हरितलवक में सर्वाधिक संख्या में प्रोटॉन कहाँ पाए जाते हैं
जल के प्रकाश-अपघटन के कारण थाइलैकॉइड की गुहिका में प्रोटॉन सांद्रता अधिक होती है। H+ पंपिंग तथा NADP रिडक्टेज सक्रियता हरितलवक के स्ट्रोमा में होती है।
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हरितलवक में सर्वाधिक संख्या में प्रोटॉन कहाँ पाए जाते हैं
जल के प्रकाश-अपघटन के कारण थाइलैकॉइड की गुहिका में प्रोटॉन सांद्रता अधिक होती है। H+ पंपिंग तथा NADP रिडक्टेज सक्रियता हरितलवक के स्ट्रोमा में होती है।
प्रकाश संश्लेषण के दौरान निकलने वाली ऑक्सीजन जल के अणुओं से आती है। इस अभिक्रिया में निम्नलिखित में से तत्वों का कौन-सा युग्म सम्मिलित होता है?
प्रकाश संश्लेषण के दौरान जल का प्रकाश-अपघटन मैंगनीज, कैल्सियम तथा क्लोराइड आयनों की उपस्थिति में नवजात ऑक्सीजन मुक्त करता है।
हरितलवकों में संगठित चपटी झिल्लीदार थैलियों के स्तंभन से बनने वाली संरचनाएँ हैं
हरितलवकों में चपटी थाइलैकॉइड चक्रिकाओं से बनी स्तंभित झिल्लीदार संरचनाएँ ग्रैना कहलाती हैं। ये ग्रैना अस्तंभित थाइलैकॉइड झिल्लियों द्वारा जुड़े रहते हैं, जिन्हें स्ट्रोमा लैमिली कहते हैं तथा जो हरितलवक के स्ट्रोमा क्षेत्र में उपस्थित होती हैं।
अनॉक्सीजनी प्रकाश संश्लेषण किसका लक्षण है
अनॉक्सीजनी प्रकाश संश्लेषण (जिसमें O2 मुक्त नहीं होती) Rhodospirillum में देखा जाता है, जो एक बैंगनी असल्फर जीवाणु है। यह जीव को प्रकाश ऊर्जा ग्रहण करके उसे रासायनिक ऊर्जा के रूप में संचित करने में सहायता करता है।
इसके अतिरिक्त अनॉक्सीजनी प्रकाश संश्लेषण सामान्यतः बैंगनी असल्फर जीवाणुओं, हरे सल्फर/असल्फर जीवाणुओं, हीलियोबैक्टीरिया आदि में होता है।
प्रकाश श्वसन के दौरान कोशिकांगों का सही अनुक्रम है
प्रकाश श्वसन के लिए हरितलवक, परॉक्सीसोम तथा माइटोकॉन्ड्रिया — इसी अनुक्रम में तीन कोशिकांग आवश्यक होते हैं।
प्रथम CO2 स्थिरीकरण उत्पाद के रूप में PGA की खोज किसके प्रकाश संश्लेषण में हुई
मेल्विन कैल्विन द्वारा शैवाल (Chlorella) के प्रकाश संश्लेषण अध्ययनों में रेडियोसक्रिय 14C के उपयोग से यह ज्ञात हुआ कि प्रथम CO2 स्थिरीकरण उत्पाद एक 3-कार्बन कार्बनिक अम्ल था। पहचाना गया प्रथम उत्पाद 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (PGA) था।
C4 -पादप C3 -पादपों की तुलना में प्रकाश संश्लेषण में अधिक दक्ष होते हैं, क्योंकि
C4-पादप C3-पादपों की तुलना में प्रकाश संश्लेषण में अधिक दक्ष होते हैं परंतु अधिक ऊर्जा व्यय करते हैं। इनकी पर्ण कोशिकाओं में हरितलवकों की संख्या अधिक होती है। C4-पादपों की पत्तियों में संवहन पूल बड़ी मृदूतकीय कोशिकाओं के पूलाच्छद से घिरे रहते हैं, जो आगे पर्णमध्योतक कोशिकाओं से घिरे होते हैं। पूलाच्छद कोशिकाओं के हरितलवक बड़े होते हैं तथा उनमें सदैव ग्रैना होते हैं, जबकि पर्णमध्योतक कोशिकाओं के हरितलवक छोटे होते हैं।
चक्रीय प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण से किसका निर्माण होता है
चक्रीय प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण में केवल वर्णक तंत्र-I भाग लेता है। जब फोटॉन PS-I को सक्रिय करते हैं, तो इलेक्ट्रॉनों का एक युग्म उच्च ऊर्जा स्तर पर पहुँच जाता है। इन्हें प्राथमिक ग्राही ग्रहण करता है, जो इन्हें फेरेडॉक्सिन, प्लास्टोक्विनोन, साइटोक्रोम संकुल, प्लास्टोसायनिन तथा अंत में पुनः PS-I के अभिक्रिया केंद्र, अर्थात् P700 तक पहुँचा देता है। इलेक्ट्रॉन अंतरण के प्रत्येक चरण पर इलेक्ट्रॉन स्थितिज ऊर्जा खोते हैं। इनकी यह अधोगामी यात्रा परिवहन शृंखला द्वारा थाइलैकॉइड झिल्ली के आर-पार H+ पंप करने में प्रयुक्त होती है। इस प्रकार स्थापित प्रोटॉन प्रवणता ATP (2 अणु) के निर्माण के लिए उत्तरदायी होती है। NADP का NADPH + H+ में अपचयन नहीं होता।
C4 -पादप C3 -पादपों की तुलना में प्रकाश संश्लेषण की दृष्टि से अधिक दक्ष होते हैं क्योंकि
C4-पादपों में क्रांज शारीरिकी होती है। C4-पादपों की पत्तियों में संवहन पूल मृदूतकीय कोशिकाओं के पूलाच्छद से घिरे रहते हैं, जो आगे पर्णमध्योतक कोशिकाओं से घिरे होते हैं। पूलाच्छद कोशिकाओं के हरितलवक बड़े होते हैं तथा उनमें सदैव ग्रैना होते हैं जबकि पर्णमध्योतक कोशिकाओं के हरितलवक छोटे होते हैं। C4-पादप C3-पादपों की तुलना में प्रकाश संश्लेषण की दृष्टि से अधिक दक्ष होते हैं क्योंकि इनमें अधिक हरितलवक होते हैं।
प्रकाश श्वसन केवल C3-पादपों में होता है। यह क्लोरोफिलयुक्त ऊतकों में होता है। उच्च ताप तथा उच्च ऑक्सीजन सांद्रता पर RuBP कार्बोक्सिलेज की बंधुता CO2 के प्रति घटती है तथा O2 के प्रति बढ़ती है।
प्रकाश संश्लेषण CO2 लेता है तथा O2 मुक्त करता है, जबकि श्वसन O2 का उपयोग करता है तथा CO2 मुक्त करता है। यदि प्रकाश कारक संतृप्तकारी हो, तो वायुमंडल में CO2 की एक निश्चित सांद्रता होगी जिस पर प्रकाश संश्लेषण की दर श्वसन की दर के बराबर होगी। इसे कार्बन डाइऑक्साइड क्षतिपूर्ति बिंदु कहते हैं। C4-पादपों का CO2 क्षतिपूर्ति बिंदु बहुत कम होता है।
प्रकाशतंत्र-II के उत्तेजित क्लोरोफिल अणु से निकले इलेक्ट्रॉन सर्वप्रथम किसके द्वारा ग्रहण किए जाते हैं
प्रकाशतंत्र II के उत्तेजित क्लोरोफिल अणु से निकले इलेक्ट्रॉन सर्वप्रथम क्विनोन द्वारा ग्रहण किए जाते हैं। प्रकाशतंत्र II कुछ इलेक्ट्रॉन वाहकों सहित एक प्रकाश संश्लेषी वर्णक तंत्र है जो ग्रैना थाइलैकॉइड के संपीडित भाग में स्थित होता है। प्रकाशतंत्र II में क्लोरोफिल a, b तथा कैरोटीनॉइड होते हैं। PS II के अन्य घटक फीओफाइटिन, प्लास्टोक्विनोन (PQ), साइटोक्रोम संकुल तथा नीले रंग का ताम्रयुक्त प्लास्टोसायनिन हैं।
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