DNA की क्षार इकाइयों के बीच युग्मन किसके द्वारा होता है
(a) DNA में दोनों रज्जुक हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़े रहते हैं। उदाहरण के लिए, ग्वानीन साइटोसीन से तथा ऐडेनीन थायमीन से हाइड्रोजन बंधन द्वारा जुड़ा होता है।
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DNA की क्षार इकाइयों के बीच युग्मन किसके द्वारा होता है
(a) DNA में दोनों रज्जुक हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़े रहते हैं। उदाहरण के लिए, ग्वानीन साइटोसीन से तथा ऐडेनीन थायमीन से हाइड्रोजन बंधन द्वारा जुड़ा होता है।
DNA का वह खंड जो प्रोटीन के संश्लेषण के लिए निर्देश-पुस्तिका की भाँति कार्य करता है, वह है
(c) DNA का वह खंड जो प्रोटीन के संश्लेषण के लिए निर्देश-पुस्तिका की भाँति कार्य करता है, वह जीन है। कोशिका में प्रत्येक प्रोटीन का एक संगत जीन होता है
स्टार्च के जल-अपघटन पर अंततः मिलता है
स्टार्च का तनु अम्लों या एंजाइमों द्वारा जल-अपघटन होता है तथा यह विभिन्न जटिलता वाले अणुओं में टूटकर अंततः D-ग्लूकोस देता है।
न्यूक्लिओटाइडों में H-बंधन के विषय में निम्नलिखित में से कौन सही है?
(a) DNA अणु की संरचना द्विकुंडलिनी होती है। इस संरचना में द्विकुंडली दो दक्षिणावर्त कुंडलित पॉलिन्यूक्लिओटाइड शृंखलाओं से बनी होती है, जो H-बंधों द्वारा जुड़ी रहती हैं। इन कुंडलियों में ऐडेनीन (A) क्षार थायमीन (T) से दो H-बंधों द्वारा तथा ग्वानीन (G) साइटोसीन (C) से तीन H-बंधों द्वारा जुड़ा होता है, जैसे A=T तथा GC.
पाचन की प्रक्रिया में भोजन सामग्री में उपस्थित प्रोटीन जल-अपघटित होकर ऐमीनो अम्ल बनाते हैं। इस प्रक्रिया में सम्मिलित दो एंजाइम
क्रमशः हैं
(c) पाचन की प्रक्रिया में भोजन सामग्री में उपस्थित प्रोटीन जल-अपघटित होकर ऐमीनो अम्ल बनाते हैं। इस प्रक्रिया में दो एंजाइम — पेप्सिन तथा ट्रिप्सिन — निम्नानुसार सम्मिलित होते हैं :
प्रोटीनों की कुंडलिनी संरचना किसके द्वारा स्थापित होती है
(b) प्रोटीन की कुंडलिनी संरचना एक ही पेप्टाइड शृंखला के ऐमाइड समूहों के बीच हाइड्रोजन बंधों द्वारा स्थायी होती है। ये बंध एक इकाई के -NH- समूह तथा तीसरी इकाई के कार्बोनिल समूह की ऑक्सीजन के बीच बनते हैं। कुंडली का एक चक्र पूरा करने में 3.6 ऐमीनो अम्ल लगते हैं। ऐसे H-बंधन से 13-सदस्यीय वलय बनती है। यही H-बंधन कुंडली को अपनी स्थिति में बनाए रखता है।
a-D-ग्लूकोस तथा b-D-ग्लूकोस एक-दूसरे से कार्बन परमाणु में अंतर के कारण भिन्न हैं, जिसका संबंध है
(b) a-d-ग्लूकोस तथा b-D-ग्लूकोस समावयवी हैं, जिन्हें ऐनोमर कहते हैं। वह समावयवी जिसमें हाइड्रॉक्सिल समूह (-OH) दायीं ओर हो, कहलाता है a-d-ग्लूकोस, तथा जिसमें हाइड्रॉक्सिल समूह (-OH) बायीं ओर हो, वह कहलाता है b-D-ग्लूकोस। प्रकाशिक समावयवियों के ऐसे युग्म, जो केवल C1 परमाणु के चारों ओर विन्यास में भिन्न होते हैं, ऐनोमर कहलाते हैं।
ग्लाइकोलिसिस है
(a) ग्लाइकोलिसिस ग्लूकोस के ऑक्सीकरण की पहली अवस्था है। यह एक अवायवीय प्रक्रिया है जिसमें ग्लूकोस का अवक्रमण होकर पाइरुवेट के दो अणु बनते हैं तथा ATP के दो अणु उत्पन्न होते हैं।
जल में सुक्रोस दक्षिणध्रुवण घूर्णक है, तनु HCl के साथ उबालने पर विलयन वामध्रुवण घूर्णक हो जाता है, इस प्रक्रिया में सुक्रोस टूटकर बनाता है
(c) सुक्रोस का जलीय विलयन दक्षिणध्रुवण घूर्णक है, जिसका है। तनु अम्लों या इन्वर्टेज एंजाइम द्वारा जल-अपघटन पर गन्ना शर्करा (सुक्रोस) D(+)-ग्लूकोस तथा D-(-)-फ्रक्टोस का समान-मोलर मिश्रण देती है
अतः सुक्रोस दक्षिणध्रुवण घूर्णक है, परंतु जल-अपघटन के बाद दक्षिणध्रुवण घूर्णक ग्लूकोस तथा वामध्रुवण घूर्णक फ्रक्टोस देती है। D-(-)-फ्रक्टोस का विशिष्ट घूर्णन D-(+)-ग्लूकोस से अधिक होता है। अतः परिणामी विलयन वामध्रुवण घूर्णक प्रकृति का होता है, जिसका विशिष्ट घूर्णन -39.9.
ग्लूकोस अणु फेनिल हाइड्राजीन के 'X' अणुओं के साथ अभिक्रिया करके ओसाजोन देता है। 'X' का मान है
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