Biological Classification NEET प्रश्न हिंदी में — वनस्पति विज्ञान (Botany) MCQ उत्तर सहित

Biological Classification (Botany) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

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निम्नलिखित में से कौन अत्यधिक लवणीय परिस्थितियों में पाए जाते हैं?

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आर्किबैक्टीरिया जीवाणुओं का सर्वाधिक आदिम रूप हैं। ये विविध आवासों में रहते हैं, जैसे अत्यधिक उच्च ताप, लवणीय परिस्थितियाँ, परिवर्ती pH आदि। लवणीय जीवाणुओं को हैलोफाइल कहते हैं (जैसे Halobacterium, Halococcus)।

संकल्पना संवर्धक: आर्किबैक्टीरिया की कठोर परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता उनकी झिल्ली में शाखित लिपिड श्रृंखला की उपस्थिति के कारण है, जो उनकी झिल्ली की तरलता को कम कर देती है।

वाइरॉइड विषाणुओं से किस कारण भिन्न होते हैं

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वाइरॉइड ऐसे संक्रामक कारक हैं, जो केवल एक छोटे, एकल-रज्जुकी, वर्तुल RNA अणु से बने होते हैं और जिनमें प्रोटीन आवरण नहीं होता। ये ज्ञात सबसे छोटे संक्रामक रोगजनक हैं, विषाणुओं से भी छोटे, तथा पादप रोग उत्पन्न कर सकते हैं।

रोमंथी पशुओं के गोबर से बायोगैस के उत्पादन हेतु उत्तरदायी आदिम प्रोकैरियोटों में सम्मिलित हैं

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मेथैनोजन अनिवार्य अवायवीय, प्राचीन तथा आदिम जीवाणुओं का समूह हैं। ये मेथैनोजेनेसिस में भाग लेते हैं तथा मवेशियों के रोमंथ में मेथेन गैस उत्पन्न करते हैं।

अधिकांश कवकों की कोशिका भित्ति का एक प्रमुख घटक है

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काइटिन अधिकांश कवकों की कोशिका भित्ति का प्रमुख घटक है। यह N-ऐसीटिलग्लूकोसऐमीन, जो ग्लूकोस का व्युत्पन्न है, का दीर्घ-श्रृंखला बहुलक है। काइटिन कवक कोशिका भित्ति को संरचनात्मक दृढ़ता तथा कठोरता प्रदान करता है।

वाइरॉइड के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?

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वाइरॉइड संक्रामक, प्रोटीन-कूटलेखन न करने वाले, छोटे वर्तुल RNA वाले अत्यधिक संरचित कण हैं, जिनमें स्वतंत्र रूप से प्रतिकृति बनाने की क्षमता होती है। इनमें निम्न अणुभार वाला RNA होता है तथा ये उच्च पादपों में रोग उत्पन्न करते हैं।

 

दूध से दही बनाने तथा प्रतिजैविकों के उत्पादन में मानव के लिए उपयोगी सर्वाधिक प्रचुर प्रोकैरियोट किस श्रेणी में आते हैं

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परपोषी जीवाणु सर्वाधिक प्रचुर प्रोकैरियोट हैं, जो दूध से दही बनाने (जैसे Lactobacillus) तथा प्रतिजैविकों के उत्पादन (जैसे Streptomyces) में मानव के लिए उपयोगी हैं।

सायनोबैक्टीरिया को किस नाम से भी जाना जाता है

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सायनोबैक्टीरिया, जिन्हें नील-हरित शैवाल भी कहते हैं, प्रकाश-संश्लेषी जीवाणुओं का एक समूह हैं, जो ऑक्सीजनी प्रकाश-संश्लेषण करने में सक्षम हैं। ये प्रोकैरियोटिक जीव हैं तथा प्रायः जलीय पर्यावरण में पाए जाते हैं।

कौन-सा एकल जीव अथवा जीवों का युग्म अपने नामित वर्गिकी समूह में सही ढंग से रखा गया है?

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यीस्ट अथवा Saccharomyces cerevisiae वर्ग-ऐस्कोमाइसिटीज का कवक है। Saccharomyces जातियाँ बेकिंग तथा मद्य-निर्माण उद्योगों में व्यापक रूप से प्रयुक्त होती हैं। Paramecium तथा Plasmodium जगत-प्रोटिस्टा से संबंधित हैं, जबकि Penicillium जगत-कवक से। लाइकेन एक संयुक्त जीव है, जो शैवाल तथा कवक के सहजीवी सहयोग से बनता है।

Nostoc तथा Anabaena सायनोबैक्टीरिया अथवा नील-हरित शैवाल के उदाहरण हैं।

मेथैनोजन कहलाने वाले जीव सर्वाधिक प्रचुरता से कहाँ पाए जाते हैं

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मेथैनोजन गाय तथा भैंस जैसे अनेक रोमंथी पशुओं की आँत में उपस्थित होते हैं और ये इन पशुओं के गोबर से मेथेन (बायोगैस) के उत्पादन हेतु उत्तरदायी हैं। अतः ये पशुशाला में सर्वाधिक प्रचुरता से पाए जाते हैं।

 

कुछ अतितापरागी जीव, जो अत्यधिक अम्लीय (pH2) आवासों में वृद्धि करते हैं, किन दो समूहों से संबंधित हैं

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तापरागी जीव अत्यधिक गर्म स्थानों में रहते हैं, प्रायः 60º से 80ºC तक। अनेक तापरागी (कुछ यूबैक्टीरिया तथा आर्किबैक्टीरिया) स्वपोषी होते हैं और उनका उपापचय सल्फर पर आधारित होता है। कुछ तापरागी आर्किबैक्टीरिया गहरे समुद्री तापीय विवरों के आसपास खाद्य जालों का आधार बनाते हैं, जहाँ उन्हें अत्यधिक ताप तथा दाब सहना पड़ता है। आर्किबैक्टीरिया अत्यधिक अम्लीय (pH = 0.7) तथा अत्यधिक क्षारीय (pH = 11) पर्यावरण में वृद्धि कर सकते हैं।

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Frequently Asked Questions

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