Co-ordination Compounds NEET प्रश्न हिंदी में — रसायन विज्ञान (Chemistry) MCQ उत्तर सहित

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A[M(H2O)6]2+ संकुल सामान्यतः लगभग 600 nm पर अवशोषण करता है। इसे अमोनिया के साथ अभिक्रिया कराकर नया संकुल [M(NH3)6]2+ बनाया जाता है, जिसका अवशोषण होना चाहिए :

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(b) चूँकि NH3 अधिक प्रबल लिगेंड है H2O की तुलना में, अतः [M(NH3)6]2+ का CFSE मान > इसका CFSE [M(H2O)6]2+ अतः अवशोषण छोटी तरंगदैर्ध्य की ओर विस्थापित हो जाता है। साथ ही  NH3 तथा H2O की विपाटन क्षमता में अंतर बहुत अधिक नहीं है।

[(Cocl)6]4- संकुल के लिए CFSE 18000 cm-1 है।  का मान [(Cocl)4]2- के लिए होगा:

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(c) t=490 t for [CoCl4]2-=49×18000=8000 cm-1

निम्नलिखित में से अष्टफलकीय संकुलों के किस dn विन्यास का अस्तित्व उच्च चक्रण तथा निम्न चक्रण दोनों रूपों में नहीं हो सकता:

(I) d3  (II) d5  (III) d6  (IV) d8

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(c) जिन अष्टफलकीय संकुलों में धातु धनायन का विन्यास d3 तथा d8 होता है, उन्हें उच्च तथा निम्न चक्रण संकुलों के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता।

संकुल [Co(NH3)4CO3]ClO4 पर विचार कीजिए, जिसमें धातु की उपसहसंयोजन संख्या, ऑक्सीकरण संख्या तथा d-इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्रमशः हैं।

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(a) [CoIII(NH3)4CO3]+ClO4-,CO3- द्विदंतुक लिगेंड की तरह कार्य कर रहा है; उपसहसंयोजन संख्या है CoIII=6.

वह π-लिगेंड जो अपने संकुल यौगिक में सहक्रियात्मक आबंधन के दौरान अपने d-कक्षक का उपयोग करता है।

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(b) रिक्त अ-अक्षीय d-कक्षक MπPR3 पश्च आबंधन में अपने संकुलों में भाग लेता है।

मुक्त CO तथा [V(CO)6]- , [Cr(CO)6]- and [Mn(CO)6]- में उपस्थित CO की IR खिंचाव आवृत्तियाँ क्रमशः 2143 cm-1, 1860 cm-1,2000 cm-1 and 2090 cm-1 हैं। तब धातु कार्बोनिलों के विषय में सही कथन है :

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(a) धातु कार्बोनिलों में:

केंद्रीय धातु की ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था जितनी अधिक : ∝ C-O की बंध लंबाई

  : ∝ 1Bond order of CO

  : ∝ M-C बंध की बंध कोटि 

वह π-अम्ल लिगेंड जो अपने संकुल यौगिक में सहक्रियात्मक आबंधन के दौरान अपने d-कक्षक का उपयोग करता है:

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(b) PR3 में P-परमाणु पर रिक्त परमाण्विक d-कक्षक होता है, जो सहक्रियात्मक आबंधन में भाग ले सकता है।

दिए गए यौगिकों में CO बंध कोटि का सही क्रम है:

(P) Fe(CO)5   (Q) CO    (R) H3BCO  (S) [Mn(CO)5]+

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  CO बंध कोटि ∝ 1Extent of back bonding (MCO)

CO बंध कोटि का सही क्रम :

 

 CO की उपस्थिति में प्रभावी विन्यास  

 
CO में C के रिक्त कक्षक के साथ पश्च आबंधन हेतु तीन एकाकी युग्म। 
 
 CO की उपस्थिति में प्रभावी विन्यास= 
 
CO के साथ पश्च आबंधन हेतु चार एकाकी युग्म। 

H3BCO(CO bond order >3.0)>COB.O.=3.0>[Mn(CO)5]+(CO bond order<3.0) >Fe(CO)5

निम्नलिखित में से किस संकुल आयन में चुंबकीय आघूर्ण (केवल चक्रण) का मान 3

BM है तथा संकरण में बाह्य d-कक्षकों का उपयोग होता है।

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(d) [Mn(CN)6]4-II : संकरण  :d2sp3,μeff=3BM

 [Fe(NH3)6]3+III: Hyb.: d2sp3, μeff=3BM

[Co(CO)4]:Hyb: dsp2, μeff=3BM

[Cu(H2O)6]2+ :  Hyb. :sp3d2, μeff=3BM

वह आंतरिक कक्षक संकुल जो ज्यामितीय तथा ध्रुवण दोनों प्रकार की समावयवता दर्शाता है।

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(d) [Cr(en)3]3+; संकरण : d2sp3; ज्यामितीय समावयवता नहीं दर्शाता परन्तु ध्रुवण समावयवता दर्शाता है।

[IrF3(H2O)2(NH3)] ; संकरण :d2sp3; ज्यामितीय समावयवता दर्शाता है परन्तु ध्रुवण समावयवता नहीं दर्शाता।

[NiCl2(en)2] ; संकरण :sp3d2; ज्यामितीय तथा ध्रुवण दोनों समावयवता दर्शाता है।

[Co(CN)2(ox)2]3-; संकरण :d2sp3; ज्यामितीय तथा ध्रुवण दोनों समावयवता दर्शाता है।

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Frequently Asked Questions

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