वनस्पति विज्ञान (Botany) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

वनस्पति विज्ञान (Botany) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

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DNA में दोनों पॉलिन्यूक्लियोटाइड शृंखलाएँ होती हैं:

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1953 में जेम्स वॉटसन तथा फ्रांसिस क्रिक ने सुझाया कि DNA अणु में दो पॉलिन्यूक्लियोटाइड शृंखलाएँ प्रतिसमांतर अथवा विपरीत दिशाओं में व्यवस्थित रहती हैं।

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मानव जीनों के एक समुच्चय की क्रमिक अभिव्यक्ति तब होती है जब कोई स्टेरॉयड अणु किससे बंधता है:

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स्टेरॉयड हॉर्मोन ग्राही प्रोटीन संकुल विशिष्ट DNA अनुक्रम से बंधकर लक्ष्य जीन के अनुलेखन को सक्रिय करता है।

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जीवाणु प्रोटीन संश्लेषण के दौरान t-RNA तथा m-RNA के बीच अन्योन्यक्रिया को कौन-सा प्रतिजैविक संदमित करता है?

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टेट्रासाइक्लिन tRNA तथा mRNA के बीच अन्योन्यक्रिया को संदमित करता है। इस प्रकार यह प्रोटीन संश्लेषण रोकता है।

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प्रोटीन संश्लेषण में ऐमीनो अम्ल अनुक्रम किसके अनुक्रम द्वारा निर्धारित होता है

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प्रोटीन संश्लेषण की प्रक्रिया में संदेशवाहक RNA (m-RNA) DNA से अनुलेखित आनुवंशिक कूट को कोशिका के भीतर विशिष्ट स्थलों (जिन्हें राइबोसोम कहते हैं) तक ले जाने के लिए उत्तरदायी होता है, जहाँ यह सूचना प्रोटीन संघटन में अनुवादित होती है। किसी विशेष प्रोटीन में ऐमीनो अम्लों का अनुक्रम m-RNA में न्यूक्लियोटाइडों के अनुक्रम द्वारा निर्धारित होता है।

t-RNA, c-DNA अथवा r-RNA का अनुक्रम प्रोटीन संश्लेषण में ऐमीनो अम्ल अनुक्रम निर्धारित नहीं करता।

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एक जीन-एक एन्जाइम परिकल्पना किसके द्वारा प्रतिपादित की गई थी:

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(d) 'एक जीन-एक एन्जाइम' परिकल्पना बीडल और टैटम (1948) द्वारा दी गई थी, जिसके अनुसार कोई विशेष जीन किसी विशिष्ट एन्जाइम के संश्लेषण को नियंत्रित करता है। बाद में इसे यानोफ्स्की एवं सहयोगियों (1965) द्वारा 'एक जीन-एक पॉलीपेप्टाइड' परिकल्पना के रूप में संशोधित किया गया।

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किसी DNA अणु की प्रतिसमांतर (एंटीपैरेलल) रज्जुकों का अर्थ है कि:

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जे.डी. वाटसन तथा एफ.एच.सी. क्रिक (1953) ने दर्शाया कि DNA की संरचना द्विकुण्डलिनी होती है, जिसमें दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड शृंखलाएँ हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़ी रहती हैं तथा परस्पर विपरीत दिशाओं (प्रतिसमांतर) में चलती हैं। DNA अणु की प्रतिसमांतर रज्जुकों का अर्थ है कि दोनों DNA रज्जुकों के प्रारम्भ पर फॉस्फेट समूह विपरीत स्थिति (ध्रुव) पर होते हैं।

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निम्नलिखित में से जिस पादप का सम्पूर्ण जीनोमी अनुक्रम हाल ही में घोषित किया गया है, वह है

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वैज्ञानिकों ने दिसम्बर 2000 में किसी पादप का पहला आनुवंशिक अनुक्रम पूरा किया, जो खरपतवार Arabidopsis thaliana का था। इसे पादप जगत का Drosophila कहा जाता है।

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ओकाजाकी खंड DNA के वे भाग हैं जो

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ओकाजाकी खंड DNA प्रतिकृतिकरण के दौरान पश्चगामी रज्जुक पर बनने वाले छोटे DNA खंड हैं, जो बाद में जुड़कर DNA की एक सतत रज्जुक बना देते हैं।

पूरक DNA रज्जुकों के संश्लेषण में अग्रगामी रज्जुक सदैव 3’ से 5’ की ओर पढ़ा जाता है। इसका प्रतिसमांतर पूरक, अर्थात् पश्चगामी रज्जुक, 5’ से 3’ की ओर पढ़ा जाता है। चूँकि DNA की मूल रज्जुकें प्रतिसमांतर होती हैं और नई रज्जुक केवल 3’ सिरे (वरीय सिरे) से ही आरम्भ हो सकती है, अतः दूसरी रज्जुक को विपरीत दिशा में बढ़ना पड़ता है। पश्चगामी रज्जुक के असतत प्रतिकृतिकरण का परिणाम DNA के छोटे-छोटे खंडों की शृंखला है, जिन्हें ओकाजाकी खंड कहते हैं। इनकी खोज मूलतः रेइजी ओकाजाकी, उनकी पत्नी सुनेको ओकाजाकी तथा उनके सहयोगियों ने Escherichia coli में बैक्टीरियोफ़ेज DNA के प्रतिकृतिकरण के अध्ययन के दौरान की थी।

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यूकैरियोटों में अनुलेखन कहाँ होता है

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अनुलेखन वह प्रक्रम है जिसमें RNA पॉलिमरेज एन्जाइम द्वारा किसी DNA अनुक्रम की प्रतिलिपि बनाकर पूरक RNA उत्पन्न किया जाता है। अनुलेखन तीन चरणों में विभाजित है: प्रारम्भन, दीर्घीकरण तथा समापन। यूकैरियोटों में यह केन्द्रक में होता है और RNA अनुवादन हेतु कोशिकाद्रव्य में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

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निम्नलिखित में से कौन-सा बैंडन समूह पादप तथा जंतु दोनों के गुणसूत्रों के अभिरंजन में प्रयुक्त होता है?

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समूह बैंडन पादप तथा जंतु दोनों के गुणसूत्रों के अभिरंजन में प्रयुक्त होता है। गुणसूत्रों को ऐसे विशेष प्रतिदीप्त रंजकों से अभिरंजित किया जाता है जिनकी गुणसूत्र के भिन्न-भिन्न भागों के प्रति भिन्न बंधुता होती है। अभिरंजन की अनेक तकनीकें हैं जो भिन्न-भिन्न बैंडन प्रतिरूप दर्शाती हैं। C-बैंडन पादपों तथा जंतुओं दोनों में समान रूप से प्रयुक्त होता है। यह संघटक विषमक्रोमैटिन वाले क्षेत्र को अभिरंजित करता है।

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Frequently Asked Questions

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