Plant Anatomy Plant Tissues NEET प्रश्न हिंदी में — वनस्पति विज्ञान (Botany) MCQ उत्तर सहित

Plant Anatomy Plant Tissues (Botany) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

सभी Physics Chemistry Botany Zoology
भाषा English हिंदी
Clear Register free for difficulty & keyword filters

स्थलीय पादपों में द्वार कोशिकाएँ अन्य अधिचर्मी कोशिकाओं से किसकी उपस्थिति में भिन्न होती हैं:-

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

स्थलीय पादपों में रंध्रों की द्वार कोशिकाएँ विशिष्ट अधिचर्मी कोशिकाएँ हैं जिनमें हरितलवक होते हैं। शेष अधिचर्मी कोशिकाओं में हरितलवक अनुपस्थित होते हैं। परंतु द्वार कोशिकाओं के हरितलवक NADP रिडक्टेस एंजाइम के अभाव के कारण अल्प प्रकाश संश्लेषण ही कर पाते हैं।

निम्नलिखित में से कौन पार्श्व विभज्योतक नहीं है?

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

अंतर्वेशी विभज्योतक शीर्षस्थ विभज्योतक के वे भाग हैं जो अक्ष की वृद्धि तथा स्थायी ऊतकों के निर्माण के दौरान शीर्ष से पृथक हो जाते हैं। यह अधिकतर पर्वसंधि के आधार पर (जैसे Mentha viridis), पर्व के आधार पर (जैसे अनेक एकबीजपत्रियों का तना यथा गेहूँ, धान, घास; Equisetum जैसे टेरिडोफाइट) अथवा पत्ती के आधार पर (जैसे Pinus) उपस्थित होता है।

जौ के तने में संवहन पूल होते हैं

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

Hordeum vulgare (जौ) पादप में संवहन पूल भरण ऊतकों में बिखरे रहते हैं, संख्या में अनेक होते हैं तथा आकार में भिन्न होते हैं-परिधि की ओर छोटे और भरण ऊतक के केंद्र की ओर बड़े, रूपरेखा में अंडाकार अथवा गोल, संयुक्त, समपार्श्वी तथा बंद।

द्वार कोशिकाएँ किसमें सहायता करती हैं ?

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

द्वार कोशिकाएँ वाष्पोत्सर्जन में सहायता करती हैं। प्रत्येक रंध्री छिद्र दो विशिष्ट अधिचर्मी कोशिकाओं से घिरा रहता है जिन्हें द्वार कोशिकाएँ कहते हैं। अपने छोटे आकार के कारण द्वार कोशिकाएँ स्फीति परिवर्तन से शीघ्र प्रभावित होती हैं और इस प्रकार रंध्रों के खुलने तथा बंद होने का नियमन करती हैं।

खंभ मृदूतक किसकी पत्तियों में अनुपस्थित होता है :-

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

ज्वार (कुल-Poaceae) एक एकबीजपत्री पादप है। एकबीजपत्री की पत्तियों में खंभ मृदूतक नहीं होता, क्योंकि एकबीजपत्री पत्ती का पर्णमध्योतक खंभ तथा स्पंजी मृदूतक में विभेदित नहीं होता, सभी कोशिकाएँ पतली भित्ति वाली, पर्णहरितयुक्त तथा कम अंतरकोशिकीय अवकाशों के साथ अनियमित रूप से सघन व्यवस्थित होती हैं।

संवहन ऊतक, यांत्रिक ऊतक तथा उपचर्म का ह्रास किसका लक्षण है

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

जलोद्भिदों में संवहन ऊतक तथा यांत्रिक ऊतक ह्रासित होते हैं। उपचर्म या तो पूर्णतः
अनुपस्थित होता है अथवा यदि उपस्थित हो तो पतला और अल्प विकसित होता है। मरुद्भिदों में उपचर्म मोटा तथा सुविकसित होता है।
संवहन ऊतक तथा यांत्रिक ऊतक सुविकसित एवं विभेदित होते हैं। समोद्भिदों में वायवीय भाग का उपचर्म मध्यम रूप से विकसित होता है। संवहन तथा यांत्रिक ऊतक पर्याप्त विकसित एवं सुविभेदित होते हैं।

पुष्पी पादपों में संवहन ऊतक किससे विकसित होते हैं

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

प्ररोह शीर्षस्थ विभज्योतक के लिए ऊतकजन सिद्धांत हैन्स्टीन (1870) द्वारा प्रस्तावित किया गया। इसके अनुसार तीन भिन्न विभज्योतकी क्षेत्र (परतें) होते हैं जिन्हें त्वचाजन, वल्कुटजन तथा रंभजन कहते हैं। त्वचाजन सबसे बाहरी ऊतकजन है जो अधिचर्म बनाता है, वल्कुटजन मध्य वाला है जो वल्कुट बनाता है तथा रंभजन सबसे भीतरी है जिससे केंद्रीय रंभ (ie, अर्थात् संवहन ऊतक) बनता है।

कॉर्क एधा (फेलोजन) बाहरी वल्कुट क्षेत्र में पाया जाने वाला द्वितीयक पार्श्व विभज्योतक है। इसकी कोशिकाएँ परिनतिक रूप से विभाजित होकर बाहर की ओर (कॉर्क अथवा फेलम बनाते हुए) तथा भीतर की ओर (द्वितीयक वल्कुट अथवा फेलोडर्म बनाते हुए) कोशिकाएँ काटती हैं।

 

पादपों में द्वितीयक वृद्धि के गहन अध्ययन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म उपयुक्त है:

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

(b) व्यास अथवा मोटाई में वृद्धि संवहन एधा तथा कॉर्क एधा की क्रियाशीलता के फलस्वरूप द्वितीयक ऊतकों के निर्माण के कारण होती है। यह द्वितीयक वृद्धि द्विबीजपत्री तने तथा जड़ का लक्षण है।

वाहिका अवयवों तथा चालनी नलिका अवयवों का एक सामान्य संरचनात्मक लक्षण है :-

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

पादप संवहन ऊतक में जाइलम का एक महत्वपूर्ण अभिन्न अवयव जाइलम वाहिका है जो केंद्रकविहीन होती है। फ्लोएम में चालनी नलिकाओं की एक पंक्ति होती है जो परिपक्वता पर केंद्रकविहीन होती हैं।

यदि रंध्र सीमित संख्या में ऐसी कोशिकाओं से घिरा रहे जिन्हें अन्य अधिचर्मी कोशिकाओं से अलग नहीं पहचाना जा सकता, तो इस प्रकार के रंध्र कहलाते हैं।

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

(d) एनोमोसाइटिक रंध्रों में द्वार कोशिकाओं को घेरने वाली सहायक कोशिकाएँ नहीं होतीं। एनिसोसाइटिक रंध्र में तीन सहायक कोशिकाएँ होती हैं जिनमें से एक स्पष्ट रूप से
अन्य दो से छोटी होती है। पैरासाइटिक रंध्र के दोनों ओर एक या अधिक सहायक कोशिकाएँ होती हैं जो
छिद्र तथा द्वार कोशिकाओं के दीर्घ अक्ष के समांतर स्थित रहती हैं। पेरिजीनस रंध्र में द्वार कोशिकाओं तथा सहायक कोशिकाओं का उद्भव स्वतंत्र होता है।

Ready to ace NEET?

Free access · No credit card required

Frequently Asked Questions

हाँ। इस पेज के हर Plant Anatomy Plant Tissues प्रश्न को बिना लॉगिन किए मुफ़्त हल किया जा सकता है, और सही उत्तर व विस्तृत व्याख्या तुरंत देखी जा सकती है।

नहीं। प्रश्न हल करने और उत्तर देखने के लिए किसी खाते की आवश्यकता नहीं है। मुफ़्त खाता बुकमार्क, निजी नोट्स और प्रगति ट्रैकिंग जोड़ देता है।

इस प्रश्न बैंक में NEET के पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) और अभ्यास प्रश्न दोनों शामिल हैं — जहाँ लागू हो, हर प्रश्न पर उसका परीक्षा वर्ष अंकित है।