HGP में अनुक्रमित किया गया अंतिम गुणसूत्र था
हल- NCERT देखें, शीर्षक 6.9, पृष्ठ-119, पैरा 3 अंतिम पंक्ति
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HGP में अनुक्रमित किया गया अंतिम गुणसूत्र था
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मानव जीनोम के वे स्थल जो एकल क्षारक के अंतर से भिन्न होते हैं, कहलाते हैं
हल- NCERT देखें, शीर्षक 6.9, पृष्ठ-120 पैरा 1, अंतिम बिंदु
अब तक ज्ञात सबसे बड़ा मानव जीन है
हल- NCERT देखें, शीर्षक 6.9, पृष्ठ-120, पैरा 1, अंतिम बिंदु
यूकैरियोटों में स्थानांतरण RNA के निर्माण को निम्नलिखित में से कौन-सा RNA पॉलिमरेज उत्प्रेरित करता है?
यूकैरियोटों में केन्द्रक के भीतर तीन RNA पॉलिमरेज होते हैं।
RNA पॉलिमरेज I : rRNA (28S, 18S तथा 5.8S) का अनुलेखन करता है
RNA पॉलिमरेज II : mRNA का पूर्ववर्ती, अर्थात् विषमांगी केन्द्रकीय RNA (hnRNA)।
RNA पॉलिमरेज III : tRNA, 5s rRNA तथा snRNA का अनुलेखन
(पृष्ठ-111)
64 कोडॉनों में से कितने अमीनो अम्लों के लिए कूट करते हैं?
61 कोडॉन अमीनो अम्लों के लिए कूट करते हैं तथा 3 कोडॉन किसी भी
अमीनो अम्ल के लिए कूट नहीं करते, अतः वे समापन कोडॉन के रूप में कार्य करते हैं।
(पृष्ठ-112)
वृत्ताकार DNA कहाँ पाया जाता है:
जीवाणुओं, हरितलवक तथा सूत्रकणिका में वृत्ताकार DNA होता है।
यदि किसी DNA अणु में साइटोसीन 18% है, तो ऐडेनीन का प्रतिशत होगा:
A + G + C + T = 100%
चूँकि C = G = 18%
A + 18% + 18% + T = 100%
A + T = 64%
तथा A = T होने से
A = 32% और T = 32%
अतः ऐडेनीन 32% होगा।
DNA के अर्धसंरक्षी प्रतिकृतिकरण को सिद्ध करने में प्रयुक्त समस्थानिक थे:
14NH4Cl तथा नाइट्रोजन का भारी समस्थानिक 15NH4Cl का प्रयोग
मैथ्यू मेसेल्सन तथा फ्रैंकलिन स्टाल द्वारा 1958 में अर्धसंरक्षी DNA
प्रतिकृतिकरण के प्रयोग में किया गया था।
(पृष्ठ-104)
जीवाणु न्यूक्लिओइड में होता है:
प्रोकैरियोटों में, जैसे E. coli में, DNA सम्पूर्ण कोशिका में बिखरा नहीं रहता।
द्विरज्जुकी DNA कुछ प्रोटीनों के साथ एक क्षेत्र में बँधा रहता है जिसे
‘न्यूक्लिओइड’ कहते हैं। न्यूक्लिओइड का DNA प्रोटीनों द्वारा थामे गए बड़े लूपों में संगठित रहता है।
(पृष्ठ-99)
कल्पना कीजिए कि किसी कोशिका में DNA प्रतिकृतिकरण के दौरान एक त्रुटि होती है, जिससे किसी जीन में जहाँ T होना चाहिए वहाँ इसके स्थान पर G आ जाता है। इसका कोशिका पर सम्भवतः क्या प्रभाव पड़ेगा?
जब DNA प्रतिकृतिकरण के चरण पर त्रुटि होती है, तो वह आगे अनुलेखन अर्थात् mRNA के निर्माण तथा अनुवादन अर्थात् प्रोटीन के संश्लेषण को भी प्रभावित करती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि DNA अणु अनुलेखन में पूर्ववर्ती का कार्य करता है और यदि उसमें कोई त्रुटि समाविष्ट हो जाए तो वह आगे तक ले जाई जाती है।
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