शरीर के लसीकाभ ऊतक का लगभग..........प्रतिशत बनाता है।
(a) MALT श्लेष्मा-संबद्ध लसीकाभ ऊतक है जो श्वसन, पाचन और मूत्रजनन पथ जैसे प्रमुख पथों के अस्तर के भीतर स्थित होता है। यह मानव शरीर के कुल लसीकाभ ऊतक का लगभग 50% है।
ऊतकों/अंगों का प्रत्यारोपण प्रायः रोगी के शरीर द्वारा अस्वीकृति के कारण विफल हो जाता है। ऐसी अस्वीकृतियों के लिए किस प्रकार की प्रतिरक्षा अनुक्रिया उत्तरदायी है?
(b) ऊतक/अंगों का प्रत्यारोपण विफल हो सकता है, जब वह ऊतक ग्राही की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा अस्वीकृत कर दिया जाता है जिससे उसका विनाश हो जाता है। ऊतक अस्वीकृति कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा अनुक्रिया का कार्य है जिसमें T-कोशिकाएँ शामिल होती हैं। इन कोशिकाओं में स्व और पर में भेद करने की क्षमता होती है। पर-ऊतक की पहचान के बाद मारक T-कोशिकाएँ लक्ष्य ऊतक में एपोप्टोसिस प्रेरित करती हैं।
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