जंतु विज्ञान (Zoology) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

जंतु विज्ञान (Zoology) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

सभी Physics Chemistry Botany Zoology
भाषा English हिंदी
Register free for difficulty & keyword filters
● ● ● ● ●

इनमें से किस निदान विधि में न्यूक्लिक अम्लों का प्रवर्धन शामिल है?

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

संदर्भ विशेष रूप से उल्लेख करता है: '...किसी जीवाणु या विषाणु की बहुत कम सांद्रता का (उस समय जब रोग के लक्षण अभी दिखाई नहीं दे रहे हों) PCR द्वारा उनके न्यूक्लिक अम्ल के प्रवर्धन से पता लगाया जा सकता है।'

● ● ● ● ●

संदर्भ द्वारा सुझाए अनुसार, आणविक निदान में पुनर्योगज DNA प्रौद्योगिकी की मुख्य भूमिका क्या है?

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

संदर्भ पुनर्योगज DNA प्रौद्योगिकी को PCR और ELISA के साथ 'शीघ्र निदान का उद्देश्य पूरा करने वाली कुछ तकनीकों' के रूप में समूहित करता है। जबकि PCR में प्रवर्धन और ELISA में प्रतिजन-प्रतिरक्षी अन्योन्यक्रियाएँ शामिल हैं, पुनर्योगज DNA प्रौद्योगिकी व्यापक आनुवंशिक हेरफेर को समाहित करती है जो सटीक निदान को सुगम बना सकती है।

● ● ● ● ●

यदि किसी स्वस्थ व्यक्ति के DNA की जाँच किसी ज्ञात रोगजनक जीन के संगत रेडियोसक्रिय एकल-रज्जुकी DNA अनुक्रम से की जाए और ऑटोरेडियोग्राफी द्वारा कोई संकेत न मिले, तो यह क्या दर्शाता है?

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

प्रोब द्वारा उत्परिवर्तित जीनों का पता लगाने का सिद्धांत यह है कि 'प्रोब की उत्परिवर्तित जीन के साथ पूरकता नहीं होगी।' इसके विपरीत, यदि किसी रोगजनक जीन की प्रोब प्रयुक्त की जाए और कोई संकरण न हो (अतः कोई संकेत न मिले), तो इसका तात्पर्य है कि व्यक्ति के DNA में पूरक अनुक्रम (रोगजनक जीन) अनुपस्थित है।

● ● ● ● ●

रोगजनक पहचान के लिए ELISA के संदर्भ में प्रायः किस प्रकार के अणु 'प्रतिजन' के रूप में पहचाने जाते हैं?

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

NCERT पाठ कहता है: 'रोगजनक द्वारा संक्रमण का पता प्रतिजनों (प्रोटीन, ग्लाइकोप्रोटीन आदि) की उपस्थिति से या रोगजनक के विरुद्ध संश्लेषित प्रतिरक्षियों का पता लगाकर लगाया जा सकता है।' यह स्पष्ट संकेत करता है कि प्रतिजन प्रायः प्रोटीन या ग्लाइकोप्रोटीन होते हैं।

● ● ● ● ●

रासायनिक सिनैप्स के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

रासायनिक सिनैप्स पर पूर्व- और पश्च-सिनैप्टिक न्यूरॉनों की झिल्लियाँ सिनैप्टिक दरार नामक द्रव-भरे स्थान द्वारा पृथक रहती हैं। इन सिनैप्सों पर आवेग संचरण में तंत्रिकासंचारी नामक रसायन भाग लेते हैं। विद्युत सिनैप्स के पार आवेग संचरण रासायनिक सिनैप्स की तुलना में सदैव तेज़ होता है। अतः विकल्प o3 गलत है।

● ● ● ● ●

एक एक्सॉन के अंतिम सिरे पर बल्ब जैसी संरचनाएँ होती हैं जिन्हें सिनैप्टिक घुंडी कहते हैं, जिनमें सिनैप्टिक पुटिकाएँ होती हैं। इन पुटिकाओं में मुख्यतः क्या होता है?

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

एक्सॉन एक लंबा तंतु है जिसका दूरस्थ सिरा शाखित होता है। प्रत्येक शाखा सिनैप्टिक घुंडी नामक बल्ब जैसी संरचना में समाप्त होती है, जिसमें तंत्रिकासंचारी नामक रसायनों से भरी सिनैप्टिक पुटिकाएँ होती हैं। ये तंत्रिकासंचारी सिनैप्स के पार आवेग संचरण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

● ● ● ● ●

रासायनिक सिनैप्स पर सिनैप्टिक संचरण के दौरान कौन-सी विशिष्ट घटना सिनैप्टिक पुटिकाओं को पूर्व-सिनैप्टिक झिल्ली की ओर गति करने के लिए प्रेरित करती है?

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

जब कोई आवेग (क्रिया विभव) एक्सॉन के अंतिम सिरे पर पहुँचता है, तो यह सिनैप्टिक पुटिकाओं को झिल्ली की ओर गति करने के लिए उद्दीप्त करता है, जहाँ वे प्लाज्मा झिल्ली से संलयित होकर तंत्रिकासंचारी को सिनैप्टिक दरार में मुक्त कर देती हैं।

● ● ● ● ●

किस प्रकार का सिनैप्स झिल्लियों की अत्यधिक निकटता के कारण एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन में विद्युत धारा के सीधे प्रवाह की अनुमति देता है?

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

विद्युत सिनैप्स पर पूर्व- और पश्च-सिनैप्टिक न्यूरॉनों की झिल्लियाँ एक-दूसरे के बहुत निकट होती हैं। इन सिनैप्सों के पार विद्युत धारा एक न्यूरॉन से सीधे दूसरे न्यूरॉन में प्रवाहित हो सकती है।

● ● ● ● ●

विद्युत सिनैप्स के पार आवेग संचरण की विशेषता निम्नलिखित में से कौन-सी है?

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

विद्युत सिनैप्स के पार आवेग का संचरण एकल एक्सॉन के साथ आवेग चालन के बहुत समान होता है। विद्युत सिनैप्स की विशेषता धारा का सीधा प्रवाह है और इनमें तंत्रिकासंचारी या कोई उल्लेखनीय सिनैप्टिक दरार शामिल नहीं होती। विद्युत सिनैप्स के पार आवेग संचरण रासायनिक सिनैप्स की तुलना में सदैव तेज़ होता है।

● ● ● ● ●

रासायनिक सिनैप्स में तंत्रिकासंचारी की प्राथमिक भूमिका क्या है?

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

इन सिनैप्सों पर आवेग संचरण में तंत्रिकासंचारी नामक रसायन भाग लेते हैं। ये पूर्व-सिनैप्टिक न्यूरॉन से मुक्त होते हैं, सिनैप्टिक दरार के पार विसरित होते हैं और पश्च-सिनैप्टिक न्यूरॉन पर स्थित ग्राहियों से जुड़ते हैं, जिससे आवेग आगे बढ़ता है।

Ready to ace NEET?

Free access · No credit card required

Frequently Asked Questions

हाँ। इस पेज के हर Zoology प्रश्न को बिना लॉगिन किए मुफ़्त हल किया जा सकता है, और सही उत्तर व विस्तृत व्याख्या तुरंत देखी जा सकती है।

नहीं। प्रश्न हल करने और उत्तर देखने के लिए किसी खाते की आवश्यकता नहीं है। मुफ़्त खाता बुकमार्क, निजी नोट्स और प्रगति ट्रैकिंग जोड़ देता है।

इस प्रश्न बैंक में NEET के पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) और अभ्यास प्रश्न दोनों शामिल हैं — जहाँ लागू हो, हर प्रश्न पर उसका परीक्षा वर्ष अंकित है।