चूँकि एकबीजपत्रियों में एधा उपस्थित नहीं होती, इसलिए इन्हें कहते हैं
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चूँकि एकबीजपत्रियों में एधा उपस्थित नहीं होती, इसलिए इन्हें कहते हैं
P-90 , PARA-1
जब किसी संवहन पूल में जाइलम तथा फ्लोएम भिन्न त्रिज्याओं पर एकांतर क्रम में व्यवस्थित होते हैं, तो ऐसी व्यवस्था कहलाती है _______ तथा यह अधिकतर पाई जाती है __________.
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जब जाइलम तथा फ्लोएम संवहन पूल की समान त्रिज्या पर स्थित होते हैं, तो उन्हें कहते हैं _________ प्रकार का संवहन पूल तथा ये पाए जाते हैं _________.
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द्विबीजपत्री जड़ की अनुप्रस्थ काट में वल्कुट की सबसे भीतरी परत कहलाती है _________.
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अंतस्त्वचीय कोशिकाओं की भित्तियों पर जल-अपारगम्य, मोमी पदार्थ सुबेरिन का निक्षेपण किस रूप में होता है __________.
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द्विबीजपत्री जड़ की अनुप्रस्थ काट में अंतस्त्वचा के आगे मोटी भित्ति वाली मृदूतकी कोशिकाओं की कुछ परतें होती हैं जिन्हें कहते हैं _________.
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द्वितीयक वृद्धि के दौरान पार्श्व जड़ों तथा संवहन एधा का प्रारंभन कहाँ होता है ___________.
P-91 , PARA-1
द्विबीजपत्री जड़ की अनुप्रस्थ काट में जाइलम तथा फ्लोएम के बीच स्थित मृदूतकी कोशिकाएँ कहलाती हैं _________.
P-91 , PARA-1
द्विबीजपत्री जड़ की अनुप्रस्थ काट में अंतस्त्वचा के भीतरी ओर के सभी ऊतक जैसे परिरंभ, संवहन पूल तथा मज्जा मिलकर बनाते हैं ________.
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एकबीजपत्री जड़ में कोई ________ नहीं होती।
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