Cell cycle and Cell Divisions NEET प्रश्न हिंदी में — वनस्पति विज्ञान (Botany) MCQ उत्तर सहित

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सूत्रयुग्मित समजात गुणसूत्रों के एक युग्म द्वारा बना संकुल कहलाता है 

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(C) समजात गुणसूत्र युग्म बनाते हैं। इस प्रक्रिया को सूत्रयुग्मन कहते हैं। प्रत्येक युग्म द्विसंयोजक कहलाता है; गुणसूत्र तर्कु की भूमध्यरेखा के चारों ओर पंक्तिबद्ध हो जाते हैं तथा अपने गुणसूत्रबिंदुओं द्वारा तर्कु तंतुओं से जुड़े रहते हैं, जो सूक्ष्मनलिकाएँ होती हैं। तर्कु बनाने वाली सूक्ष्मनलिकाएँ दो प्रकार की हो सकती हैं, अर्थात काइनेटोकोर सूक्ष्मनलिका तथा अकाइनेटोकोर सूक्ष्मनलिका।

अक्षसूत्र पक्ष्माभ या कशाभिका का केंद्रीय क्रोड है जिसमें तंतुओं का एक केंद्रीय युग्म होता है जो नौ अन्य युग्मों से घिरा रहता है। भूमध्यरेखीय पट्टिका वह तल है जो समसूत्री या अर्धसूत्री विभाजन की मध्यावस्था के दौरान विभाजित होती कोशिका के ध्रुवों के ठीक बीच स्थित होता है। यह गुणसूत्रों के तर्कु के केंद्र की ओर गमन से बनता है।

युग्मक निर्माण के दौरान पुनर्संयोजनेज़ एंजाइम भाग लेता है

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अर्धसूत्री-I की पूर्वावस्था-I की पैकीटीन अवस्था पुनर्संयोजन गुटिकाओं के प्रकट होने से अभिलक्षित होती है, ये वे स्थल हैं जहाँ समजात गुणसूत्रों के असहोदर अर्धगुणसूत्रों के बीच जीन विनिमय होता है। जीन विनिमय दो समजात गुणसूत्रों के बीच आनुवंशिक पदार्थ का विनिमय है। यह भी एक एंजाइम-मध्यित प्रक्रिया है तथा इसमें सम्मिलित एंजाइम पुनर्संयोजनेज़ कहलाता है। 

समसूत्री विभाजन के संबंध में सही विकल्प चुनिए।

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समसूत्री विभाजन की मध्यावस्था में तर्कु तंतु गुणसूत्रों के काइनेटोकोर से जुड़ते हैं। गुणसूत्र तर्कु की भूमध्यरेखा पर लाए जाते हैं तथा दोनों ध्रुवों तक फैले तर्कु तंतुओं के माध्यम से मध्यावस्था पट्टिका के अनुदिश पंक्तिबद्ध हो जाते हैं।

तारक रश्मियाँ उत्पन्न होती हैं 

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(a) तारक रश्मियाँ तारककेंद्र से उत्पन्न होती हैं। पूर्वावस्था में गुणसूत्र कुंडलित होने लगते हैं, मोटे हो जाते हैं तथा धागे जैसे दिखाई देते हैं। साथ ही कोशिकाकंकाल पूरी कोशिका में फैले तंतुओं के जाल जैसा हो जाता है। तंतुओं के इस जाल को तर्कु कहते हैं तथा प्रत्येक तंतु को तारक रश्मि कहते हैं। (अपनी तारक रश्मियों सहित प्रत्येक तारककेंद्र को तारक कहा जाता है।) तारककेंद्र तर्कु के तंतुओं के अनुदिश एक-दूसरे से दूर हटते जाते हैं जब तक वे कोशिका के विपरीत सिरों पर नहीं पहुँच जाते — कोशिका के विपरीत सिरों पर तारककेंद्रों की यही स्थिति तर्कु के छोर बन जाती है। अंत में केंद्रक झिल्ली टूटने लगती है।

 

अनेक कोशिकाएँ समुचित रूप से कार्य करती हैं तथा समसूत्री विभाजन द्वारा विभाजित होती हैं यद्यपि उनमें नहीं होते 

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(d) लवकों की उपस्थिति पादप कोशिकाओं का लक्षण है किंतु जंतु कोशिकाएँ इनसे रहित होती हैं। फिर भी वे पादप कोशिकाओं के समान समुचित रूप से कार्य करती हैं तथा समसूत्री विभाजन द्वारा विभाजित होती हैं।

निम्नलिखित में से कौन अर्धसूत्री विभाजन का लक्षण नहीं है?

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(a) : गुणसूत्र प्रतिकृतिकरण एक ही बार होता है किंतु अर्धसूत्री विभाजन में दो M-प्रावस्थाएँ होती हैं, प्रत्येक का अपना केंद्रक विभाजन तथा कोशिकाद्रव्य विभाजन होता है। परिणामस्वरूप गुणसूत्र संख्या आधी हो जाती है। M-प्रावस्था II (अर्धसूत्री II) के बीच का संक्रमण काल छोटा तथा DNA प्रतिकृतिकरण रहित होता है। इसे अंतरगतिक अवस्था (इंटरकाइनेसिस) कहते हैं।

सूक्ष्मनलिका विध्रुवण करने वाली औषधि जैसे कोल्चिसिन से अपेक्षा की जाती है कि वह 

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(a) : कोल्चिसिन क्रोकस Colchicum autumnale से प्राप्त एक ऐल्केलॉइड है। यह समसूत्री विभाजन के दौरान कोशिकाओं में तर्कु निर्माण को संदमित करता है जिससे पश्चावस्था में गुणसूत्र पृथक नहीं हो पाते, और इस प्रकार गुणसूत्रों के अनेक समुच्चय प्रेरित होते हैं। यह कोशिकाद्रव्य विभाजन को प्रभावित नहीं करता।

द्विगुणित कोशिका में कोशिका चक्र की किस अवस्था में DNA की मात्रा दोगुनी होती है?

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(d): S-प्रावस्था को संश्लेषी प्रावस्था कहते हैं। इस अवस्था में विद्यमान DNA के टेम्पलेट पर DNA का प्रतिकृतिकरण होता है और इस प्रकार प्रति कोशिका DNA की मात्रा दोगुनी हो जाती है। यदि DNA की प्रारंभिक मात्रा 2C मानी जाए, तो यह बढ़कर 4C हो जाती है।

कोशिका चक्र की सबसे लंबी प्रावस्था कौन-सी है?

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(b): कोशिका चक्र 2 प्रावस्थाओं में विभाजित है। (i) अंतरावस्था (कोशिका विभाजन की तैयारी का काल), (ii) M प्रावस्था (कोशिका विभाजन का वास्तविक काल)। अंतरावस्था की कोशिका उपापचयी रूप से काफी सक्रिय होती है। अंतरावस्था लंबी अविभाजी प्रावस्था है जो आगे G1, S तथा G2 में विभाजित होती है। यह संपूर्ण कोशिका विभाजन काल का 75 से 90 % भाग घेरती है।

सही सुमेलित युग्म पहचानिए।

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अर्धसूत्री विभाजन की पश्चावस्था ll में गुणसूत्रबिंदु विभाजित होते हैं तथा तर्कु तंतु अर्धगुणसूत्रों को विपरीत ध्रुवों की ओर खींचते हैं। पश्चावस्था ll के अंत में गुणसूत्रों के चार समूह बन जाते हैं।

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Frequently Asked Questions

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