जल प्रदूषण के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है
आर्सेनिक मनुष्यों के लिए कैंसरजन है तथा दूषित जल पीने से त्वचा, फेफड़े, मूत्राशय तथा वृक्क के कैंसर, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, परिधीय संवहनी रोग तथा त्वचा-क्षतों का जोखिम बढ़ सकता है
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जल प्रदूषण के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है
आर्सेनिक मनुष्यों के लिए कैंसरजन है तथा दूषित जल पीने से त्वचा, फेफड़े, मूत्राशय तथा वृक्क के कैंसर, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, परिधीय संवहनी रोग तथा त्वचा-क्षतों का जोखिम बढ़ सकता है
निम्नलिखित में से कौन-सा वायुमंडलीय प्रदूषक दिल्ली में मोटर वाहनों के निकास से उत्पन्न नहीं होता
यह उड़न राख है। उड़न राख, जिसे फ्ल्यू-ऐश भी कहते हैं, दहन में उत्पन्न अवशेषों में से एक है तथा इसमें वे सूक्ष्म कण होते हैं जो उद्योगों से निकलने वाली फ्ल्यू गैसों के साथ ऊपर उठते हैं।
प्रदूषण नियंत्रित किया जा सकता है
उपरोक्त सभी
सभी कारक प्रदूषण उत्पन्न कर सकते हैं...
यही तथ्य बिंदु है.....
यदि जल प्रदूषण अपनी वर्तमान दर से जारी रहा, तो अंततः यह
यदि जल प्रदूषण अपनी वर्तमान दर से जारी रहा, तो अंततः यह जलीय पादपों के लिए ऑक्सीजन अणुओं को अनुपलब्ध कर देगा तथा उन्हें मार देगा।
बंबई तथा कलकत्ता जैसे नगरों में मुख्य वायु प्रदूषक हैं
सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) सल्फर के ऑक्साइडों नामक अत्यधिक क्रियाशील गैसों के समूह में से एक है। SO2 उत्सर्जन के सबसे बड़े स्रोत विद्युत संयंत्रों में जीवाश्म ईंधन का दहन (73%) तथा अन्य औद्योगिक इकाइयाँ (20%) हैं। कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का सबसे बड़ा मानव स्रोत भी जीवाश्म ईंधनों का दहन है, जो मानव कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का 87% उत्पन्न करता है। CO2 वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का सबसे बड़ा एकल स्रोत है।
औद्योगिक नगरों में अम्ल वर्षा की हाल की रिपोर्टें किसके द्वारा वायुमंडलीय प्रदूषण के प्रभाव के कारण हैं
विद्युत संयंत्रों, कारखानों तथा कारों से नाइट्रोजन के ऑक्साइडों तथा सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन अम्ल वर्षा का कारण बनता है, जब वे बादलों में जल की सूक्ष्म बूँदों से अभिक्रिया करके सल्फ्यूरिक तथा नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं। तब इन बादलों से होने वाली वर्षा अम्ल के रूप में गिरती है, जिसे अम्ल वर्षा कहते हैं
प्रदूषण हमारी भूमि तथा जल के भौतिक, रासायनिक या जैविक लक्षणों में एक परिवर्तन है जो हो सकता है
पर्यावरण प्रदूषण को हमारी वायु, भूमि तथा जल के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक लक्षणों में अवांछनीय परिवर्तन के रूप में परिभाषित किया जाता है। अति-जनसंख्या, तीव्र औद्योगीकरण तथा कृषि एवं वनोन्मूलन जैसी अन्य मानवीय गतिविधियों के परिणामस्वरूप पृथ्वी विविध प्रदूषकों से भर गई जो उप-उत्पादों के रूप में निर्मुक्त हुए।
इन दिनों सबसे बड़ा वायु प्रदूषक कौन है
वाहन लगभग 20%,
धूल लगभग 40% तथा
उद्योग लगभग 13%
प्रदूषण में हिस्सेदार हैं।
पवन तथा जल की क्रिया द्वारा मृदा का हटना कहलाता है
ऊपरी मृदा, मृदा का महत्वपूर्ण भाग है तथा पादपों के लिए पोषण का मुख्य स्रोत है। जल, पवन, गुरुत्व या हिम जैसे प्राकृतिक कारकों द्वारा ऊपरी मृदा की हानि या विक्षोभ मृदा अपरदन कहलाता है।
अम्ल वर्षा किसके वायुमंडलीय प्रदूषण के कारण होती है
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