D & F Block Elements NEET प्रश्न हिंदी में — रसायन विज्ञान (Chemistry) MCQ उत्तर सहित

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नर्न्स्ट समीकरण के अनुसार, इलेक्ट्रोड अभिक्रिया M$^{n+}$(aq) + ne$^{-}$ $\to$ M(s) के लिए, यदि M$^{n+}$ आयनों की सांद्रता घटाई जाए, तो इलेक्ट्रोड विभव (E):

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दी गई अभिक्रिया के लिए नर्न्स्ट समीकरण है: E = E$^{\text{o}}$ - RT/nF ln(1/[M$^{n+}$])। यदि सांद्रता [M$^{n+}$] घटती है, तो 1/[M$^{n+}$] बढ़ता है। चूँकि पद -RT/nF ln(1/[M$^{n+}$]) को E$^{\text{o}}$ से घटाया जाता है, ln(1/[M$^{n+}$]) में वृद्धि से अधिक ऋणात्मक मान घटाया जाएगा, जिससे इलेक्ट्रोड विभव (E) में कमी होगी। यह अधिक ऋणात्मक या कम धनात्मक हो जाएगा।

सेल के मानक इलेक्ट्रोड विभव (E$^{\text{o}}_{\text{cell}}$) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

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पाठ कहता है, 'सेल का मानक विभव कैथोड और ऐनोड के मानक विभवों का अंतर लेकर प्राप्त किया जा सकता है (E$^{\text{o}}_{\text{cell}}$ = E$^{\text{o}}_{\text{cathode}}$ – E$^{\text{o}}_{\text{anode}}$)'। स्वतःस्फूर्त अभिक्रिया के लिए E$^{\text{o}}_{\text{cell}}$ धनात्मक होना चाहिए, और $\Delta_{\text{r}}G^{\text{o}}$ ऋणात्मक होना चाहिए ($\Delta_{\text{r}}G^{\text{o}}$ = -nFE$^{\text{o}}_{\text{cell}}$)।

अर्ध-सेल अभिक्रिया पर विचार करें: V$^{3+}$ + e$^{-}$ $\to$ V$^{2+}$ जिसके लिए E$^{\text{o}}$ = -0.26 V। यह दर्शाता है कि:

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ऋणात्मक E$^{\text{o}}$ V$^{3+}$ के V$^{2+}$ में अपचयन के लिए (-0.26 V) का अर्थ है कि V$^{3+}$ आसानी से अपचयित नहीं होता, या इसके विपरीत, V$^{2+}$ आसानी से ऑक्सीकृत होता है। तथापि, पाठ उल्लेख करता है 'V के लिए अपेक्षाकृत कम मान V$^{2+}$ के स्थायित्व (अर्ध-पूर्ण t$_{2g}$ स्तर) से संबंधित है'। ऋणात्मक E$^{\text{o}}$ का अर्थ है कि विपरीत अभिक्रिया (V$^{2+}$ का V$^{3+}$ में ऑक्सीकरण) अपेक्षाकृत अनुकूल है। V$^{2+}$ का स्थायित्व इसे ऑक्सीकृत होने के प्रति अनिच्छुक बनाएगा। प्रश्न और संदर्भ के आधार पर पुनर्मूल्यांकन करने पर, ऋणात्मक E$^{\text{o}}$ का अर्थ है कि V$^{3+}$ वास्तव में H$^+$ से अपचयित करना कठिन है, और इसलिए प्रबल ऑक्सीकारक नहीं है। इसकी विपरीत अभिक्रिया V$^{2+}$ $\to$ V$^{3+}$ + e$^{-}$ है जिसके लिए E$^{\text{o}}$ = +0.26 V। यह धनात्मक विभव दर्शाता है कि V$^{2+}$ आसानी से ऑक्सीकृत होगा, अर्थात V$^{2+}$ अच्छा अपचायक है, या यह विशेष रूप से स्थायी नहीं है और इलेक्ट्रॉन खोने की प्रवृत्ति रखता है। तथापि, संदर्भ कहता है कि V के लिए 'कम मान' (ऋणात्मक) (M$^{3+}$/M$^{2+}$ के संदर्भ में) V$^{2+}$ के स्थायित्व के कारण है। अतः विकल्प 4 पाठ की प्रत्यक्ष व्याख्या से मेल खाता है, अर्थात V$^{2+}$ इलेक्ट्रॉन विन्यास के कारण अपेक्षाकृत स्थायी है, इसलिए इसके ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति सरल प्रवृत्ति से अपेक्षित से कम है, जिससे V$^{3+}$ से V$^{2+}$ अपचयन के लिए ऋणात्मक विभव होता है।

निम्नलिखित में से कौन-सा मानक गिब्स ऊर्जा ($\Delta_{\text{r}}G^{\text{o}}$) और मानक सेल विभव (E$^{\text{o}}_{\text{cell}}$) के बीच संबंध का वर्णन करता है?

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सारांश स्पष्ट रूप से कहता है: 'सेलों के मानक विभव सेल में होने वाली अभिक्रिया की मानक गिब्स ऊर्जा ($\Delta_{\text{r}}G^{\text{o}}$ = – nF E$^{\text{o}}_{\text{cell}}$) और साम्य स्थिरांक ($\Delta_{\text{r}}G^{\text{o}}$ = – R T ln K) से संबंधित हैं।'

अर्ध-सेल में प्लैटिनम (Pt) जैसे अक्रिय इलेक्ट्रोड का उपयोग होता है। इसका प्राथमिक कार्य क्या है?

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पाठ समझाता है: 'कभी-कभी प्लैटिनम या सोने जैसी धातुओं का अक्रिय इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोग होता है। वे अभिक्रिया में भाग नहीं लेते परंतु ऑक्सीकरण या अपचयन अभिक्रियाओं और इलेक्ट्रॉनों के चालन के लिए अपनी सतह प्रदान करते हैं।'

मानक इलेक्ट्रोड विभव (E$^{\text{o}}$) Sc$^{3+}$/Sc के लिए तालिका 4.2 में क्यों सूचीबद्ध नहीं है?

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पाठ कहता है, 'Sc के लिए कम मान (E$^{\text{o}}$ (M$^{3+}$/M$^{2+}$) के संदर्भ में, उन तत्वों के लिए जो M$^{2+}$ बना सकते हैं) Sc$^{3+}$ के स्थायित्व को दर्शाता है जिसका उत्कृष्ट गैस विन्यास है।' Sc$^{3+}$ अत्यंत स्थायी है और निम्न ऑक्सीकरण अवस्था (या धातु) में अपचयित करना कठिन है, जिससे Sc$^{3+}$/Sc का मानक विभव, मानक M$^{2+}$/M विभवों के संदर्भ में, अप्रासंगिक हो जाता है या इसका अर्थ है कि Sc$^{2+}$ आसानी से नहीं बनता या अपचयित नहीं होता।

यदि किसी अपचयन अभिक्रिया के लिए E$^{\text{o}}$ धनात्मक है, तो यह अपचयित होने वाली स्पीशीज़ के बारे में क्या दर्शाता है?

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अपचयन अर्ध-अभिक्रिया के लिए धनात्मक E$^{\text{o}}$ (जैसे Ag$^{+}$ + e$^{-}$ $\to$ Ag, E$^{\text{o}}$ = +0.80V) दर्शाता है कि अपचयित होने वाली स्पीशीज़ (इस स्थिति में Ag$^{+}$) में इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर अपचयित होने की प्रबल प्रवृत्ति है। जो स्पीशीज़ आसानी से इलेक्ट्रॉन स्वीकार कर अपचयित होती है वह प्रबल ऑक्सीकारक है।

ऐक्टिनॉइड संकुचन के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?

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तथापि, इस शृंखला में तत्व से तत्व तक संकुचन अधिक है, जो 5f इलेक्ट्रॉनों द्वारा दुर्बल परिरक्षण से उत्पन्न होता है। यह कथन कि 5f इलेक्ट्रॉनों द्वारा अधिक प्रभावी परिरक्षण के कारण ऐक्टिनॉइड संकुचन लैंथेनॉइड संकुचन से अधिक महत्वपूर्ण है, गलत है। संदर्भ कहता है कि 'तथापि, इस शृंखला में तत्व से तत्व तक संकुचन अधिक है, जो 5f इलेक्ट्रॉनों द्वारा दुर्बल परिरक्षण से उत्पन्न होता है।' इसका तात्पर्य है कि कारण दुर्बल परिरक्षण है, प्रभावी परिरक्षण नहीं, और यद्यपि प्रति तत्व संकुचन अधिक है, समग्र महत्व प्रायः लैंथेनॉइड संकुचन के परवर्ती तत्वों पर प्रभाव को दिया जाता है, जैसा कहा गया है: 'लैंथेनॉइड संकुचन अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि...'

NCERT पाठ में उल्लिखित अनुसार, अर्ध-पूरित 5f कक्षक के स्थायित्व के कारण ऐक्टिनॉइडों में निम्नलिखित में से किस तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अनियमित है?

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पाठ कहता है: 'ऐक्टिनॉइडों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों की अनियमितताएँ, लैंथेनॉइडों की तरह, 5f कक्षकों के $f^0$, $f^7$ और $f^{14}$ अधिभोगों के स्थायित्व से संबंधित हैं। इस प्रकार, Am और Cm के विन्यास [Rn] $5f^7 7s^2$ और [Rn] $5f^7 6d^1 7s^2$ हैं।' ऐमेरिशियम (Am) स्पष्ट रूप से $5f^7$ विन्यास दर्शाता है, जो अर्ध-पूरित कक्षक के कारण स्थायित्व का संकेत है।

लैंथेनॉइडों की तुलना में ऐक्टिनॉइड ऑक्सीकरण अवस्थाओं का अधिक विस्तृत परास दर्शाते हैं। इसका मुख्य कारण है:

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पाठ कहता है: 'ऑक्सीकरण अवस्थाओं का अधिक विस्तृत परास है, जिसका कारण आंशिक रूप से यह तथ्य है कि 5f, 6d और 7s स्तरों की ऊर्जाएँ तुलनीय हैं।' इससे बंधन में अधिक इलेक्ट्रॉनों की भागीदारी संभव होती है।

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Frequently Asked Questions

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