NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?

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(A)

  ऑक्साइडों की क्षारीय सामर्थ्य इस क्रम में बढ़ती है Li2O<Na2O<K2O<Rb2O<Cs2O. क्षारीय सामर्थ्य में यह वृद्धि

  I.E. में कमी तथा विद्युत्-धनी गुण में वृद्धि के कारण है। हैलाइडों के गलनांक

  इस क्रम में घटते हैं NaF>NaCl>NaBr>Nal, जैसे-जैसे हैलाइड आयन का आकार

  बढ़ता है। गलनांक में यह कमी फेजान नियम के अनुसार ऋणायन के आकार में वृद्धि के साथ

  सहसंयोजी गुण बढ़ने के कारण है।

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सॉल्वे (अथवा अमोनिया-सोडा) प्रक्रम द्वारा सोडियम कार्बोनेट के निर्माण में प्रयुक्त कच्चा माल है :

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(C)

  NH3+CO2+H2O→          NH4HCO3NaCl+NH4HCO3→            NaHCO3+NH4Cl2NaHCO3→     150°C   Na2CO3+CO2+H2O2NH4Cl+CaOH2→            2NH3+H2O+CaCl2 by product

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पोटैशियम सुपरऑक्साइड की निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रियाएँ अंतरिक्ष और पनडुब्बियों में प्रयुक्त श्वसन उपकरणों में ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति करती हैं?

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(B)

(2) KO2+2H2O→            KOH+H2O2+12O2

(3) 4KO2+2CO2→           2K2CO3+3O2

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निम्नलिखित में से कौन ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों के रूप में कार्य करता है?

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(D)

NaNO2 (सोडियम नाइट्राइट) ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों के रूप में कार्य करता है क्योंकि इसमें नाइट्रोजन परमाणु +3 मध्यवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था में होता है।

ऑक्सीकारक गुण: 2NaNO2+2Kl+2H2SO4→NaSO4+K2SO4+2NO+2H2O+l2

अपचायक गुण: NaNO2+H2O2→NaNO3+H2O.

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क्षारीय मृदा धातु नाइट्रेट गर्म करने पर वियोजित होकर देते हैं:

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(C) 2MNO32→     ∆     2MO+4NO2+O2M=Be, Mg, Ca, Sr, Ba

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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और सही कथन चुनिए।

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(C)

(1) समूह में नीचे जाने पर विलेयता बढ़ती है क्योंकि जालक ऊर्जा में परिवर्तन जलयोजन ऊर्जा की तुलना में अधिक होता है। धात्विक गुण बढ़ने के कारण तापीय स्थायित्व और क्षारीय गुण दोनों समूह में नीचे जाने पर बढ़ते हैं।

(2) यह एक सही कथन है।

(3) बेरिलियम और एल्युमिनियम का विकर्ण संबंध है। दोनों के क्लोराइड सहसंयोजक प्रकृति के होने के कारण कार्बनिक विलायकों में विलेय हैं। दोनों के क्लोराइड इलेक्ट्रॉन न्यून होने के कारण प्रबल लुईस अम्ल की तरह कार्य करते हैं।

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अभिकथन : लिथियम आयन स्वयं तथा इसके यौगिक भी, समूह के अन्य सदस्यों की तुलना में अधिक जलयोजित होते हैं।

कारण : Li+ क्षार धातुओं में सबसे छोटा होता है और अन्य क्षार धातु आयनों की तुलना में जल के अणुओं का ध्रुवण अधिक सरलता से करता है।

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अभिकथन और कारण दोनों सही कथन हैं तथा कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

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अभिकथन : बेरिलियम एल्युमिनियम से समानता रखता है।

कारण : Be2+ आयन का आवेश/त्रिज्या अनुपात Al3+ आयन के लगभग समान होता है।

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(A) बेरिलियम और एल्युमिनियम में विकर्ण संबंध होता है।

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अभिकथन : क्षार धातुएँ द्रव अमोनिया में घुलकर विलायीकृत धनायन तथा विलायीकृत इलेक्ट्रॉन उत्पन्न करती हैं।

कारण : सांद्र विलयनों में, द्रव अमोनिया में क्षार धातुओं के विलयन का नीला रंग कांस्य रंग में बदल जाता है।

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(B) M+x+yNH3→MNH3x++eNH3y-

3M से अधिक सांद्रता पर विलयन नीले नहीं रहते, बल्कि धातु आयन गुच्छों (clusters) के बनने के कारण धात्विक चमक के साथ कांस्य/तांबे जैसे रंग के हो जाते हैं।

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अभिकथन : समूह में नीचे जाने पर विद्युत-धनात्मक गुण बढ़ने के साथ क्षार धातुओं के कार्बोनेट तथा हाइड्रोजन कार्बोनेट की स्थिरता बढ़ती है।

कारण : लिथियम कार्बोनेट ऊष्मा के प्रति उतना स्थायी नहीं है; लिथियम का आकार बहुत छोटा होने के कारण यह बड़े CO32- आयन का ध्रुवण करता है जिससे अधिक स्थायी Li2O और CO2 बनते हैं।

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(B) (i) बड़ा धनायन बड़े ऋणायन को स्थायित्व प्रदान करता है और इसका विपरीत भी सत्य है।

(ii) क्षार धातुओं के कार्बोनेट तथा बाइकार्बोनेट की स्थिरता उनके धात्विक गुण पर निर्भर करती है।
कार्बोनेट तथा बाइकार्बोनेट की स्थिरता ∝ उनके धात्विक अर्थात् विद्युत-धनात्मक गुण के।

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Frequently Asked Questions

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