इलेक्ट्रोफाइल हैं:
(a) इलेक्ट्रोफाइल इलेक्ट्रॉन-न्यून स्पीशीज़ हैं जो कार्बऋणायन के साथ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म साझा कर सकते हैं और इसलिए इन्हें लुईस अम्ल कहा जाता है।
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इलेक्ट्रोफाइल हैं:
(a) इलेक्ट्रोफाइल इलेक्ट्रॉन-न्यून स्पीशीज़ हैं जो कार्बऋणायन के साथ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म साझा कर सकते हैं और इसलिए इन्हें लुईस अम्ल कहा जाता है।
न्यूक्लियोफाइल हैं:
(c) न्यूक्लियोफाइल इलेक्ट्रॉन-समृद्ध स्पीशीज़ हैं और कार्बधनायन अथवा किसी भी धनात्मक केंद्र को एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म दान कर सकते हैं।
C2H6 में C-H बंध की सिग्मा बंध ऊर्जा है:
(a)
सिग्मा बंध किन्हीं भी दो परमाणुओं के बीच बनने वाला पहला बंध होता है। ... C2H6 में C-H बंध ऊर्जा 99 किलोकैलोरी अथवा 413 kJ/mol है
निम्नलिखित में से कौन सबसे प्रबल न्यूक्लियोफाइल है?
(d) न्यूक्लियोफिलिसिटी का क्रम उस एल्किल समूह 'R' की प्रकृति पर निर्भर करता है जिस पर न्यूक्लियोफाइल आक्रमण करता है, साथ ही विलायक की प्रकृति पर भी। परंतु, यदि ये समान हों, तो जो जितना दुर्बल अम्ल होगा, वह उतना ही प्रबल क्षारक होगा, अर्थात् उतनी ही अधिक न्यूक्लियोफिलिसिटी होगी। यह अम्लीय गुण है:
HI > HBr > HCl > HCN > H2O > EtOH
अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) में सम्मिलित परमाणु है:
अतिसंयुग्मन में, किसी अणु अथवा आयन का स्थायीकरण निकटवर्ती C-H σ बंध से इलेक्ट्रॉनों के किसी रिक्त अथवा आंशिक भरे p-कक्षक में विस्थानीकरण (delocalization) द्वारा प्राप्त होता है। अतः अतिसंयुग्मन में α-H परमाणु सम्मिलित होता है।
2,3-डाइमेथिल ब्यूट-2-ईन का स्थायित्व 2-ब्यूटीन से अधिक है। इसे निम्नलिखित के संदर्भ में समझाया जा सकता है:
पहले में 12 α-H परमाणु होते हैं जबकि दूसरे में छह α-H परमाणु होते हैं। α-H परमाणुओं की संख्या जितनी अधिक होगी, विस्थानीकरण उतना ही अधिक होगा और स्थायित्व भी उतना ही अधिक होगा।
अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) की अवधारणा किसने प्रस्तुत की?
(a)
जिन रसायनज्ञों ने 1975 से पहले के युग में भौतिक कार्बनिक रसायन विज्ञान में अपना प्रशिक्षण प्राप्त किया, वे शायद बेकर-नेथन प्रभाव को याद करते हैं। बेकर तथा उनके सहयोगी नेथन ने अतिसंयुग्मन का पहला उदाहरण माने जाने वाला प्रभाव खोजा।
(CH3)4N+ न तो इलेक्ट्रोफाइल है और न ही न्यूक्लियोफाइल है क्योंकि यह:
इस तथ्य को ध्यान में रखें।
निम्नलिखित में से कौन एक इलेक्ट्रोफिलिक अभिकर्मक है?
(b)
BF3 एक इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिक है। इसके चारों ओर 8 इलेक्ट्रॉनों के स्थान पर 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं
+I.E. (प्रेरणिक प्रभाव) निम्नलिखित द्वारा दर्शाया जाता है:
(a) -CH3 एक इलेक्ट्रॉन-विकर्षी समूह है
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