Photosynthesis NEET प्रश्न हिंदी में — वनस्पति विज्ञान (Botany) MCQ उत्तर सहित

Photosynthesis (Botany) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

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टमाटर तथा शिमला मिर्च जैसी फसलें, जब कार्बन डाइऑक्साइड-समृद्ध वातावरण में उगायी जाती हैं, अधिक उपज देती हैं क्योंकि:

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XI NCERT का पृष्ठ 223 पढ़ें

पूर्ण सूर्यप्रकाश के लगभग कितने प्रतिशत पर प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश संतृप्ति होती है?

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XI NCERT का पृष्ठ 222 पढ़ें

मान लीजिए पृथक् किए गए हरितलवकों के थाइलैकॉइड के भीतरी भाग को अंधकार में pH 8 के विलयन में स्थानांतरित किया जाता है। सबसे संभावित क्या होगा?

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प्रोटॉन प्रवणता रसोपरासरण तथा ADP के ATP में फॉस्फोरिलीकरण को प्रेरित करेगी। 

निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:

I. छाया में या सघन वनों में उगने वाले पादपों को छोड़कर, प्रकृति में प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश विरले ही सीमाकारी कारक होता है।

II. प्रकाश संतृप्ति पूर्ण सूर्यप्रकाश के 50% पर होती है।

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XI NCERT का पृष्ठ 222

प्रकाश संश्लेषण द्वारा एक CO2 अणु के स्वांगीकरण के लिए ATP तथा NADPH2 के रूप में आवश्यक ऊर्जा है:

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कैल्विन चक्र में, CO2 ग्राही अणु RuBP या RuDP है। इस अभिक्रिया का उत्प्रेरण करने वाला एंजाइम RuBP कार्बोक्सिलेज/ऑक्सीजनेज (रुबिस्को) है। चूँकि कैल्विन चक्र एक बार में केवल एक कार्बन (CO2 के रूप में) लेता है, अतः छह कार्बन (अर्थात् हेक्सोस या ग्लूकोस) के शुद्ध लाभ हेतु चक्र के छह फेरे लगते हैं। इस चक्र में एक मोल हेक्सोस शर्करा (ग्लूकोस) के निर्माण के लिए 18 ATP तथा 12 NADPH2 प्रयुक्त होते हैं। CO2 के 6 अणुओं के लिए 18 ATP तथा 12 NADPH2  अणु चाहिए, अतः CO2 के एक अणु के लिए 3 ATP तथा 2 NADPH2  अणु चाहिए। 

फॉस्फोइनॉल पाइरुवेट (PEP) प्राथमिक CO2 ग्राही है

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फॉस्फोइनॉल पाइरुवेट (PEP) पर्णमध्योतक कोशिका में पाया जाता है, जो C4-पादपों में वायुमंडलीय CO2 को ग्रहण करके उसे ऑक्सैलोऐसीटेट — एक C4 यौगिक — में बदल देता है। यह C4-पादपों का प्रथम स्थायी यौगिक है।

संकल्पना संवर्धक C4-पादपों की पत्तियों में प्रकाश-श्वसनीय हानियों से निपटने हेतु विशेष अनुकूली शारीरिकी होती है। इनमें द्विरूपी हरितलवक उपस्थित होते हैं—पूलाच्छद कोशिकाओं में अग्रैनल तथा पर्णमध्योतक कोशिकाओं में ग्रैनल।

प्रकाश संश्लेषण की दर को प्रभावित करने वाले कारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

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C4-पादपों में CO2 का प्रारंभिक स्थिरीकरण पर्णमध्योतक कोशिकाओं में होता है। CO2 का प्राथमिक ग्राही फॉस्फोइनॉल पाइरुवेट (PEP) है। यह PEP कार्बोक्सिलेज एंजाइम की उपस्थिति में CO2 से संयोग करके प्रथम स्थायी उत्पाद, अर्थात्, ऑक्सैलोऐसीटिक अम्ल (OAA) बनाता है। C3 पादपों में PEP कार्बोक्सिलेज एंजाइम नहीं होता। इनमें RuBisCO एंजाइम होता है। यह एंजाइम कार्बोक्सिलेज (CO2 का स्थिरीकरण) तथा ऑक्सीजनेज (O2 का स्थिरीकरण) दोनों की भाँति कार्य कर सकता है। RuBisCO की बंधुता CO2 के प्रति O2 की तुलना में कहीं अधिक होती है तथा बंधन प्रतिस्पर्धी होता है। उच्च ताप पर CO2 के प्रति इसकी बंधुता घट जाती है तथा यह ऑक्सीजनेज की भाँति कार्य करता है।

अतः उच्च ताप पर C3-पादपों में प्रकाश संश्लेषण घटता है, जबकि C4-पादपों में बढ़ता है।

वह प्रक्रिया जो C3 तथा C4 पादपों में प्रमुख अंतर उत्पन्न करती है, वह है

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प्रकाश श्वसन वह प्रक्रिया है जो C3 तथा C4 पादपों में अंतर उत्पन्न करती है। इस प्रक्रिया में स्थिरीकृत कार्बन की CO2 के रूप में निरंतर हानि होती है। यह उच्च O2 मात्रा तथा उच्च ताप की दशाओं के कारण होती है, जिनमें RuBP कार्बोक्सिलेज, RuBP ऑक्सीजनेज की भाँति कार्य करने लगता है तथा सामान्य प्रकाश संश्लेषण नहीं होता।

जलवाष्प पादप की पत्ती से रंध्री छिद्र द्वारा बाहर निकलती है। उसी रंध्री छिद्र से प्रकाश संश्लेषण के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड पादप के भीतर विसरित होती है। निम्नलिखित विकल्पों की सहायता से उपर्युक्त कथनों का कारण बताइए। 

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जलवाष्प तथा CO2 का विसरण स्वतंत्र प्रक्रिया है। इनका विसरण वायुमंडल तथा पत्तियों के भीतर इनके आंशिक दाब के अंतर पर निर्भर करता है।

एमर्सन का वर्धन प्रभाव तथा रेड ड्रॉप जिसकी खोज में सहायक रहे, वह है 

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एमर्सन ने Chlorella पर प्रकाश संश्लेषण का प्रयोग किया। उन्होंने 680 nm से अधिक का एकवर्णी प्रकाश दिया तथा प्रकाश संश्लेषण की दर में कमी देखी, जिसे रेड ड्रॉप कहते हैं।

बाद में उन्होंने 680 nm तथा 700 nm का समकालिक प्रकाश दिया तथा प्रकाश संश्लेषण की दर में वृद्धि देखी, जिसे वर्धन प्रभाव कहते हैं। इस प्रयोग से प्रकाश संश्लेषण में कार्यरत दो प्रकाशतंत्रों PS-I तथा PS-II की खोज हुई।

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Frequently Asked Questions

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