यौगिक $X (C_5H_8 ) $ अमोनियामय $ AgNO_3 $ के साथ अभिक्रिया करके श्वेत अवक्षेप देता है तथा गर्म क्षारीय $KMnO_4 $ के साथ ऑक्सीकरण पर अम्ल $( CH_3)_2 CHCOOH $ देता है, अतः X है
प्रश्न-76 के अनुसार
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यौगिक $X (C_5H_8 ) $ अमोनियामय $ AgNO_3 $ के साथ अभिक्रिया करके श्वेत अवक्षेप देता है तथा गर्म क्षारीय $KMnO_4 $ के साथ ऑक्सीकरण पर अम्ल $( CH_3)_2 CHCOOH $ देता है, अतः X है
प्रश्न-76 के अनुसार
कौन-सा अभिकर्मक ब्यूट-1-आइन तथा ब्यूट-2-आइन में विभेद करता है
$ Ag( NH_3)_2 ]^+ 1- $ के साथ ऐल्काइन अभिक्रिया देगा जबकि 2- ऐल्काइन अभिक्रिया नहीं देगा
बेंज़ीन $ CH_3COCl$ के साथ $ AlCl_3 $ की उपस्थिति में अभिक्रिया करके देता है
जब बेंज़ीन ऐसीटिल क्लोराइड (CH₃COCl) के साथ ऐलुमिनियम क्लोराइड (AlCl₃) की उपस्थिति में अभिक्रिया करता है, तो वह फ्रीडेल-क्राफ्ट्स ऐसिलीकरण अभिक्रिया से गुजरता है। यह अभिक्रिया बेंज़ीन वलय में ऐसीटिल समूह (COCH₃) प्रविष्ट कराती है, जिससे ऐसीटोफीनोन (C₆Hâ‚…COCH₃) बनता है।
$ KMnO_4/ H ^+m $ के साथ ऑक्सीकरण पर - ज़ाइलीन बनाता है
निम्नलिखित यौगिकों में C-C बंध लंबाई का घटता क्रम है $ (I) C_2H_4 (II) C_2H_2 (III) C_6H_6 (IV) C_2H_6 $
$ Bond length \alpha 1/ Bondorder there for bond length in$
अभिकथन तथा कारण प्रकार के प्रश्न। निर्देश:- निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न में अभिकथन(A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। A : $CH_4$ अंधकार में $Cl_2$ के साथ अभिक्रिया नहीं करता R : $CH_4$ का क्लोरीनीकरण सूर्य के प्रकाश में होता है
सही व्याख्या :- $ CH_4 $ का क्लोरीनीकरण मुक्त मूलक अभिक्रिया है तथा मुक्त मूलक सूर्य के प्रकाश में प्राप्त होते हैं।
सांद्र H2SO4 तथा HNO3 के मिश्रण द्वारा बेंजीन के नाइट्रीकरण पर विचार कीजिए। यदि इस मिश्रण में KHSO4 की बड़ी मात्रा मिला दी जाए, तो नाइट्रीकरण का वेग होगा
(a) सांद्र H2SO4 तथा HNO3 की उपस्थिति में बेंजीन के नाइट्रीकरण में, नाइट्रोबेंजीन बनता है।
HNO3 + H2SO4 => NO2++ HSO4 -+ H2O
इलेक्ट्रॉनरागी नाभिकरागी
यदि इस मिश्रण में KHSO4 की बड़ी मात्रा मिलाई जाए, तो अधिक HSO4 आयन उपलब्ध होते हैं और इसलिए NO2, अर्थात् इलेक्ट्रॉनरागी की सांद्रता घट जाती है।
इलेक्ट्रॉनरागी की सांद्रता घटने पर, इलेक्ट्रॉनरागी ऐरोमैटिक अभिक्रिया का वेग धीमा हो जाता है।
फ्रीडल-क्राफ्ट्स एल्किलीकरण में, AlCl3 के अतिरिक्त अन्य अभिकारक हैं
फ्रीडल-क्राफ्ट्स एल्किलीकरण: जब बेंज़ीन, निर्जल AlCl3 की उपस्थिति में एल्किल हैलाइड के साथ अभिक्रिया करता है, तो टॉलूईन प्राप्त होता है। इसे फ्रीडल-क्राफ्ट्स एल्किलीकरण कहा जाता है। फ्रीडल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन का एक प्रकार है।
C6H6 + CH3Cl C6H5CH3 + HCl
टॉलूईन
प्रोपीन, CH3-CH=CH2 को ऑक्सीकरण द्वारा 1-प्रोपेनॉल में परिवर्तित किया जा सकता है। बताइए कि उपरोक्त रूपांतरण को प्रभावी बनाने के लिए निम्नलिखित में से कौन सा अभिकर्मक समूह आदर्श है?
यहाँ, आधा मोल (B2H6) डाइबोरेन, मार्कोनिकॉफ योग द्वारा प्रोपीन के साथ अभिक्रिया करके ट्राइप्रोपाइल बोरेन देता है, जिसे हाइड्रोबोरेशन कहा जाता है। क्षारीय माध्यम में H2O2 की उपस्थिति में ट्राइप्रोपाइल बोरेन एल्कोहॉल देता है। ध्यान रहे कि उत्पाद ऐंटी-मार्कोनिकॉफ नियम के अनुसार अर्थात् 1-प्रोपेनॉल होता है। यह अभिक्रिया हाइड्रोबोरेशन ऑक्सीकरण कहलाती है।
परॉक्साइड की उपस्थिति में HBr की प्रोपीन के साथ अभिक्रिया देती है
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