दो यौगिक पेन्टाऐम्मीनसल्फेटोकोबाल्ट (III) ब्रोमाइड तथा पेन्टाऐम्मीनसल्फेटोकोबाल्ट (III) क्लोराइड निरूपित करते हैं :
(d) संकुल परस्पर किसी प्रकार के समावयवी नहीं हैं।
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दो यौगिक पेन्टाऐम्मीनसल्फेटोकोबाल्ट (III) ब्रोमाइड तथा पेन्टाऐम्मीनसल्फेटोकोबाल्ट (III) क्लोराइड निरूपित करते हैं :
(d) संकुल परस्पर किसी प्रकार के समावयवी नहीं हैं।
संकुल के विषय में सही कूट चुनिए :
(I) यौगिक का IUPAC नाम पेन्टाऐम्मीननाइट्राइटो-N-क्रोमियम(III) टेट्राक्लोरोज़िंकेट(II) है
(II) यह ज्यामितीय समावयवता दर्शाता है
(III) यह बंधनी समावयवता दर्शाता है
(IV) यह उपसहसंयोजन समावयवता दर्शाता है
(b) (I) IUPAC नाम पेन्टाऐम्मीननाइट्राइटो-N-क्रोमियम(III) टेट्राक्लोरोज़िंकेट(II) है
(II) यह ज्यामितीय समावयवता नहीं दर्शाता
(III) उभयदंतुक लिगेंड की उपस्थिति के कारण यह बंधनी समावयवता दर्शाता है
(IV) इसके उपसहसंयोजन समावयवी हैं :
धातु कार्बोनिलों की समइलेक्ट्रॉनी श्रेणी में CO बंध प्रबलता के बढ़ने का अपेक्षित क्रम है:
(b) CO बंध प्रबलता सहक्रियात्मक आबंधन में सम्मिलित पश्च दान की मात्रा के व्युत्क्रमानुपाती है, अर्थात्
धातु कार्बोनिलों के विषय में कौन सत्य नहीं है?
(d) CO को -अम्ल लिगेंड कहते हैं। धातु कार्बोनिल संकुलों में कार्बन से धातु के रिक्त कक्षक को एक इलेक्ट्रॉन युग्म का दान होता है और साथ ही एक पश्च -आबंधन बनता है, जो धातु के भरे कक्षक के CO के रिक्त प्रतिआबंधी कक्षक के साथ पार्श्व अतिव्यापन से बनता है
किसमें भिन्न हैं :
संकुल आयन [Fe(H2O)6]2+ तथा [Fe(CN)6]4- अपने रंग तथा चुंबकीय आघूर्ण में भिन्न हैं। [Fe(H2O)6]2+ हल्के हरे रंग का है तथा अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के कारण अनुचुंबकीय है, जबकि [Fe(CN)6]4- प्रतिचुंबकीय है तथा CN- लिगेंडों द्वारा प्रदत्त प्रबल लिगेंड क्षेत्र के कारण गहरे पीले रंग का है।
निम्नलिखित में से किस संकुल में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिकतम है?
(d)
द्वारा निम्नलिखित में से कौन-सी समावयवता दर्शाई जाती है?
(b) सिस तथा ट्रांस समावयवता दर्शाता है; सिस समावयवी प्रकाशिक रूप से सक्रिय है।
के लिए क्रमशः कितने ज्यामितीय समावयवी तथा त्रिविम समावयवी संभव हैं?
(b) ज्यामितीय समावयवियों की संख्या
= 3 तथा त्रिविम समावयवियों की संख्या इसके लिए
= 15+15
निम्नलिखित में से किसके दो त्रिविम समावयवी रूप होंगे?
(I) (II)
(III) (IV)
का IUPAC नाम है:
एक अम्ल है, लवण नहीं, अतः इसका नाम : हेक्साक्लोरोप्लैटिनिक (IV) अम्ल
जब भी हाइड्रोजन धनायन के रूप में उपस्थित हो, तो इसे लवण के स्थान पर अम्ल कहा जाता है।
अर्थात्
KNO2 को पोटैशियम नाइट्राइट कहते हैं
परन्तु HNO2 को हाइड्रोजन नाइट्राइट नहीं कहते, इसे नाइट्रस अम्ल कहते हैं।
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