Photosynthesis NEET प्रश्न हिंदी में — वनस्पति विज्ञान (Botany) MCQ उत्तर सहित

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चक्रीय प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण में भाग लेता है

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चक्रीय प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण, प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण की वह प्रक्रिया है जिसमें उत्तेजित प्रकाश केंद्र द्वारा निकाला गया इलेक्ट्रॉन इलेक्ट्रॉन वाहकों की एक शृंखला से होकर पुनः उसी केंद्र पर लौट आता है। चक्रीय प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण केवल प्रकाशतंत्र I द्वारा किया जाता है। इलेक्ट्रॉन उसी प्रकाशतंत्र के भीतर परिचालित होता है तथा इलेक्ट्रॉन के चक्रीय प्रवाह के कारण फॉस्फोरिलीकरण होता है। उत्तेजित इलेक्ट्रॉन NADP+ तक नहीं जाता, बल्कि इलेक्ट्रॉन परिवहन शृंखला द्वारा पुनः PS I संकुल में लौट आता है। अतः इस चक्रीय प्रवाह से केवल ATP का संश्लेषण होता है, NADPH + H+ का नहीं।

कैल्विन चक्र का प्रथम स्थायी उत्पाद है 

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कैल्विन पथ सभी प्रकाश संश्लेषी पादपों में होता है तथा यह CO2 स्थिरीकरण चक्र है। कार्बन डाइऑक्साइड राइबुलोस-1, 5, बाइफॉस्फेट (RuBp) से संयोग करके एक क्षणिक मध्यवर्ती यौगिक बनाती है। यह मध्यवर्ती यौगिक जल की उपस्थिति में तुरंत टूटकर 3-फॉस्फोग्लिसरेट या 3-PGA के दो अणु बनाता है। यही प्रकाश संश्लेषण का प्रथम स्थायी उत्पाद है।

PS-II केवल कहाँ पाया जाता है

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प्रकाशतंत्र II मुख्यतः ग्रैनल थाइलैकॉइड के संपीडित क्षेत्रों में पाया जाता है।

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

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C4 पादप C3 पादपों की तुलना में अधिक दक्ष होते हैं क्योंकि इनमें प्रकाश श्वसन बहुत कम होता है जबकि C3 पादपों में प्रकाश संश्लेषी कार्बन का आधे से अधिक भाग प्रकाश श्वसन में नष्ट हो जाता है। PEP (फॉस्फोइनॉल पाइरुविक अम्ल) की CO2 के प्रति उच्च बंधुता के कारण C4 पादप कम CO2 सांद्रता में भी CO2 ग्रहण करने में अधिक दक्ष होते हैं।

प्रकाश श्वसन में किसका निर्माण होता है 

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प्रकाश श्वसन, पादप के प्रकाश संश्लेषी अंगों द्वारा राइबुलोस बाइफॉस्फेट (RuBP) के ऑक्सीजनीकरण तथा कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त करने की प्रकाश-निर्भर प्रक्रिया है। सामान्यतः प्रकाश संश्लेषी अंग प्रकाश में इसके विपरीत कार्य करते हैं, अर्थात् CO2 ग्रहण तथा O2 का उत्सर्जन। उच्च ताप पर RuBP कार्बोक्सिलेज ऑक्सीजनेज की भाँति कार्य करता है तथा कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण (C3 चक्र) करने के स्थान पर राइबुलोस 1, 5-बाइफॉस्फेट का ऑक्सीकरण करके एक 3-कार्बन फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल तथा एक 2-कार्बन फॉस्फोग्लाइकोलेट बनाता है।

प्रकाश श्वसन न तो ऊर्जा उत्पन्न करता है और न ही अपचायक शक्ति। बल्कि यह ऊर्जा का उपभोग करता है। इसके अतिरिक्त यह प्रकाश संश्लेषण के कार्य को घटाता है। स्थिरीकृत CO2 की 25% हानि होती है। अतः प्रकाश श्वसन अत्यंत अपव्ययी प्रक्रिया है। यह केवल C3 पादपों में होता है। C4 पादपों ने प्रकाश श्वसन की समस्या पर विजय पा ली है।

क्रांज शारीरिकी सामान्यतः किससे संबंधित है 

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C4 पादप शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के अनुकूलित होते हैं तथा इनमें जैवभार की उत्पादकता अधिक होती है। इनमें एक विशेष प्रकार की पर्ण शारीरिकी होती है जिसे क्रांज शारीरिकी कहते हैं। इस प्रकार की शारीरिकी में पूलाच्छद कोशिकाएँ संवहन पूलों के चारों ओर अनेक स्तर बनाती हैं; इनकी विशेषता है अधिक संख्या में हरितलवक, गैसीय विनिमय के लिए अपारगम्य मोटी भित्तियाँ तथा अंतरकोशिकीय अवकाशों का अभाव।

C4 पादप का प्रथम कार्बन डाइऑक्साइड स्थिरीकरण उत्पाद है 

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C4 पादपों में कार्बन डाइऑक्साइड का प्रारंभिक स्थिरीकरण पर्णमध्योतक कोशिकाओं में होता है। CO2 का प्राथमिक ग्राही, अर्थात् फॉस्फोइनॉल पाइरुवेट (PEP), PEP कार्बोक्सिलेज या PEPcase की उपस्थिति में CO2 से संयोग करके ऑक्सैलोऐसीटिक अम्ल बनाता है, जो C4 पथ का प्रथम स्थायी कार्बन डाइऑक्साइड स्थिरीकरण उत्पाद है।

प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड आवश्यक है। नियंत्रण उपकरण में इस गैस के प्रवेश को सर्वाधिक प्रभावी रूप से रोकने के लिए प्रयुक्त रसायन है 

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अन्य क्षार धातुओं की भाँति, पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड CO2 से इस प्रकार संयोग करता है :-

2KOH + CO2 → K2CO3 + H2O

C4 पादपों में प्रकाश संश्लेषण वायुमंडलीय CO2 स्तर से अपेक्षाकृत कम सीमित होता है क्योंकि 

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C4 पादपों में CO2 ग्राही अणु फॉस्फोइनॉल पाइरुवेट (PEP) है। PEP की उच्च बंधुता के कारण C4 पादप कम सांद्रता में उपलब्ध CO2 को भी ग्रहण करने में अधिक दक्ष होते हैं। PEP कार्बोक्सिलेज (PEPcase) वह प्रमुख एंजाइम है जो CO2 के प्राथमिक स्थिरीकरण का उत्प्रेरण करता है।

प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशिक अभिक्रियाओं के विषय में निम्नलिखित में से कौन गलत है?

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प्रकाशतंत्र (PS-I) में प्रकाश केंद्र एक विशेष क्लोरोफिल-a अणु होता है जिसे P700 कहते हैं। यह लाल तथा सुदूर-लाल दोनों प्रकाश में सक्रिय रहता है, जबकि क्लोरोफिल-a का एक विशेष रूप, जिसे P680 कहते हैं, बहुत थोड़ी मात्रा में प्रकाशतंत्र-II (PS-II) का अभिक्रिया केंद्र बनाता है, जो सुदूर-लाल प्रकाश (680 nm से परे) में निष्क्रिय रहता है।

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Frequently Asked Questions

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