अनुषंगी DNA किसमें उपयोगी उपकरण है
ब्रिटेन तथा उनके सहकर्मियों (1966-68) ने दर्शाया कि अनेक कशेरुकी DNA पुनःसंयोजित होते हैं, विशेषकर तब जब उन्हें छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाए। इस प्रेक्षण से यह परिकल्पना उत्पन्न हुई कि ऐसे DNA में क्षारों के कुछ छोटे अनुक्रम सौ या अधिक बार पुनरावृत्त होते हैं। ऐसे DNA को पुनरावृत्तिक अथवा अनुषंगी DNA कहा गया है। यीस्ट को छोड़कर सभी सुकेंद्रकियों में अनुषंगी DNA होता है। VNTR/RFLP जैसे अनुषंगी DNA क्षेत्र DNA अंगुलिछापी (न्यायालयिक विज्ञान) का आधार हैं।