RBC की लंबी हँसिया जैसी संरचना किसके कारण बनती है
NCERT पृष्ठ संख्या 89
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RBC की लंबी हँसिया जैसी संरचना किसके कारण बनती है
NCERT पृष्ठ संख्या 89
दात्र कोशिका अरक्तता से ग्रस्त व्यक्ति में होगा
NCERT पृष्ठ संख्या 89
मानसिक मंदता किससे संबंधित है
NCERT पृष्ठ संख्या 90
असुगुणिता के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
(i) असुगुणिता क्रोमैटिडों के पृथक्करण में विफलता के कारण होती है
(ii) असुगुणिता युग्मविकल्पियों के पृथक्करण में विफलता के कारण होती है
(iii) असुगुणिता से गुणसूत्रों की हानि या वृद्धि होती है।
(iv) असुगुणिता से सदैव गुणसूत्रों की वृद्धि होती है।
(v). डाउन संलक्षण गुणसूत्र 21 में असुगुणिता के कारण होता है।
NCERT पृष्ठ संख्या 90
निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
(i) बहुगुणिता अंत्यावस्था के बाद कोशिकाद्रव्य विभाजन में विफलता के कारण होती है।
(ii) बहुगुणिता से अलिंगसूत्रों की संख्या बढ़ती है
(iii) टर्नर संलक्षण बहुगुणिता का उदाहरण है
(iv) बहुगुणिता से गुणसूत्रों के पूरे समुच्चय में वृद्धि होती है
NCERT पृष्ठ संख्या 90
एक पुरुष जो एकांड्रोप्लास्टिक बौना है तथा जिसकी दृष्टि सामान्य है, सामान्य लंबाई वाली वर्णांध स्त्री से विवाह करता है। पुरुष के पिता छह फुट लंबे थे तथा स्त्री के दोनों जनक औसत लंबाई के थे। एकांड्रोप्लास्टिक बौनापन अलिंगसूत्री प्रभावी है तथा लाल-हरा वर्णांधता X-सहलग्न अप्रभावी है। उनके पुत्रों का कितना अनुपात वर्णांध तथा सामान्य लंबाई का होगा ?
बिंदु उत्परिवर्तन में सम्मिलित है
बिंदु उत्परिवर्तनों में DNA की संरचना बदलकर जीन की संरचना में परिवर्तन होता है। बिंदु उत्परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं – (i) क्षार युग्म प्रतिस्थापन तथा (ii) फ्रेमशिफ्ट प्रतिस्थापन।
अंतर्वेशन किसी न्यूक्लियोटाइड शृंखला में एक या अधिक नाइट्रोजनी क्षारों का जुड़ना है।
द्विगुणन किसी अगुणित घटक में जीनों के एक खंड का एक से अधिक बार उपस्थित होना है।
विलोपन किसी न्यूक्लियोटाइड शृंखला से एक या अधिक नाइट्रोजनी क्षारों का हटना है।
उत्परिवर्तन अध्ययनों के लिए अगुणित द्विगुणितों की तुलना में अधिक उपयुक्त हैं। इसका कारण है
परागकोश तथा अंडाशय संवर्धन द्वारा अगुणित पादप बड़ी संख्या में उत्पन्न किए जा सकते हैं। अगुणित उत्परिवर्तियों के पृथक्करण के लिए उपयोगी हो सकते हैं, क्योंकि अप्रभावी उत्परिवर्ती युग्मविकल्पी भी उत्परिवर्तजन-उपचारित पीढ़ी में ही अभिव्यक्त हो जाएँगे। वांछित उत्परिवर्ती अगुणित स्तर पर चुने जा सकते हैं तथा उनकी गुणसूत्र संख्या दुगुनी करके एक ही पीढ़ी में समयुग्मजी उत्परिवर्ती वंशक्रम प्राप्त किए जा सकते हैं।
निम्नलिखित में से किसका पता विकासशील गर्भस्थ शिशु में उल्बवेधन (एम्नियोसेंटेसिस) द्वारा नहीं लगाया जा सकता?
(d) उल्बवेधन (एम्नियोसेंटेसिस) विकासशील भ्रूण को घेरने वाले उल्ब द्रव में गुणसूत्रीय प्रतिरूप पर आधारित एक भ्रूण लिंग-निर्धारण परीक्षण है। पीलिया गुणसूत्रीय प्रतिरूप पर आधारित स्थिति नहीं है। यह कार्यिकी अक्षमता से संबंधित रोग है।
उल्बवेधन (एम्नियोसेंटेसिस) क्या है?
I. एक प्रसव-पूर्व भ्रूण निर्धारण परीक्षण।
II. एक प्रसवोत्तर भ्रूण निर्धारण परीक्षण
III. यह उल्ब द्रव के गुणसूत्रीय प्रतिरूप पर आधारित है।
IV. यह कोरियोनिक द्रव के गुणसूत्रीय प्रतिरूप पर आधारित है।
V. यह उल्ब द्रव और शुक्रीय द्रव के गुणसूत्रीय प्रतिरूप पर आधारित है
उल्बवेधन (एम्नियोसेंटेसिस) विकासशील भ्रूण को घेरने वाले उल्ब द्रव में गुणसूत्रीय प्रतिरूप पर आधारित एक प्रसव-पूर्व भ्रूण लिंग-निर्धारण परीक्षण है। बढ़ती कन्या भ्रूण हत्या के कारण भारत में वर्तमान में इस पर प्रतिबंध है। (पृष्ठ- 58)
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