BaSO4, रोज़नमुंड अभिक्रिया में Pd के लिए .... का कार्य करता है:
(b) यदि BaSO4 का उपयोग न किया जाए तो अभिक्रिया से ऐल्कोहॉल प्राप्त होगा। BaSO4, Pd की सक्रियता को मंद कर देता है।
RCOCl RCHO
RCOClRCHORCH2OH
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BaSO4, रोज़नमुंड अभिक्रिया में Pd के लिए .... का कार्य करता है:
(b) यदि BaSO4 का उपयोग न किया जाए तो अभिक्रिया से ऐल्कोहॉल प्राप्त होगा। BaSO4, Pd की सक्रियता को मंद कर देता है।
RCOCl RCHO
RCOClRCHORCH2OH
किसी रासायनिक अभिक्रिया के दौरान उत्प्रेरक मिलाने से निम्नलिखित में से कौन-सी राशि बदल जाती है?
एंजाइम उत्प्रेरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
अधिकांश एंजाइम प्रोटीन प्रकृति के होते हैं। ये अत्यधिक विशिष्ट होते हैं तथा उच्च ताप या UV किरणों द्वारा विकृतीकृत हो जाते हैं। इष्टतम ताप पर, जो सामान्यतः 25°-35°C के बीच होता है, एंजाइम की सक्रियता अधिकतम होती है।
किसी ठोस पर गैस के अधिशोषण के लिए log x/m तथा log p के बीच खींचा गया आलेख एक सरल रेखा देता है जिसकी ढाल है:-
400K पर उत्प्रेरक की उपस्थिति में किसी अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा 0.8 kcal घट जाती है। अतः दर होगी
अभिकथन : भौतिक तथा रासायनिक अधिशोषण ताप में वृद्धि पर भिन्न-भिन्न प्रतिक्रिया दर्शाते हैं।
कारण : रासायनिक अधिशोषण के लिए कुछ सक्रियण ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
(A). भौतिक तथा रासायनिक अधिशोषण ताप में वृद्धि पर भिन्न प्रतिक्रिया दर्शाते हैं, क्योंकि
रासायनिक अधिशोषण के लिए कुछ सक्रियण ऊर्जा चाहिए। अतः निम्न ताप पर यह बहुत कम होता है
परंतु ताप बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है। उच्च ताप पर यह घटने लगता है क्योंकि
अधिशोष्य के अणु अधिक गतिज ऊर्जा प्राप्त कर लेते हैं और अधिशोषक की सतह
छोड़ने में समर्थ हो जाते हैं। जबकि भौतिक अधिशोषण ताप बढ़ने के साथ घटता है।
अभिकथन : उत्प्रेरक सामान्यतः सूक्ष्म विभाजित चूर्ण के रूप में होता है।
कारण : किसी ठोस के कण जितने सूक्ष्म होंगे, उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल उतना ही अधिक होगा।
(A). उत्प्रेरक सामान्यतः सूक्ष्म विभाजित चूर्ण के रूप में होता है, क्योंकि ठोस के कण जितने सूक्ष्म होंगे,
उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल उतना ही अधिक होगा। अधिक पृष्ठ से सतह पर अभिकारक अणुओं का
अधिशोषण अधिक होता है। परिणामस्वरूप अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है।
निम्नलिखित समीकरण निकैल के शोधन की एक विधि को दर्शाता है,
Ni + 2CO Ni(CO)4 Ni +4CO यह विधि है:
अशुद्ध शुद्ध
(b) Ni के शोधन के लिए मॉन्ड प्रक्रम का उपयोग किया जाता है।
रक्त के हीमोग्लोबिन में होता है:
निम्नलिखित समीकरण शोधन की किस विधि को दर्शाता है?
Ti(s) + 2I2(g) TiI4(g) Ti(s) + 2I2(g)
(c) यह Ti के शोधन की वान-आर्केल विधि है।
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