(c) मुख्य विचार
(i) इलेक्ट्रॉन-आकर्षी प्रतिस्थापी की उपस्थिति क्षारकता घटाती है, जबकि इलेक्ट्रॉन-दाता प्रतिस्थापी जैसे -CH3, -C2H5 आदि की उपस्थिति अम्लता बढ़ाती है।
(ii) HNO2, ऐलिफैटिक ऐमीन के -NH2 समूह को -OH में बदलता है, जबकि ऐरोमैटिक ऐमीनों के समूह को -N=NCl में।
चूँकि फेनिल समूह इलेक्ट्रॉन-आकर्षी समूह है, यह क्षारकता घटाता है। दूसरी ओर ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन-दाता होने के कारण क्षारकता बढ़ाता है। अतः ऐल्किल ऐमीन ऐरिल ऐमीनों तथा अमोनिया दोनों की तुलना में अधिक क्षारकीय हैं।
अतः HNO2 (नाइट्रस) ऐल्किल ऐमीनों को ऐल्कोहॉलों में बदलता है।
परंतु ऐरिल ऐमीन नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया करके डाइऐजोनियम लवण बनाते हैं।
ताप पर
अतः HNO2 ऐरिल ऐमीनों को फिनॉल में नहीं बदलता।