हरितलवक की स्ट्रोमा लैमिली झिल्ली:
XI NCERT का पृष्ठ 213 पढ़ें
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हरितलवक की स्ट्रोमा लैमिली झिल्ली:
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कैल्विन चक्र की कौन-सी अवस्था ATP का उपयोग करती है?
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निम्नलिखित में से कौन C4 पादपों के विशेष लक्षण हैं?
I. इनमें एक विशेष प्रकार की पर्ण शारीरिकी होती है।
II. ये उच्च ताप सहन करते हैं तथा उच्च प्रकाश तीव्रता के प्रति अनुक्रिया दर्शाते हैं।
III. इनमें प्रकाश श्वसन नहीं होता तथा जैवभार की उत्पादकता अधिक होती है।
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मान लीजिए किसी प्रयोग में प्रकाश जलाकर प्रकाश संश्लेषण एक समान गति से चल रहा है तथा कार्बन डाइऑक्साइड, राइबुलोस-बाइफॉस्फेट (RuBP) से संयोग करके 3-फॉस्फोग्लिसरेट (3PG) बना रही है। तभी अचानक कार्बन डाइऑक्साइड का स्रोत हटा दिया जाता है। 3PG तथा RuBP की सांद्रताओं में क्या परिवर्तन होंगे?
CO2 का स्रोत हटा देने से RUBISCO की क्रिया अवरुद्ध हो जाएगी, जिसे क्रियाधार के रूप में CO2 की आवश्यकता होती है। 3-फॉस्फोग्लिसरेट (3PG) का आगे उत्पादन नहीं होगा।
कैल्विन चक्र की शेष अभिक्रियाएँ CO2 की अनुपस्थिति से अवरुद्ध नहीं होतीं। चक्रीय पथ के मध्यवर्ती राइबुलोस-1,5-बाइफॉस्फेट (RuBP) में परिवर्तित हो जाएँगे तथा RuBP का स्तर बढ़ेगा।
टमाटर तथा शिमला मिर्च जैसी फसलें, जब कार्बन डाइऑक्साइड-समृद्ध वातावरण में उगायी जाती हैं, अधिक उपज देती हैं क्योंकि:
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पूर्ण सूर्यप्रकाश के लगभग कितने प्रतिशत पर प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश संतृप्ति होती है?
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मान लीजिए पृथक् किए गए हरितलवकों के थाइलैकॉइड के भीतरी भाग को अंधकार में pH 8 के विलयन में स्थानांतरित किया जाता है। सबसे संभावित क्या होगा?
प्रोटॉन प्रवणता रसोपरासरण तथा ADP के ATP में फॉस्फोरिलीकरण को प्रेरित करेगी।
निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
I. छाया में या सघन वनों में उगने वाले पादपों को छोड़कर, प्रकृति में प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश विरले ही सीमाकारी कारक होता है।
II. प्रकाश संतृप्ति पूर्ण सूर्यप्रकाश के 50% पर होती है।
XI NCERT का पृष्ठ 222
प्रकाश संश्लेषण द्वारा एक CO2 अणु के स्वांगीकरण के लिए ATP तथा NADPH2 के रूप में आवश्यक ऊर्जा है:
कैल्विन चक्र में, CO2 ग्राही अणु RuBP या RuDP है। इस अभिक्रिया का उत्प्रेरण करने वाला एंजाइम RuBP कार्बोक्सिलेज/ऑक्सीजनेज (रुबिस्को) है। चूँकि कैल्विन चक्र एक बार में केवल एक कार्बन (CO2 के रूप में) लेता है, अतः छह कार्बन (अर्थात् हेक्सोस या ग्लूकोस) के शुद्ध लाभ हेतु चक्र के छह फेरे लगते हैं। इस चक्र में एक मोल हेक्सोस शर्करा (ग्लूकोस) के निर्माण के लिए 18 ATP तथा 12 NADPH2 प्रयुक्त होते हैं। CO2 के 6 अणुओं के लिए 18 ATP तथा 12 NADPH2 अणु चाहिए, अतः CO2 के एक अणु के लिए 3 ATP तथा 2 NADPH2 अणु चाहिए।
फॉस्फोइनॉल पाइरुवेट (PEP) प्राथमिक CO2 ग्राही है
फॉस्फोइनॉल पाइरुवेट (PEP) पर्णमध्योतक कोशिका में पाया जाता है, जो C4-पादपों में वायुमंडलीय CO2 को ग्रहण करके उसे ऑक्सैलोऐसीटेट — एक C4 यौगिक — में बदल देता है। यह C4-पादपों का प्रथम स्थायी यौगिक है।
संकल्पना संवर्धक C4-पादपों की पत्तियों में प्रकाश-श्वसनीय हानियों से निपटने हेतु विशेष अनुकूली शारीरिकी होती है। इनमें द्विरूपी हरितलवक उपस्थित होते हैं—पूलाच्छद कोशिकाओं में अग्रैनल तथा पर्णमध्योतक कोशिकाओं में ग्रैनल।
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