रसायन विज्ञान (Chemistry) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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लीथियम और बेरिलियम अपने-अपने समूहों के अन्य सदस्यों से मुख्यतः इसलिए भिन्न हैं क्योंकि वे:

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NCERT पाठ कहता है, 'उदाहरण के लिए, लीथियम अन्य क्षार धातुओं के विपरीत, और बेरिलियम अन्य क्षारीय मृदा धातुओं के विपरीत, स्पष्ट सहसंयोजक लक्षण वाले यौगिक बनाते हैं; इन समूहों के अन्य सदस्य मुख्यतः आयनिक यौगिक बनाते हैं।'

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लीथियम और मैग्नीशियम, तथा बेरिलियम और ऐलुमिनियम के बीच व्यवहार की समानता कहलाती है:

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NCERT पाठ स्पष्ट रूप से उल्लेख करता है, 'वास्तव में लीथियम और बेरिलियम का व्यवहार अगले समूह के द्वितीय तत्व, अर्थात क्रमशः मैग्नीशियम और ऐलुमिनियम, से अधिक समान है। इस प्रकार की समानता को आवर्ती गुणों में सामान्यतः विकर्ण संबंध कहा जाता है।'

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किसी समूह के प्रथम तत्व (जैसे लीथियम या बोरॉन) के पास उसी समूह के द्वितीय तत्व की तुलना में आबंधन के लिए कम संयोजकता कक्षक उपलब्ध क्यों होते हैं?

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NCERT पाठ समझाता है, 'इसके अतिरिक्त, समूह के प्रथम सदस्य के पास आबंधन के लिए केवल चार संयोजकता कक्षक (2s और 2p) उपलब्ध हैं, जबकि समूहों के द्वितीय सदस्य के पास नौ संयोजकता...'। यह द्वितीय आवर्त तत्वों में d-कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण है (n=2, अतः केवल 2s और 2p कक्षक उपलब्ध हैं)।

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द्वितीय-आवर्त तत्वों के असंगत गुणों के संदर्भ में चर्चित, निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म विकर्ण संबंध प्रदर्शित करने वाले तत्वों को सही दर्शाता है?

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संदर्भ कहता है, 'वास्तव में लीथियम और बेरिलियम का व्यवहार अगले समूह के द्वितीय तत्व, अर्थात क्रमशः मैग्नीशियम और ऐलुमिनियम, से अधिक समान है। इस प्रकार की समानता को आवर्ती गुणों में सामान्यतः विकर्ण संबंध कहा जाता है।' अतः Li और Mg विकर्ण संबंध प्रदर्शित करते हैं।

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समूह 13 के प्रथम तत्व (बोरॉन) और इसके असंगत गुणों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: I. बोरॉन मुख्यतः आयनिक यौगिक बनाता है। II. बोरॉन का आकार छोटा और विद्युत-ऋणात्मकता उच्च है। III. बोरॉन के पास आबंधन के लिए केवल 2s और 2p कक्षक उपलब्ध हैं। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

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समूह 13 का प्रथम तत्व (बोरॉन) अपने छोटे आकार, बड़े आवेश/त्रिज्या अनुपात और उच्च विद्युत-ऋणात्मकता (II) के कारण असंगत गुण प्रदर्शित करता है। अन्य द्वितीय-आवर्त तत्वों की तरह, इसके पास आबंधन के लिए केवल 2s और 2p कक्षक हैं (III), जिससे सीमित संयोजकता और कक्षक प्रसार होता है। अपने भारी सजातीयों के विपरीत, जो अधिक आयनिक यौगिक बनाते हैं, बोरॉन अपनी उच्च ध्रुवण क्षमता के कारण अधिक सहसंयोजक लक्षण वाले यौगिक बनाता है। अतः कथन I गलत है।

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लीथियम द्वारा बनाए गए ऑक्साइड का सूत्र Li₂O है, जबकि सोडियम जैसी भारी क्षार धातुओं के ऑक्साइड भी Na₂O के रूप में दर्शाए जाते हैं। परंतु लीथियम का व्यवहार स्पष्ट सहसंयोजक लक्षण दर्शाता है। इसका अर्थ है कि Li₂O है:

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NCERT कहता है, 'उदाहरण के लिए, लीथियम अन्य क्षार धातुओं के विपरीत... स्पष्ट सहसंयोजक लक्षण वाले यौगिक बनाता है; इन समूहों के अन्य सदस्य मुख्यतः आयनिक यौगिक बनाते हैं।' अतः Li₂O, Na₂O की तुलना में, जो मुख्यतः आयनिक है, अधिक सहसंयोजक लक्षण प्रदर्शित करेगा।

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निम्नलिखित में से कौन-सा द्वितीय-आवर्त तत्वों के 'छोटे आकार' और 'बड़े आवेश/त्रिज्या अनुपात' का प्रत्यक्ष परिणाम है?

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NCERT कहता है कि 'लीथियम अन्य क्षार धातुओं के विपरीत, और बेरिलियम अन्य क्षारीय मृदा धातुओं के विपरीत, स्पष्ट सहसंयोजक लक्षण वाले यौगिक बनाते हैं'। सहसंयोजक लक्षण सहित यह असंगत व्यवहार उनके 'छोटे आकार, बड़े आवेश/त्रिज्या अनुपात और उच्च विद्युत-ऋणात्मकता' के कारण है।

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प्रतिनिधि तत्वों की संयोजकता प्रायः सबसे बाहरी कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या या आठ में से सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या घटाने पर प्राप्त संख्या के बराबर होती है। द्वितीय-आवर्त तत्वों का असंगत व्यवहार विशेष रूप से आबंधन क्षमता के लिए इस प्रवृत्ति को कैसे प्रभावित करता है?

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पाठ कहता है, 'समूह के प्रथम सदस्य के पास आबंधन के लिए केवल चार संयोजकता कक्षक (2s और 2p) उपलब्ध हैं'। इसका अर्थ है कि द्वितीय-आवर्त तत्व अपना अष्टक प्रसारित नहीं कर सकते, इस प्रकार उनकी अधिकतम सहसंयोजकता चार (एक s और तीन p कक्षक) तक सीमित रहती है। d-कक्षकों की अनुपस्थिति उच्च सहसंयोजकता को रोकती है।

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आवर्ती प्रवृत्तियों पर विचार करते हुए, द्वितीय आवर्त के तत्व 'X' और तृतीय आवर्त के तत्व 'Y' (दोनों एक ही समूह में, और 'X' प्रथम तत्व) के रासायनिक गुणों के विषय में कौन-सा कथन सामान्यतः सही है?

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NCERT के अनुसार, 'असंगत व्यवहार का कारण तत्वों का छोटा आकार, बड़ा आवेश/त्रिज्या अनुपात और उच्च विद्युत-ऋणात्मकता है।' ये कारक द्वितीय-आवर्त तत्वों में उनके भारी समूह सदस्यों (Y) की तुलना में सहसंयोजक आबंधन की अधिक प्रवृत्ति उत्पन्न करते हैं, जो बड़े आकार और कम विद्युत-ऋणात्मकता के कारण अधिक आयनिक यौगिक बनाते हैं। समूह में नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है और विद्युत-ऋणात्मकता घटती है। द्वितीय-आवर्त तत्वों के पास तृतीय-आवर्त तत्वों (3s, 3p, 3d, जहाँ 3d कक्षकों का उपयोग हो सकता है) की तुलना में कम संयोजकता कक्षक (2s, 2p) हैं।

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निम्नलिखित में से कौन-सा क्यूमीन के फीनॉल में रूपांतरण के प्रथम चरण का वर्णन करता है?

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NCERT पाठ के अनुसार, 'क्यूमीन (आइसोप्रोपिलबेंजीन) वायु की उपस्थिति में ऑक्सीकृत होकर क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड बनाता है।' यह क्यूमीन से फीनॉल के औद्योगिक विरचन का सही आरंभिक चरण है।

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