C4 -पादपों की पत्तियों में CO2 स्थिरीकरण के दौरान मैलिक अम्ल का संश्लेषण कहाँ होता है
C4-पादपों में क्रांज शारीरिकी होती है। C4-पादपों की पत्तियों में संवहन पूल मृदूतकीय कोशिकाओं के पूलाच्छद से घिरे रहते हैं, जो आगे पर्णमध्योतक कोशिकाओं से घिरे होते हैं। C4-पादपों में हैच तथा स्लैक पथ में दो कार्बोक्सिलीकरण अभिक्रियाएँ होती हैं, एक पर्णमध्योतक कोशिकाओं के हरितलवक में तथा दूसरी पूलाच्छद कोशिकाओं के हरितलवक में। प्रारंभिक CO2 स्थिरीकरण पर्णमध्योतक कोशिकाओं में होता है जहाँ प्राथमिक CO2 ग्राही फॉस्फोइनॉल पाइरुवेट है तथा ऑक्सैलोऐसीटेट बनता है। ऑक्सैलोऐसीटेट अपचयित होकर मैलिक अम्ल बनाता है। पर्णमध्योतक कोशिकाओं के हरितलवकों से मैलिक अम्ल पूलाच्छद कोशिकाओं के हरितलवकों में स्थानांतरित होकर विकार्बोक्सिलीकृत होता है तथा CO2 एवं पाइरुविक अम्ल बनाता है। यह CO2 पुनः C3 चक्र द्वारा स्थिर होती है।
पादपों में रंध्र दो छोटी विशिष्ट हरी अधिचर्म कोशिकाओं से घिरा रहता है जिन्हें द्वार कोशिकाएँ कहते हैं। द्वार कोशिकाएँ आकार में छोटी होती हैं तथा इसीलिए स्फीति परिवर्तनों से शीघ्र प्रभावित होती हैं।