ऐसे क्षेत्र में, जहाँ जीवाणुजनित अंगमारी रोग सामान्य है, चने की सफल खेती हेतु उठाए जा सकने वाले निम्नलिखित चार उपायों (A-D) पर विचार कीजिए
(A) बोर्डो मिश्रण का छिड़काव
(B) रोगजनक के कीट वाहक का नियंत्रण
(C) केवल रोग-मुक्त बीजों का उपयोग
(D) रोग-प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग
उपरोक्त में से कौन-से दो उपाय रोग को नियंत्रित कर सकते हैं?
चने (Cicer arietinum) की जीवाणुजनित अंगमारी जीवाणु Xanthomonas campestris द्वारा होती है। प्रभावित ऊतक ढह जाते हैं तथा जीवाणुओं द्वारा पचा लिए जाते हैं। जीवाणु संक्रमण का तीव्र प्रसार संवहन रज्जु के माध्यम से होता है। संक्रमित पौधे के तने तथा पत्तियाँ झुलसी अथवा जली हुई दिखाई देती हैं। नियंत्रण उपायों में रोगग्रस्त पौधों को हटाना, 3-वर्षीय फसल चक्र, रोग-मुक्त बीज, कॉपर कवकनाशियों एवं प्रतिजैविकों का छिड़काव तथा रोग-प्रतिरोधी किस्मों की बुवाई सम्मिलित हैं।
बोर्डो मिश्रण सर्वाधिक सामान्य कवकनाशी है। इसकी खोज सर्वप्रथम मिलार्डे ने 1882 में फ्रांस के बोर्डो विश्वविद्यालय में अंगूर के मृदुरोमिल आसिता के नियंत्रण हेतु की थी। इसे कॉपर सल्फेट, चूना तथा जल को 4 : 4 : 50 के अनुपात में मिलाकर बनाया जाता है