भिन्न-भिन्न विधियों से बनाए गए स्वर्ण के कोलॉइडी विलयन भिन्न-भिन्न रंगों के होते हैं, क्योंकि:
कोलॉइडी विलयनों का रंग कोलॉइडी कणों के आकार पर निर्भर करता है।
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भिन्न-भिन्न विधियों से बनाए गए स्वर्ण के कोलॉइडी विलयन भिन्न-भिन्न रंगों के होते हैं, क्योंकि:
कोलॉइडी विलयनों का रंग कोलॉइडी कणों के आकार पर निर्भर करता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(b) उत्क्रमणीय अभिक्रिया के लिए यह अग्र तथा पश्च दोनों अभिक्रियाओं की गति को समान मात्रा में बढ़ाता है। अतः यह साम्य को विचलित नहीं करता, अर्थात् अभिक्रिया का साम्य स्थिरांक नहीं बदलता, परंतु साम्य शीघ्र प्राप्त करने में सहायता करता है।
As2S3 के स्कंदन के लिए प्रयुक्त विद्युत अपघट्यों के स्कंदन मान (मिलीमोल प्रति लीटर में) नीचे दिए गए हैं
I. (NaCl) =52 II. (BaCl2) =0.69
III. (MgSO4) = 0.22
उनकी स्कंदन क्षमता का सही क्रम है
(c) स्कंदन क्षमता जितनी कम होगी, मिलीमोल प्रति लीटर में स्कंदन मान उतना ही अधिक होगा, अर्थात् स्कंदन क्षमता स्कंदन मान के व्युत्क्रमानुपाती है। अतः स्कंदन क्षमता का सही क्रम है
MgSO4 > BaCl2 > NaCl
अथवा III>II>I
किसी रासायनिक अभिक्रिया के दौरान उत्प्रेरक मिलाने से निम्नलिखित में से कौन-सी राशि बदल जाती है?
निम्नलिखित में से कौन-सा अभिलक्षण अधिशोषण से संबंधित है?
(a) अधिशोषण एक स्वतःप्रवर्तित प्रक्रम है जिसमें ऊर्जा मुक्त होती है तथा अधिशोषित पदार्थ की यादृच्छिकता (अर्थात् एंट्रॉपी) घटती है।
स्वतःप्रवर्तित प्रक्रम के लिए G ऋणात्मक होना चाहिए।
G = H - TS
चूँकि यह प्रक्रम ऊष्माक्षेपी है तथा अणुओं की यादृच्छिकता (एंट्रॉपी) घटती है, अतः H तथा S दोनों भी ऋणात्मक होंगे।
कोहरा किसका कोलॉइडी विलयन है:-
(d) कोहरा गैस में द्रव का कोलॉइडी विलयन है, जिसमें द्रव परिक्षिप्त प्रावस्था तथा गैस परिक्षेपण माध्यम है। अन्य विकल्पों के उदाहरण इस प्रकार हैं:
द्रव में गैस: शेविंग क्रीम, सोडा वॉटर का झाग
गैस में ठोस: वायु में धूल
गैस में गैस : वायुमंडलीय वायु
कोलॉइडी विलयन का कौन-सा गुण कोलॉइडी कणों पर उपस्थित आवेश से स्वतंत्र है?
स्कंदन सामान्यतः विद्युत अपघट्य मिलाने से होता है। जब किसी कोलॉइडी विलयन में विद्युत अपघट्य मिलाया जाता है, तो सॉल के कण विपरीत आवेश वाले आयनों को ग्रहण कर लेते हैं। परिणामस्वरूप उनका आवेश उदासीन हो जाता है।
वैद्युतकणसंचलन आरोपित विद्युत विभव के अंतर्गत कोलॉइडी कणों की गति को वैद्युतकणसंचलन कहते हैं। इसे उस परिघटना के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसमें विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में परिक्षेपण माध्यम के अणुओं को गति करने दिया जाता है जबकि कोलॉइडी कणों को गति करने नहीं दिया जाता।
टिंडल प्रभाव सॉल कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन है, जो उन पर उपस्थित आवेश से प्रभावित नहीं होता।
फ्रॉयंडलिक अधिशोषण समतापी में 1/n का मान है
फ्रॉयंडलिक अधिशोषण समतापी में,
x/m = kp1/n
n का मान सदैव 1 से अधिक होता है। अतः 1/n का मान सभी स्थितियों में 0 तथा 1 के बीच होता है।
एंजाइम उत्प्रेरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
अधिकांश एंजाइम प्रोटीन प्रकृति के होते हैं। ये अत्यधिक विशिष्ट होते हैं तथा उच्च ताप या UV किरणों द्वारा विकृतीकृत हो जाते हैं। इष्टतम ताप पर, जो सामान्यतः 25°-35°C के बीच होता है, एंजाइम की सक्रियता अधिकतम होती है।
द्रवरागी कोलॉइडी सॉल की रक्षी क्षमता किसके रूप में व्यक्त की जाती है
द्रवविरागी सॉल अस्थायी होते हैं, अतः उनमें कुछ द्रवरागी कोलॉइड मिलाकर उन्हें स्थायी बनाया जाता है, जो उन्हें अवक्षेपण से बचाते हैं। इसीलिए द्रवरागी कोलॉइडों को रक्षी कोलॉइड कहते हैं। उनकी रक्षी क्षमता स्वर्ण संख्या के रूप में व्यक्त की जाती है।
ध्यान दें: स्वर्ण संख्या जितनी कम होगी, रक्षी क्षमता उतनी ही अधिक होगी
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