वनस्पति विज्ञान (Botany) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

वनस्पति विज्ञान (Botany) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

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निम्नलिखित में से कौन DNA में अनुलेखन इकाई का भाग नहीं है?

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अनुलेखन इकाई में प्रवर्तक, संरचनात्मक जीन तथा समापक होते हैं। प्रेरक (लैक्टोस/ऐलोलैक्टोस) अनुलेखन इकाई का घटक नहीं है।

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यदि DNA के एक रज्जुक का नाइट्रोजनी क्षार अनुक्रम ATCTG है, तो पूरक RNA रज्जुक का अनुक्रम क्या होगा?

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यदि DNA के एक रज्जुक का नाइट्रोजनी क्षार अनुक्रम ATCTG है, तो mRNA का पूरक अनुक्रम UAGAC होगा।

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अनुलेखन के दौरान इंट्रॉनों को हटाना तथा एक्सॉनों को एक निश्चित क्रम में जोड़ना कहलाता है

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किसी प्रारूपी सुकेंद्रकी जीन का प्राथमिक अनुलेख एक्सॉनों के साथ-साथ इंट्रॉन भी रखता है। RNA स्प्लाइसिंग के दौरान इंट्रॉन हटा दिए जाते हैं तथा एक्सॉन एक निश्चित क्रम में जुड़कर क्रियाशील RNA बनाते हैं।

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इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से देखने पर गुणसूत्रों में ‘धागे पर मणिकाओं’ जैसी दिखने वाली संरचनाएँ कौन-सी हैं?

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न्यूक्लियोसोम क्रोमैटिन की अतिसूक्ष्म उपइकाई है जो हिस्टोन प्रोटीनों के क्रोड पर DNA के लिपटने से बनती है। यह शब्द ऊडे et. al, (1975) ने गढ़ा। यह चपटी संरचना है जिसकी लंबाई 10 nm तथा मोटाई 5-5.7 nm होती है। इसका क्रोड न्यू-काय कहलाता है। यह हिस्टोन अणुओं के चार युग्मों से बना होता है। H2A, H2B, H3 तथा H4। DNA इस पर 1.75 फेरे लगाता है

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नीचे दिए गए चार (A - D) कथनों में से दो सही कथन चुनिए, जो lac ऑपेरॉन के विषय में हैं।

(A) ग्लूकोस या गैलेक्टोस दमनकारी से बंधकर उसे निष्क्रिय कर सकता है

(B) लैक्टोस की अनुपस्थिति में दमनकारी प्रचालक क्षेत्र से बंध जाता है

(C) z-जीन परमिएज का कूटलेखन करता है

(D) इसकी व्याख्या फ्रांस्वा जैकब तथा जैक्स मोनो ने की

सही कथन हैं

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प्रोकैरियोटों में प्रोटीन संश्लेषण के नियमन की व्याख्या हेतु 1961 में एक परिकल्पना दी गई। यह परिकल्पना एफ. जैकब तथा जे. मोनो ने दी और इसके लिए उन्हें 1965 में नोबेल पुरस्कार मिला; यह परिकल्पना ऑपेरॉन मॉडल के नाम से जानी गई।

प्रचालक जीन DNA का वह खंड है जो अनुलेखन पर नियंत्रण रखता है। लैक्टोस की अनुपस्थिति में दमनकारी प्रचालक जीन से बंध जाता है।

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आनुवंशिक कूट का जो पक्ष उसका प्रमुख लक्षण नहीं है, वह है उसका

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आनुवंशिक कूट अपह्रासी है, अर्थात्, किसी दिए गए ऐमीनो अम्ल को एक से अधिक कूटों द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।

कोशिका माध्यम के भीतर आनुवंशिक कूट को अद्वयर्थी कहा जाता है क्योंकि कोई विशेष कूट सदैव उसी ऐमीनो अम्ल का कूटलेखन करता है। किंतु कुछ विरले प्रकरणों में आनुवंशिक कूट द्वयर्थी पाया जाता है, अर्थात्, कुछ कूट भिन्न दशाओं में भिन्न ऐमीनो अम्लों का कूटलेखन करते हैं। आनुवंशिक कूट लगभग सार्वभौमिक है।

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अनुषंगी DNA किसमें उपयोगी उपकरण है

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ब्रिटेन तथा उनके सहकर्मियों (1966-68) ने दर्शाया कि अनेक कशेरुकी DNA पुनःसंयोजित होते हैं, विशेषकर तब जब उन्हें छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाए। इस प्रेक्षण से यह परिकल्पना उत्पन्न हुई कि ऐसे DNA में क्षारों के कुछ छोटे अनुक्रम सौ या अधिक बार पुनरावृत्त होते हैं। ऐसे DNA को पुनरावृत्तिक अथवा अनुषंगी DNA कहा गया है। यीस्ट को छोड़कर सभी सुकेंद्रकियों में अनुषंगी DNA होता है। VNTR/RFLP जैसे अनुषंगी DNA क्षेत्र DNA अंगुलिछापी (न्यायालयिक विज्ञान) का आधार हैं।

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निम्नलिखित में से कौन आणविक जीवविज्ञान के केंद्रीय सिद्धांत का पालन नहीं करता?

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बिंदु उत्परिवर्तन में सम्मिलित है

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बिंदु उत्परिवर्तनों में DNA की संरचना बदलकर जीन की संरचना में परिवर्तन होता है। बिंदु उत्परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं – (i) क्षार युग्म प्रतिस्थापन तथा (ii) फ्रेमशिफ्ट प्रतिस्थापन।

अंतर्वेशन किसी न्यूक्लियोटाइड शृंखला में एक या अधिक नाइट्रोजनी क्षारों का जुड़ना है।

द्विगुणन किसी अगुणित घटक में जीनों के एक खंड का एक से अधिक बार उपस्थित होना है।

विलोपन किसी न्यूक्लियोटाइड शृंखला से एक या अधिक नाइट्रोजनी क्षारों का हटना है।

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किसी अनुलेखन इकाई में इंट्रॉनों को हटाना तथा एक्सॉनों को एक निश्चित क्रम में जोड़ना कहलाता है ?

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कुछ सुकेंद्रकियों में जीन कूटलेखी न्यूक्लियोटाइड अनुक्रमों से बने होते हैं, जो एक-दूसरे से अकूटलेखी अनुक्रमों के खंडों द्वारा पृथक् रहते हैं। यहाँ कूटलेखी अनुक्रम एक्सॉन तथा अकूटलेखी अनुक्रम इंट्रॉन कहलाते हैं। किसी प्रारूपी सुकेंद्रकी जीन का प्राथमिक अनुलेख एक्सॉनों के साथ-साथ इंट्रॉन भी रखता है। इस प्राथमिक अनुलेख से इंट्रॉन RNA स्प्लाइसिंग नामक प्रक्रिया द्वारा हटा दिए जाते हैं।

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Frequently Asked Questions

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