सूत्र वाले यौगिक के लिए कितने प्रकाशिक सक्रिय रूप संभव हैं,
CHO.CHOH.CHOH.CHOH.CH2OH?
(d) a = 2n; n=3
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सूत्र वाले यौगिक के लिए कितने प्रकाशिक सक्रिय रूप संभव हैं,
CHO.CHOH.CHOH.CHOH.CH2OH?
(d) a = 2n; n=3
वे समावयवी जो एकल बंध के चारों ओर घूर्णन द्वारा परस्पर परिवर्तित हो सकते हैं:
(a) यह संरूपण (conformation) की परिभाषा है।
α-D-(+)-ग्लूकोस तथा β-D-(+)-ग्लूकोस हैं:
α-D-(+)-ग्लूकोस तथा β-D-(+)-ग्लूकोस एनोमर हैं। एनोमर वे त्रिविम समावयवी हैं जो किसी विशिष्ट कार्बन परमाणु, सामान्यतः कार्बोहाइड्रेट के एनोमेरिक कार्बन परमाणु के चारों ओर विन्यास में भिन्न होते हैं। इनका आण्विक सूत्र समान होता है परंतु त्रिविम व्यवस्था भिन्न होती है।
इलेक्ट्रोफाइल के संबंध में सही कथन है
(d) इलेक्ट्रोफाइल को इलेक्ट्रॉन-न्यून स्पीशीज़ के रूप में परिभाषित किया जाता है जो इलेक्ट्रॉन-समृद्ध क्षेत्रों पर आक्रमण करती है। इलेक्ट्रॉन-न्यून होने के कारण, इलेक्ट्रोफाइल लुईस अम्ल की तरह व्यवहार करते हैं।
उदाहरणस्वरूप H+, Cl+, Br+, NO2+, NO+ आदि।
इलेक्ट्रोफाइल उदासीन अणुओं के रूप में भी देखे जा सकते हैं, उदाहरणस्वरूप :CR2, N··R, BF3 आदि।
अतः हम कह सकते हैं कि इलेक्ट्रोफाइल उदासीन अथवा धनावेशित स्पीशीज़ हो सकता है और न्यूक्लियोफाइल से इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करके बंध बना सकता है।
एथेन के संरूपकों (conformers) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
(d) वे समावयवी जो किसी बंध के विदलन के बिना एकल बंधों के चारों ओर घूर्णन द्वारा संभव होते हैं, संरूपक कहलाते हैं। एथेन में अनंत संख्या में संरूपण संभव हैं। दो चरम रूप होते हैं, स्टैगर्ड संरूपण जो सबसे स्थायी है तथा एक्लिप्स्ड संरूपण जो सबसे कम स्थायी है। एथेन के संरूपकों में, बंध कोण तथा बंध लंबाई समान रहते हैं जबकि इनकी ऊर्जा, स्थायित्व तथा द्विफलक कोण भिन्न होते हैं।
अम्लता का सही क्रम कौन सा है?
(b) हाइड्रोकार्बनों में C-परमाणु का s-लक्षण जितना अधिक होगा, उस कार्बन की विद्युत-ऋणात्मकता उतनी ही अधिक होगी और इस प्रकार विद्युत-ऋणात्मक कार्बन से जुड़े H का अम्लीय गुण उतना ही अधिक होगा।
CH≡CH में sp संकरण (50% s-लक्षण), CH2=CH2 में sp2 संकरण (33% s-लक्षण), CH3-CH3 में sp3 संकरण (25% s-लक्षण) होता है। विद्युत-ऋणात्मकता तथा टर्मिनल H का अम्लीय गुण दोनों sp से sp3 की ओर घटते हैं।
अतः, CH≡CH > CH3C≡CH > CH2=CH2 > CH3-CH3
ऑर्थो तथा पैरा-नाइट्रोफेनॉलों के 1:1 मिश्रण को पृथक करने की सबसे उपयुक्त विधि है
(d) भाप आसवन का उपयोग उन पदार्थों को शुद्ध करने के लिए किया जाता है जो
(i) भाप में वाष्पशील हैं परंतु जल में अमिश्रणीय हैं।
(ii) जल के क्वथनांक पर पर्याप्त उच्च वाष्प दाब रखते हैं।
(iii) अवाष्पशील अशुद्धियाँ रखते हैं।
भाप आसवन प्रक्रिया का उपयोग दो कार्बनिक यौगिकों के मिश्रण को पृथक करने के लिए भी किया जा सकता है जिनमें से एक भाप-वाष्पशील है जबकि दूसरा नहीं है। ऑर्थो तथा पैरा-नाइट्रोफेनॉलों में, पैरा-रूप अवाष्पशील है, अतः इन्हें भाप आसवन द्वारा पृथक किया जाता है।
एथेन के स्टैगर्ड तथा एक्लिप्स्ड संरूपणों की तुलना के संबंध में सही कथन है
एथेन का स्टैगर्ड संरूपण, एक्लिप्स्ड संरूपण से अधिक स्थायी है क्योंकि इसमें कोई मरोड़ी तनाव नहीं होता। स्टैगर्ड संरूपण में, हाइड्रोजन परमाणु इस प्रकार व्यवस्थित होते हैं कि उनके बीच त्रिविम प्रतिकर्षण न्यूनतम हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप स्थितिज ऊर्जा कम होती है।
ऐरोमैटिक प्रतिस्थापन में कुछ मेटा-निर्देशक प्रतिस्थापी दिए गए हैं। इनमें से कौन सा सबसे अधिक निष्क्रियकारी (deactivating) है?
निम्नलिखित यौगिकों में से इलेक्ट्रोफिलिक नाइट्रीकरण के प्रति सबसे अधिक क्रियाशील है
दिए गए विकल्पों में से टॉलूईन इलेक्ट्रोफिलिक नाइट्रीकरण के प्रति सबसे अधिक क्रियाशील है। मेथिल समूह एक इलेक्ट्रॉन-दाता प्रतिस्थापी होने के कारण बेंज़ीन वलय को सक्रिय कर देता है, जिससे यह नाइट्रो समूह द्वारा इलेक्ट्रोफिलिक आक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है।
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