रसायन विज्ञान (Chemistry) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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p-कक्षकों के लिए त्रिज्य नोडों की संख्या और मुख्य क्वांटम संख्या (n) के बीच क्या संबंध है?

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NCERT पाठ में कहा गया है, 'नोडों की संख्या n–2 द्वारा दी जाती है, अर्थात 3p कक्षक के लिए त्रिज्य नोडों की संख्या 1, 4p कक्षक के लिए दो, इत्यादि है।' यह सूत्र विशेष रूप से p-कक्षकों (जहाँ l=1) के त्रिज्य नोडों के लिए है। त्रिज्य नोडों का सामान्य सूत्र $n-l-1$ है, इसलिए p कक्षकों के लिए यह $n-1-1 = n-2$ है।

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मैक्स बॉर्न के अनुसार, किसी बिंदु पर तरंग फलन का वर्ग ($ψ^2$) क्या दर्शाता है?

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NCERT पाठ में स्पष्ट रूप से कहा गया है, 'जर्मन भौतिकविद् मैक्स बॉर्न के अनुसार, किसी बिंदु पर तरंग फलन का वर्ग (अर्थात $ψ^2$) उस बिंदु पर इलेक्ट्रॉन का प्रायिकता घनत्व देता है।'

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1s कक्षक के लिए प्रायिकता घनत्व कहाँ अधिकतम होता है?

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NCERT पाठ कहता है, 'यह ध्यान देने योग्य है कि 1s कक्षक के लिए प्रायिकता घनत्व नाभिक पर अधिकतम होता है और नाभिक से दूर जाने पर यह तीव्रता से घटता है।'

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मुख्य क्वांटम संख्या (n) बढ़ने पर s-कक्षक के आकार पर क्या प्रभाव पड़ता है?

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NCERT पाठ में कहा गया है, 'यह भी देखा गया है कि n बढ़ने के साथ s कक्षक का आकार बढ़ता है, अर्थात 4s > 3s > 2s > 1s, और मुख्य क्वांटम संख्या बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन नाभिक से और दूर स्थित होता है।'

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s-कक्षक के लिए सीमा-पृष्ठ आरेख की आकृति क्या होती है?

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NCERT पाठ स्पष्ट करता है, 's कक्षक के लिए सीमा-पृष्ठ आरेख वास्तव में नाभिक पर केंद्रित एक गोला है। दो विमाओं में यह गोला एक वृत्त जैसा दिखता है। यह उस क्षेत्र को घेरता है जिसमें इलेक्ट्रॉन पाए जाने की प्रायिकता लगभग 90% है। इस प्रकार, हम देखते हैं कि 1s और 2s कक्षक आकृति में गोलीय हैं। वास्तव में सभी s-कक्षक गोलीय सममित होते हैं।'

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किसी भी कक्षक में नोडों की कुल संख्या (त्रिज्य + कोणीय) का सामान्य सूत्र क्या है?

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NCERT पाठ में उल्लेख है, 'नोडों की कुल संख्या (n–1) द्वारा दी जाती है, अर्थात l कोणीय नोडों और (n – l – 1) त्रिज्य नोडों का योग।'

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निम्नलिखित में से कौन-सा कक्षक n=4, l=0 के संगत है?

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NCERT की सारणी के अनुसार, l=0 के लिए कक्षक को 's' से दर्शाया जाता है। अतः n=4, l=0 एक 4s कक्षक के संगत है।

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दिगंशी क्वांटम संख्या (l) मुख्यतः क्या परिभाषित करती है?

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NCERT पाठ में कहा गया है, 'दिगंशी क्वांटम संख्या ‘l’ को कक्षक कोणीय संवेग या सहायक क्वांटम संख्या भी कहा जाता है। यह कक्षक की त्रिविमीय आकृति को परिभाषित करती है।'

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d-कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन किस इलेक्ट्रॉन के प्रवेश के साथ प्रारंभ होता है?

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NCERT पाठ कहता है, 'चूँकि तीन p, पाँच d और सात f कक्षक होते हैं, इसलिए p, d और f कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन क्रमशः 4वें, 6वें और 8वें इलेक्ट्रॉन के प्रवेश के साथ प्रारंभ होगा।' d-कक्षकों के लिए युग्मन 6वें इलेक्ट्रॉन से प्रारंभ होता है, क्योंकि 5 d-कक्षक होते हैं और युग्मन शुरू होने से पहले प्रत्येक को एक इलेक्ट्रॉन मिलता है।

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निम्नलिखित में से कौन-सी विधि ऐल्किल हैलाइडों से बढ़ी हुई कार्बन शृंखला लंबाई वाले कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाने के लिए उपयोग की जा सकती है?

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NCERT पाठ कहता है: 'उपर्युक्त विधियाँ (ऐल्किल हैलाइडों से ग्रिन्यार अभिकर्मक और नाइट्राइल) ऐल्किल हैलाइडों को ऐसे संगत कार्बोक्सिलिक अम्लों में परिवर्तित करने के लिए उपयोगी हैं जिनमें ऐल्किल हैलाइड से एक कार्बन परमाणु अधिक होता है (शृंखला में आरोहण)।'

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