Ni(CN)2 का अमोनियामय विलयन C6H6 के साथ अभिक्रिया करके हल्के बैंगनी रंग का क्रिस्टलीय यौगिक बनाता है, जिसका सूत्र है:
रसायन विज्ञान (Chemistry) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास
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अभिक्रिया, कहलाती है:
(b) बेंजीन डाइऐजोनियम क्लोराइड में N2Cl का CuX-HX के हैलोजन परमाणु द्वारा प्रतिस्थापन सैंडमेयर अभिक्रिया कहलाता है।
जब नाइट्रोबेंजीन को Br2 के साथ FeBr3 की उपस्थिति में अभिकृत किया जाता है, तो मुख्य उत्पाद m-ब्रोमोनाइट्रोबेंजीन बनता है। m-समावयवी प्राप्त होने से संबंधित कथन हैं:
(a) बेंजीन नाभिक में m-निर्देशक समूहों की उपस्थिति केवल o- तथा p- पर इलेक्ट्रॉन घनत्व घटाती है, जबकि m-स्थिति पर इलेक्ट्रॉन घनत्व में कोई परिवर्तन नहीं देखा जाता।
विलयन में N मूलक की उपस्थिति का पता लगाया जा सकता है:
+7KI + K+ + 3H2O.
पोटैशियम थायोसायनेट विलयन फेरिक क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करके देता है:
जब पोटैशियम थायोसायनेट (KSCN) विलयन फेरिक क्लोराइड (FeCl3) के साथ अभिक्रिया करता है, तो रक्त-लाल रंग का संकुल आयन [Fe(SCN)]2+ बनता है, जिसे थायोसायनेट आयन कहते हैं। इस अभिक्रिया का उपयोग Fe3+ आयनों के परीक्षण के रूप में किया जाता है तथा इसे प्रशियन ब्लू परीक्षण कहते हैं।
एक कार्बनिक यौगिक X (अणुसूत्र C6H5O2N) में एक वलय तंत्र में 6 कार्बन, तीन द्विबंध तथा प्रतिस्थापी के रूप में एक नाइट्रो समूह है। X है:
दिए गए कार्बनिक यौगिक, जिसका अणुसूत्र C6H5O2N है, में एक वलय तंत्र में 6 कार्बन परमाणु, तीन द्विबंध तथा प्रतिस्थापी के रूप में एक नाइट्रो समूह (-NO2) है। यह यौगिक नाइट्रोबेंजीन है, जो समचक्रीय (वलय में केवल कार्बन परमाणु) तथा ऐरोमैटिक दोनों है।
ऐसीटैमाइड को मेथेनऐमीन में बदलने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया उपयुक्त है?
हॉफमान ब्रोमैमाइड अभिक्रिया ऐमाइड को ऐल्किलऐमीन में बदलने की एक विधि है। इसमें ऐमाइड को ब्रोमीन तथा फिर ऐल्कॉक्साइड क्षारक के साथ अभिकृत किया जाता है, तथा ऐसीटैमाइड को मेथेनऐमीन में बदलने के लिए यही उपयुक्त अभिक्रिया है।
ऐरिलऐमीनों की क्षारकता के विषय में सही कथन है
ऐरिलऐमीन सामान्यतः ऐल्किलऐमीनों की तुलना में कम क्षारकीय होते हैं, क्योंकि ऐरिलऐमीनों में नाइट्रोजन के एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉन ऐरोमैटिक वलय के Ï€-इलेक्ट्रॉन तंत्र के साथ अन्योन्यक्रिया द्वारा विस्थानीकृत हो जाते हैं, जिससे नाइट्रोजन परमाणु प्रोटॉनन के लिए कम उपलब्ध रहता है तथा क्षारकता घट जाती है।
प्रबल अम्लीय माध्यम में नाइट्रोबेंजीन का वैद्युत अपचयन उत्पन्न करता है
वह विधि जिससे ऐनिलीन नहीं बनाया जा सकता, है
क्लोरोबेंजीन में अनुनाद के कारण C-Cl बंध द्विबंध लक्षण प्राप्त कर लेता है, अतः C-Cl बंध नाभिकरागी (थैलिमाइड आयन) के प्रति निष्क्रिय है।
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