वनस्पति विज्ञान (Botany) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

वनस्पति विज्ञान (Botany) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

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यूबिश काय किससे स्रावित होते हैं

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यूबिश काय केवल कुछ माइक्रॉन व्यास की गोलाभ संरचनाएँ हैं। ये ग्रंथिल टेपीटम द्वारा उत्पन्न होते हैं तथा बाह्यचोल के बाह्य स्थूलन में भाग लेते हैं, जिसका प्रतिरूप चतुष्क अवस्था में बीजाणु कोशिकाद्रव्य द्वारा निर्धारित होता है।

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एल्यूरोन परत है

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अनाजों में भ्रूणपोष की एक या कुछ बाहरी परतें मोटी भित्ति वाली तथा गर्तयुक्त सघन कोशिकाद्रव्य वाली होती हैं। ये मुख्यतः एल्यूरोन कणों से भरी रहती हैं, अतः एल्यूरोन ऊतक कहलाती हैं। ये परतें ऐमिलेज तथा प्रोटिएज जैसे कुछ जल-अपघटनी एंजाइम स्रावित करती हैं जो बीज अंकुरण के दौरान मंड एवं प्रोटीन का विघटन करते हैं। चूँकि यह परत भ्रूणपोष से बनती है, अतः प्रकृति में त्रिगुणित होती है।

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सेब का खाद्य भाग है

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सेब कूट फल है क्योंकि अंडाशय फल नहीं बनाता, बल्कि मांसल पुष्पासन फल में रूपांतरित हो जाता है जो खाद्य होता है।

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चमगादड़ द्वारा परागण कहलाता है

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चमगादड़ द्वारा परागण काइरोप्टेरीफिली कहलाता है।

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जीनिया तथा मेटाजीनिया शब्द किससे संबंधित हैं

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भ्रूण को छोड़कर भ्रूणकोश के भीतर की संरचनाओं पर नर जनक (परागकण) के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव को फोक (1881) ने जीनिया कहा। यह परिघटना केवल भ्रूणपोष भाग तक सीमित है तथा Zea mays में देखी जाती है। मेटाजीनिया को भ्रूणकोश के बाहर स्थित बीजचोल या फलभित्ति पर पराग के प्रभाव के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। Phoenix dactylifera में फलों का आकार तथा परिपक्वन का समय बीजांडों का निषेचन करने वाले परागकणों के प्रकार पर निर्भर करता है। भ्रूणपोष या भ्रूण अथवा दोनों द्वारा कुछ हॉर्मोनों या समान पदार्थों का स्राव होता है जो बीज एवं फल की भित्ति में विसरित होकर विशिष्ट प्रभाव डालते हैं। इन पदार्थों का स्राव, बदले में, बीजांडों का निषेचन करने वाले परागकणों से प्रभावित होता है।

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परागकण ताप की चरम दशाओं तथा निर्जलीकरण को सह पाते हैं क्योंकि उनका बाह्यचोल किससे बना होता है

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बाह्यचोल परागकण की बाहरी परत है जो ऐसीटोलिसिस-प्रतिरोधी परत है। यह भौतिक तथा जैविक अपघटन के प्रति भी प्रतिरोधी है। बाह्यचोल के इसी गुण के कारण परागकण जीवाश्म निक्षेपों में लंबे समय तक भली-भाँति परिरक्षित मिलते हैं।

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परागनलिका सामान्यतः भ्रूणकोश में कैसे प्रवेश करती है

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भ्रूणकोश की भित्ति में प्रवेश करने के बाद परागनलिका भ्रूणकोश में प्रवेश के दौरान बीजांडकाय कोशिकाओं तथा सहायक कोशिकाओं से होकर गुजरती है, जैसे Fagopyrum. परागनलिका अंड तथा एक सहायक कोशिका के बीच से गुजरती है। Cardiospermum में यह भ्रूणकोश भित्ति तथा सहायक कोशिका के बीच से गुजरती है। Oxalis में यह सीधे एक सहायक कोशिका से होकर जाती है। Viola में यह एक सहायक कोशिका में प्रवेश करके उसके आधार से होकर मार्ग बनाती है। सामान्य दशाओं में परागनलिका के आघात से केवल एक सहायक कोशिका नष्ट होती है तथा दूसरी कुछ समय बाद तक अक्षत बनी रहती है।

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लेजर किरण से जनन कोशिका को नष्ट कर देने के बाद भी पुष्पी पादप का परागकण अंकुरित होकर सामान्य परागनलिका बनाता है क्योंकि

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(d)  परागण के पश्चात् के परिवर्धन के दौरान परागकण का अंकुरण होता है। परागकण वर्तिकाग्र पर वर्तिकाग्री स्राव से अपने जनन छिद्रों द्वारा जल तथा पोषक अवशोषित करता है। नलिका या कायिक कोशिका बढ़कर किसी एक जनन छिद्र या जनन खाँच से परागकण के बाहर निकलकर परागनलिका बनाती है। जनन कोशिका परागनलिका नहीं बनाती, बल्कि वह परागनलिका में चली जाती है तथा विभाजित होकर 2 नर युग्मक बनाती है। अतः लेजर किरण से जनन कोशिका को नष्ट कर देने के बाद भी परागकण सामान्य परागनलिका बनाता है क्योंकि कायिक कोशिका को क्षति नहीं पहुँची है।

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अनुन्मील परागण पुष्पोन्मीलन पर वरीयता रखता है क्योंकि

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अनुन्मील पुष्प बिल्कुल नहीं खुलते। ऐसे पुष्पों में परागकोश तथा वर्तिकाग्र एक-दूसरे के निकट होते हैं। जब कलिकाओं में परागकोश स्फुटित होते हैं, तो परागकण वर्तिकाग्र के संपर्क में आकर परागण कर देते हैं। अतः अनुन्मील पुष्प स्वपरागित होते हैं और पर-परागण की कोई संभावना नहीं रहती। इसलिए इन पुष्पों में किसी परागण कारक की आवश्यकता नहीं होती।

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स्पोरोपोलेनिन पराग बाह्यचोल का एक घटक है।

यह किसकी क्रिया द्वारा अपघटित हो सकता है 

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परागकण की बाहरी परत बाह्यचोल कहलाती है। यह मोटी, चिकनी तथा उपत्वचायुक्त होती है। यह क्यूटिन स्पोरोपोलेनिन कहलाता है। यह किसी भी एंजाइम द्वारा अपघटित नहीं होता। उच्च ताप, प्रबल अम्ल या प्रबल क्षार का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अतः यह रासायनिक तथा जैविक अपघटन के प्रति प्रतिरोधी है। स्पोरोपोलेनिन के कारण परागकण सूक्ष्मजीवाश्मों के रूप में भली-भाँति परिरक्षित रहते हैं।

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Frequently Asked Questions

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