साइक्लोहेक्सेन तथा साइक्लोहेक्सीन में विभेद करने के लिए एक सरल परीक्षण बताइए :
(d) (a) तथा (b) ऐल्कीन के लिए परीक्षण हैं।
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साइक्लोहेक्सेन तथा साइक्लोहेक्सीन में विभेद करने के लिए एक सरल परीक्षण बताइए :
(d) (a) तथा (b) ऐल्कीन के लिए परीक्षण हैं।
अभिक्रियाओं के निम्नलिखित क्रम में Z की पहचान कीजिए,
HBr/H2O2
CH3CH2CH=CH2→Y
C2H5ONA→Z
HBr/H2O2
CH3CH2CH=CH2→CH3CH2CH2CH2Br
प्रति-मार्कोनिकॉफ नियम
C2H5ONa
CH3CH2CH2CH2Br→CH3CH2CH2CH2OC2H5
SN2 अभिक्रिया
निम्नलिखित में से किस कार्बनिक यौगिक का संकरण उसके दहन उत्पाद -(CO2) के समान है?
एथाइन (C2H2) में दो कार्बन परमाणु sp संकरित होते हैं, ठीक वैसे ही जैसे CO2 में। अन्य विकल्पों के कार्बन परमाणुओं की संकरण अवस्थाएँ भिन्न हैं।
नाइट्रोबेन्ज़ीन की सांद्र HNO3/H2SO4 के साथ 80-100°C पर अभिक्रिया से निम्नलिखित में से कौन-सा उत्पाद बनता है?
निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया आसानी से नहीं करेगा?
नाइट्रो समूह इलेक्ट्रॉन-आकर्षी होने के कारण बेन्ज़ीन नाभिक को इस सीमा तक निष्क्रियित कर देता है कि वह फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया देने में असमर्थ हो जाता है।
नाइट्रोबेन्ज़ीन, फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया के प्रति अपनी अक्रियाशीलता के कारण, इस अभिक्रिया के लिए विलायक के रूप में प्रयुक्त होता है।
द्रव हाइड्रोकार्बनों को गैसीय हाइड्रोकार्बनों के मिश्रण में बदला जा सकता है:-
मुख्य विचार निम्न हाइड्रोकार्बन गैसीय अवस्था में रहते हैं जबकि उच्च हाइड्रोकार्बन द्रव या ठोस अवस्था में। भंजन या तापीय अपघटन पर उच्च अणुभार वाला हाइड्रोकार्बन निम्न अणुभार वाले हाइड्रोकार्बनों का मिश्रण देता है। अतः कहा जा सकता है कि भंजन द्वारा द्रव हाइड्रोकार्बन को गैसीय हाइड्रोकार्बनों के मिश्रण में बदला जा सकता है।
नाइट्रोबेन्ज़ीन को बेन्ज़ीन से सांद्र HNO3 तथा सांद्र H2SO4 के मिश्रण का उपयोग करके बनाया जा सकता है। इस मिश्रण में नाइट्रिक अम्ल कार्य करता है:
मुख्य विचार प्रोटॉन दाता अम्ल तथा प्रोटॉन ग्राही क्षार होते हैं।
सांद्र H2SO4 तथा सांद्र HNO3 निम्नलिखित प्रकार से अभिक्रिया करते हैं:
अतः इस अभिक्रिया में HNO3 क्षार की भाँति तथा H2SO4 अम्ल की भाँति कार्य करता है।
बेन्ज़ीन, CH3Cl के साथ निर्जल AlCl3 की उपस्थिति में अभिक्रिया करके बनाता है।
फ्रीडेल-क्राफ्ट ऐल्किलन अभिक्रिया में बेन्ज़ीन, मेथिल क्लोराइड (CH3Cl) जैसे ऐल्किल हैलाइड के साथ लूइस अम्ल उत्प्रेरक (निर्जल AlCl3) की उपस्थिति में अभिक्रिया करके ऐल्किलित उत्पाद टॉलूईन बनाता है।
इलेक्ट्रॉनरागी अभिकर्मक के प्रति घटती हुई क्रियाशीलता का क्रम, निम्नलिखित के लिए:-
(i) बेन्ज़ीन
(ii) टॉलूईन
(iii) क्लोरोबेन्ज़ीन
(iv) फीनॉल
होगा:-
सक्रियकारी समूह (जैसे OH, R आदि) युक्त बेन्ज़ीन, स्वयं बेन्ज़ीन की तुलना में इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन बहुत आसानी से करता है। अतः टॉलूईन (C6H5CH3 ), फीनॉल (C6H5OH) बेन्ज़ीन की तुलना में इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन बहुत सरलता से करते हैं। क्लोरीन +E तथा +M प्रभाव रखते हुए भी प्रबल -I प्रभाव के कारण वलय को निष्क्रियित करती है। अतः क्लोरोबेन्ज़ीन में प्रतिस्थापन बेन्ज़ीन की तुलना में कठिन है, इसलिए सही क्रम है:-
फीनॉल>टॉलूईन>बेन्ज़ीन>क्लोरोबेन्ज़ीन
(iv) (ii) (i) (iii)
इस अभिक्रिया के लिए सर्वाधिक संभावित क्रियाविधि है-
प्रबल क्षारीय माध्यम सामान्यतः E 2 क्रियाविधि देता है।
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